हुनर से रोजगार की राह पर बढ़ती ग्रामीण बेटियां, बेतला वन विभाग की पहल बनी आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव

हुनर से रोजगार की राह पर बढ़ती ग्रामीण बेटियां, बेतला वन विभाग की पहल बनी आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव

author Akram Ansari
1 Views Download E-Paper (20)
#बरवाडीह #महिला_सशक्तिकरण : बेतला में वन विभाग की पहल से ग्रामीण युवतियों को मिला रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड स्थित बेतला में पलामू व्याघ्र परियोजना के तहत वन विभाग द्वारा ग्रामीण युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सराहनीय पहल की गई है। बेतला डॉरमेट्री परिसर में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से युवतियों को सिलाई, कंप्यूटर, डिजाइनिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे रोजगारोन्मुखी कौशल सिखाए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के साथ ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। कार्यक्रम में वरिष्ठ वन अधिकारियों की मौजूदगी ने इस प्रयास को और मजबूती प्रदान की है।

Join WhatsApp
  • बेतला डॉरमेट्री परिसर में जनभागीदारी से चल रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • ग्रामीण क्षेत्र की युवतियों को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर।
  • सिलाई, कंप्यूटर, डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कोर्स संचालित।
  • प्रशिक्षक टैनर तुलसी पवार, पवन बती, कासिम मिर्जा, अजय बघेल दे रहे प्रशिक्षण।
  • प्रधान मुख्य वन संरक्षक परितोष उपाध्याय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित।
  • कार्यक्रम से महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को मिल रही नई दिशा।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला क्षेत्र में वन विभाग की यह पहल ग्रामीण बेटियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिख रही है। हुनर आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से युवतियों को रोजगार से जोड़ने का यह प्रयास न केवल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि सामाजिक सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। प्रशिक्षण केंद्र में युवतियां पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ नए कौशल सीखती नजर आ रही हैं।

जनभागीदारी से संचालित प्रशिक्षण केंद्र

पलामू व्याघ्र परियोजना अंतर्गत बेतला वन विभाग द्वारा डॉरमेट्री परिसर में जनभागीदारी के माध्यम से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना और उन्हें स्वरोजगार के योग्य बनाना है।

यहां सिलाई-बुनाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण, डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई ऐसे कोर्स चलाए जा रहे हैं, जिनकी मांग वर्तमान समय में लगातार बढ़ रही है। प्रशिक्षण के बाद युवतियां स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें, इस दिशा में भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

अनुभवी प्रशिक्षकों की अहम भूमिका

प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में अनुभवी प्रशिक्षकों की भूमिका अहम है। टैनर तुलसी पवार, पवन बती, कासिम मिर्जा, अजय बघेल सहित अन्य प्रशिक्षक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ युवतियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

प्रशिक्षकों ने युवतियों से प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और सीखे गए हुनर को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। उनका कहना है कि कौशल के साथ आत्मविश्वास जुड़ जाए, तो सफलता की राह आसान हो जाती है।

अधिकारियों ने बढ़ाया उत्साह

कार्यक्रम के दौरान झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) एवं मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक श्री परितोष उपाध्याय ने प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया और युवतियों से संवाद किया। उनके साथ अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा) श्री रवि रंजन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) श्री वाई.के. दास, मुख्य वन संरक्षक सह क्षेत्र निदेशक पलामू व्याघ्र परियोजना श्री एस.आर. नटेश, उप निदेशक प्रजेश कांत जैना, प्रभारी वन क्षेत्र पदाधिकारी उमेश कुमार दुबे तथा छिपादोहर पश्चिमी रेंज के वन क्षेत्र पदाधिकारी अजय टोप्पो भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने युवतियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मेहनत, लगन और हुनर ही आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वन विभाग भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देता रहेगा।

श्री परितोष उपाध्याय ने कहा: “सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण बेटियां भी आत्मनिर्भर बनकर समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकती हैं।”

ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती की दिशा में कदम

वन विभाग की इस पहल से न केवल युवतियों को रोजगार का अवसर मिल रहा है, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार की उम्मीद जगी है। प्रशिक्षण के बाद कई युवतियां सिलाई कार्य, कंप्यूटर सेवाएं या छोटे व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के हाथों में जब आय का साधन आता है, तो उसका सीधा असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण की बनती मिसाल

बेतला में संचालित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम धीरे-धीरे महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की मिसाल बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस तरह की पहल निरंतर जारी रही, तो आने वाले समय में क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।

न्यूज़ देखो: हुनर आधारित विकास की मजबूत पहल

बेतला वन विभाग की यह पहल बताती है कि सरकारी विभाग यदि इच्छाशक्ति और जनभागीदारी के साथ काम करें, तो ग्रामीण विकास संभव है। महिला सशक्तिकरण को केवल योजनाओं तक सीमित न रखकर जमीन पर उतारने का यह प्रयास सराहनीय है। अब आवश्यकता है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और क्षेत्रों तक विस्तार दिया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आत्मनिर्भर बेटियां, सशक्त गांव

ग्रामीण बेटियों को हुनर देकर आत्मनिर्भर बनाना समाज के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। इस तरह की पहल न केवल रोजगार देती है, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी बढ़ाती है। इस प्रेरक खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और महिला सशक्तिकरण की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

बरवाडीह, लातेहार

🔔

Notification Preferences

error: