लावालौंग में पुलिया निर्माण को लेकर बड़ा खुलासा, वन विभाग पर अवैध खनन और घटिया कार्य का आरोप

लावालौंग में पुलिया निर्माण को लेकर बड़ा खुलासा, वन विभाग पर अवैध खनन और घटिया कार्य का आरोप

author Binod Kumar
32 Views Download E-Paper (9)
#चतरा #वन_विवाद : लावालौंग में पुलिया निर्माण के लिए जंगल से अवैध पत्थर खनन के आरोप से ग्रामीणों में आक्रोश।

चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड में वन विभाग द्वारा कराए जा रहे पुलिया निर्माण को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने जंगल से अवैध पत्थर खनन और घटिया सामग्री के उपयोग की शिकायत की है। इस मामले ने वन संरक्षण और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

Join WhatsApp
  • लावालौंग प्रखंड (चतरा) में पुलिया निर्माण को लेकर विवाद।
  • वनरक्षक अमित कुमार पर अवैध खनन का आरोप।
  • जंगल से पत्थर निकालकर निर्माण कार्य में उपयोग की शिकायत।
  • स्थानीय मजदूरों को छोड़ बाहरी मजदूरों से कराया जा रहा काम
  • वन्यजीवों के आवास को नुकसान का भी आरोप।
  • वनपाल रवि नायक ने कहा—मामले की होगी जांच।

चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड अंतर्गत चानी और कदहे गांव के समीप वन विभाग द्वारा कराए जा रहे पुलिया निर्माण कार्य ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर वन विभाग पर जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, वहीं अब उसी विभाग पर अवैध खनन और नियमों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं।

जंगल से अवैध पत्थर निकालने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण के लिए आवश्यक पत्थर और बालू किसी अधिकृत खदान से नहीं खरीदे जा रहे हैं, बल्कि पास के घने और प्रतिबंधित जंगल क्षेत्र से अवैध रूप से निकाले जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर के माध्यम से जंगल से पत्थर लाकर सीधे निर्माण कार्य में उपयोग किया जा रहा है, जिससे वन क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

ग्रामीणों का आरोप: “जंगल की संपदा को खुलेआम लूटा जा रहा है और नियमों की अनदेखी की जा रही है।”

वनरक्षक पर सीधे आरोप

इस पूरे मामले में वनरक्षक अमित कुमार का नाम सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हीं के नेतृत्व में यह अवैध खनन और निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जो सीधे तौर पर वन अधिनियम का उल्लंघन है।

घटिया सामग्री और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि गुणवत्ता इतनी खराब है कि एक वर्ष पहले बना पुलिया भी एक साल के भीतर ही धराशायी हो गया था।

इससे निर्माण कार्य की पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बाहरी मजदूरों से कराया जा रहा काम

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि निर्माण कार्य में स्थानीय मजदूरों को काम नहीं दिया जा रहा है, बल्कि बाहरी मजदूरों को लगाया गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्माण में हो रही अनियमितताओं को छिपाया जा सके और स्थानीय लोग इसका विरोध न कर सकें।

ग्रामीणों को धमकी देने का आरोप

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जब वे जंगल से सूखी लकड़ी लेने जाते हैं, तो वनकर्मी उन्हें जुर्माना और कार्रवाई की धमकी देते हैं।

एक ग्रामीण ने कहा: “आम लोगों पर सख्ती और खुद नियम तोड़ना, यह दोहरा मापदंड बर्दाश्त नहीं होगा।”

वन्यजीवों के आवास पर खतरा

जंगल से लगातार पत्थर निकालने के कारण वहां के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच रहा है। इससे वन्यजीवों के रहने और भोजन की व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अवैध खनन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है।

विभाग का जवाब

इस मामले में जब वनपाल रवि नायक से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा:

रवि नायक ने कहा: “मुझे इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन नियम के अनुसार माइंस से ही पत्थर लाया जाना चाहिए। अगर जंगल से पत्थर निकाला जा रहा है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

जांच की मांग तेज

ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

न्यूज़ देखो: संरक्षण के जिम्मेदार ही अगर करें दोहन

लावालौंग का यह मामला बेहद गंभीर संकेत देता है कि जिन पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी है, वही अगर नियमों का उल्लंघन करें तो स्थिति चिंताजनक हो जाती है। यह सिर्फ एक पुलिया का मामला नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण और व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है। अब प्रशासन की भूमिका और कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पर्यावरण बचाना हम सबकी जिम्मेदारी

प्रकृति हमें जीवन देती है, और इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। यदि कहीं भी पर्यावरण से खिलवाड़ हो रहा है, तो चुप रहना समस्या को बढ़ावा देना है।

आइए हम जागरूक बनें, सवाल उठाएं और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं।

अगर यह खबर आपको महत्वपूर्ण लगती है, तो इसे जरूर साझा करें। अपनी राय कमेंट में दें और पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

लावालोंग, चतरा

🔔

Notification Preferences

error: