
#सिसई #वन्यजीव_संरक्षण : घायल सारस को ग्रामीणों ने देखा—वन विभाग ने सुरक्षित पकड़कर इलाज शुरू किया।
गुमला के सिसई प्रखंड में महादेव चेगरी गांव के पास घायल सारस पक्षी का वन विभाग ने रेस्क्यू किया। ग्रामीणों की सूचना पर टीम ने पक्षी को पकड़कर पशु चिकित्सालय में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार पक्षी उम्रदराज और बीमार है। उपचार के बाद उसे फिर से जंगल में छोड़ा जाएगा।
- महादेव चेगरी गांव में घायल सारस पक्षी मिला।
- वन विभाग ने रेस्क्यू कर सुरक्षित पकड़ा।
- पक्षी को पशु चिकित्सालय में इलाज के लिए लाया गया।
- डॉक्टर ने बताया—उम्र अधिक, बीमार और कमजोर।
- स्वस्थ होने के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत महादेव चेगरी गांव में एक दुर्लभ और विलुप्तप्राय सारस पक्षी के मिलने से क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया। बुधवार सुबह करीब 9 बजे ग्रामीणों ने इस पक्षी को घायल और कमजोर अवस्था में देखा, जिसके बाद तुरंत वन विभाग को सूचना दी गई।
ग्रामीणों की सतर्कता से बची जान
ग्रामीणों ने जैसे ही पक्षी को देखा, उन्होंने बिना देर किए वन विभाग को इसकी जानकारी दी। उनकी इस सतर्कता से पक्षी की जान बचाने में मदद मिली।
एक ग्रामीण ने बताया: “पक्षी उड़ नहीं पा रहा था और काफी कमजोर दिख रहा था।”
वन विभाग ने किया रेस्क्यू
सूचना मिलते ही सिसई और गुमला वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और एक रेस्क्यू अभियान चलाया। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सारस पक्षी को सुरक्षित पकड़ लिया।
इस रेस्क्यू टीम में सतीश भगत, रजत, बैरागी उरांव सहित अन्य सदस्य शामिल थे।
पशु चिकित्सालय में शुरू हुआ इलाज
रेस्क्यू के बाद पक्षी को प्रखंड पशु चिकित्सालय केंद्र लाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज शुरू किया गया।
डॉक्टरों ने बताया: “पक्षी की उम्र अधिक हो गई है और वह बीमार है, जिसके कारण वह सही से खाना नहीं खा पा रहा है।”
वन विभाग की निगरानी में पक्षी
वन विभाग ने बताया कि फिलहाल पक्षी को उनके संरक्षण में रखा गया है और उसका इलाज जारी है। जैसे ही वह स्वस्थ होगा, उसे फिर से प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया जाएगा।
वन्यजीव संरक्षण का संदेश
वन विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें कहीं भी वन्य जीव घायल या असहाय स्थिति में दिखें, तो तुरंत सूचना दें।
वन विभाग ने कहा: “वन्यजीवों की सुरक्षा में जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है।”
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल
यह घटना दिखाती है कि यदि ग्रामीण और प्रशासन मिलकर काम करें, तो वन्यजीवों की रक्षा संभव है। यह प्रयास पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है।
न्यूज़ देखो: वन्यजीवों की सुरक्षा में जनभागीदारी जरूरी
सिसई की यह घटना यह दर्शाती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल विभाग का काम नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति सतर्क रहे, तो कई दुर्लभ प्रजातियों को बचाया जा सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रकृति की रक्षा करें
वन्यजीव हमारे पर्यावरण का अहम हिस्सा हैं।
जरूरी है कि हम उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें।
छोटी सी सूचना भी किसी जीव की जान बचा सकती है।
आइए, हम मिलकर प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा करें।
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