चूरी परियोजना कार्यालय के समीप सड़क धंसने से दहशत, ग्रामीणों ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

चूरी परियोजना कार्यालय के समीप सड़क धंसने से दहशत, ग्रामीणों ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

author Jitendra Giri
3 Views Download E-Paper (0)
#खलारी #भूधंसान : सड़क धंसने के बाद ग्रामीणों ने प्रबंधन के खिलाफ जताया आक्रोश।

रांची जिले के खलारी क्षेत्र अंतर्गत चूरी परियोजना कार्यालय के समीप सड़क धंसने की घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बरवाटांड़ क्षेत्र में तेज धमाके के साथ सड़क फटकर धंस जाने पर ग्रामीणों ने चुरी अंडरग्राउंड माइंस को जिम्मेदार ठहराया है। बिहार कोलियरी कामगार यूनियन (सीटू) और ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन पर उपेक्षा और रैयतों के साथ सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया है।

Join WhatsApp
  • डकरा-पिपरवार मुख्य मार्ग पर चूरी परियोजना कार्यालय के समीप सड़क धंसी।
  • ग्रामीणों ने चूरी अंडरग्राउंड माइंस को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया।
  • सीटू नेताओं ने एनके एरिया में लगातार हो रही भू-धंसान घटनाओं पर चिंता जताई।
  • प्रबंधन पर रैयतों और विस्थापितों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप।
  • आंदोलन की चेतावनी देते हुए जल्द बैठक बुलाने की घोषणा।
  • बैठक में ग्रामीणों और यूनियन नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था की मांग उठाई।

रांची जिले के खलारी क्षेत्र में चूरी परियोजना कार्यालय के समीप सड़क धंसने की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। डकरा-पिपरवार मुख्य मार्ग पर बरवाटांड़ इलाके में अचानक तेज धमाके के साथ सड़क फटकर धंस गई, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी और भय का माहौल बन गया। घटना के बाद बिहार कोलियरी कामगार यूनियन (सीटू), ग्रामीणों और चुरी परियोजना पदाधिकारी अनुज कुमार के साथ एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें लोगों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।

ग्रामीणों का आरोप है कि चुरी अंडरग्राउंड माइंस के संचालन के कारण लगातार जमीन कमजोर हो रही है, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

ग्रामीणों में दहशत, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

घटना के बाद बरवाटांड़ सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों में भय और आक्रोश दोनों देखा गया। ग्रामीणों ने कहा कि खदान संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है और क्षेत्र की जमीन धीरे-धीरे खोखली होती जा रही है।

बैठक में मौजूद बिहार कोलियरी कामगार यूनियन (सीटू) के क्षेत्रीय अध्यक्ष रतिया गंझू ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एनके एरिया में लगातार भू-धंसान की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रबंधन समस्या के स्थायी समाधान को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा।

रतिया गंझू ने कहा: “एनके एरिया में लगातार भू-धंसान हो रहा है। कुछ दिन पहले केडीएच क्षेत्र में भी ऐसी घटना हुई थी, जहां कई घरों में दरार पड़ गई थी। प्रबंधन केवल समय काटने का काम कर रहा है और ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि खदान विस्तार के दौरान कई लोगों के घर तोड़े गए, लेकिन आज तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला। प्रभावित लोग लगातार कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं, बावजूद इसके उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा।

आंदोलन की चेतावनी

सीटू नेताओं और ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन किया जाएगा। यूनियन नेताओं का कहना है कि लगातार हो रही घटनाएं स्थानीय लोगों की जान-माल के लिए खतरा बनती जा रही हैं।

रतिया गंझू ने कहा: “प्रबंधन ने खदान खोलने से पहले लंबा-चौड़ा वादा किया था, लेकिन आज तक किसी वादे को पूरा नहीं किया गया। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हम लोग आंदोलन की घोषणा करेंगे।”

ग्रामीणों ने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाए और जहां जमीन धंसने की आशंका है वहां तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाएं।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

स्थानीय लोगों ने बताया कि एनके एरिया में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले केडीएच क्षेत्र में भी भू-धंसान की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां कई मकानों में दरारें पड़ गई थीं। लोगों का कहना है कि लगातार हो रही इन घटनाओं से स्पष्ट है कि भूमिगत खनन का असर अब सतह पर दिखने लगा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन कंपनियां केवल उत्पादन और मुनाफे पर ध्यान दे रही हैं, जबकि प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।

बैठक में कई लोग रहे मौजूद

बैठक में सीटू के जोनल अध्यक्ष रतिया गंझू, क्षेत्रीय सचिव इरफान खान, किरन देवी, चंद्र महतो, अरुण बैठा, रंजनी कुमारी, सुजीता देवी, अनिता देवी, नन्दन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में क्षेत्र की सुरक्षा और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की।

न्यूज़ देखो: भू-धंसान अब चेतावनी नहीं, गंभीर संकट का संकेत

खलारी और एनके एरिया में लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। खनन परियोजनाओं के बीच स्थानीय लोगों की सुरक्षा, पुनर्वास और मुआवजा सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। यदि समय रहते प्रशासन और प्रबंधन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षा और अधिकार दोनों जरूरी, जागरूक बनें और आवाज उठाएं

विकास तभी सार्थक है जब उसमें लोगों की सुरक्षा और सम्मान शामिल हो।
ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज करना किसी बड़े खतरे को न्योता देना है।
सुरक्षित जीवन हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए प्रशासन को जवाबदेह बनाना जरूरी है।
अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने में सहभागी बनें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

खलारी, रांची

🗣️ Join the Conversation!

What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

🔔

Notification Preferences

error: