#रांची #प्रज्ञा_केंद्र : ग्रामीण आधार सेवाओं को मजबूत करने के लिए संचालकों ने सरकार से मांगें रखीं।
झारखंड प्रदेश डिजिटल पंचायत सचिवालय प्रज्ञा केंद्र संचालक संघ ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधार सेवाओं को सुचारू बनाने के लिए सरकार और सीएससी के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। संघ ने पंचायत स्तर पर मुफ्त आधार किट, स्टैटिक आईपी और स्थायी व्यवस्था लागू करने की अपील की है। संचालकों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, जबकि उन्हें सीमित कमीशन ही मिल रहा है।
- प्रज्ञा केंद्र संचालक संघ ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मुफ्त आधार किट की मांग उठाई।
- संचालकों ने स्टैटिक आईपी और बेहतर इंटरनेट सुविधा मुफ्त उपलब्ध कराने की अपील की।
- संघ का दावा, महंगे उपकरणों का खर्च उठाना ग्रामीण ऑपरेटरों के लिए मुश्किल।
- प्रदेश अध्यक्ष शिशिर टोप्पो और महासचिव शुभंकर कुमार गुप्ता ने सरकार को सौंपा पत्र।
- संघ ने 17 वर्षों से सेवा दे रहे संचालकों को जटिल परीक्षाओं से छूट देने की मांग की।
- पंचायती राज मंत्री और सीएससी मुख्यालय को भी भेजी गई मांग पत्र की प्रतिलिपि।
झारखंड प्रदेश डिजिटल पंचायत सचिवालय प्रज्ञा केंद्र संचालक संघ ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आधार सेवाओं को मजबूत और बाधारहित बनाने के लिए सरकार तथा सीएससी ई-गवर्नेंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। संघ ने हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन के आधार पर पंचायती राज विभाग और सीएससी प्रबंधन को पत्र सौंपते हुए आवश्यक उपकरण मुफ्त उपलब्ध कराने और संचालन नियमों में व्यावहारिक बदलाव की मांग की है।
संघ का कहना है कि पंचायत स्तर पर कार्य कर रहे प्रज्ञा केंद्र संचालक वर्षों से ग्रामीण जनता को सरकारी सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन आधार सेवा संचालन के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था उन्हें अपने खर्च पर करनी पड़ रही है।
आधार सेवा संचालन में बढ़ रहा आर्थिक बोझ
संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिशिर टोप्पो और महासचिव शुभंकर कुमार गुप्ता ने संयुक्त रूप से कहा कि आधार सेवा संचालन के लिए कई महंगे उपकरणों की जरूरत होती है। इनमें फिंगरप्रिंट डिवाइस, आईरिस स्कैनर, जियो-लोकेशन डिवाइस, प्रिंटर और स्टैटिक आईपी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर काम करने वाले ऑपरेटर केवल डेटा एंट्री का कार्य करते हैं, जिसके बदले उन्हें सीमित कमीशन मिलता है। ऐसी स्थिति में हजारों रुपये खर्च कर उपकरण खरीदना ग्रामीण संचालकों के लिए भारी आर्थिक दबाव पैदा कर रहा है।
शिशिर टोप्पो और शुभंकर कुमार गुप्ता ने कहा: “ग्रामीण क्षेत्रों के ऑपरेटरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है। यदि सरकार बेहतर सेवा चाहती है तो बुनियादी संसाधन उपलब्ध कराना भी उसकी जिम्मेदारी है।”
17 वर्षों से सेवा दे रहे संचालक
संघ के प्रदेश सचिव रामरेख यादव ने कहा कि राज्य भर के प्रज्ञा केंद्र संचालक पिछले 17 वर्षों से ग्रामीण जनता तक विभिन्न सरकारी सेवाएं पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी ‘एनरोलमेंट ऑन परमानेंट सेंटर’ के तहत आधार सेवाएं संचालित की गई थीं, लेकिन वह व्यवस्था लंबे समय तक स्थायी नहीं रह सकी।
उन्होंने कहा कि बार-बार बदलती व्यवस्थाओं के कारण संचालकों के भविष्य पर अनिश्चितता बनी रहती है। ऐसे में सरकार को स्थायी और दीर्घकालिक व्यवस्था लागू करनी चाहिए ताकि ऑपरेटर बिना मानसिक तनाव के काम कर सकें।
संघ ने रखीं कई प्रमुख मांगें
संघ ने सरकार और सीएससी प्रबंधन के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जिनमें पंचायत स्तर पर मुफ्त आधार किट उपलब्ध कराना प्रमुख है। संघ ने कहा कि राज्य के सभी चिन्हित 4,345 प्रज्ञा केंद्रों को आवश्यक उपकरण निशुल्क दिए जाएं।
इसके अलावा पंचायत सचिवालयों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करते हुए संचालकों को मुफ्त स्टैटिक आईपी उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
संघ ने यह भी कहा कि वर्षों से कार्य कर रहे अनुभवी संचालकों को आधार कार्य के लिए किसी जटिल परीक्षा या अनावश्यक प्रक्रियाओं में न उलझाया जाए। नए संचालकों के लिए उचित प्रशिक्षण व्यवस्था लागू की जाए।
पारदर्शिता और बैकअप ऑपरेटर की भी मांग
संघ ने पंचायत सचिवालयों में एक अतिरिक्त आधार ऑपरेटर की नियुक्ति की मांग भी उठाई है, ताकि किसी कारणवश एक ऑपरेटर अनुपस्थित रहने पर सरकारी सेवाएं बाधित न हों।
साथ ही वित्तीय लेनदेन को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और उसकी रिपोर्ट सीधे संचालकों के ईमेल पर भेजने की मांग भी रखी गई है।
मंत्री और अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
संघ ने अपनी मांगों से संबंधित पत्र की प्रतिलिपि पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पंचायती राज निदेशक राजेश्वरी बी तथा सीएससी मुख्यालय दिल्ली के सीईओ को भी भेजी है।
संचालकों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में ग्रामीण जनता तक डिजिटल सेवाओं को मजबूत करना चाहती है, तो जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे प्रज्ञा केंद्रों को संसाधन और स्थिरता प्रदान करनी होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरत
ग्रामीण क्षेत्रों में आधार अपडेट, सरकारी योजनाओं के आवेदन, प्रमाण पत्र, बैंकिंग और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं के लिए प्रज्ञा केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में इन केंद्रों की तकनीकी और आर्थिक मजबूती सीधे तौर पर आम जनता की सुविधा से जुड़ी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवाएं मजबूत होती हैं, तो ग्रामीण लोगों को शहरों का चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंच सकेगा।
न्यूज़ देखो: डिजिटल गांव की नींव मजबूत करना जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रज्ञा केंद्र आज डिजिटल सेवाओं की रीढ़ बन चुके हैं। यदि इन्हें संसाधन, स्थायी व्यवस्था और तकनीकी सहयोग नहीं मिला, तो सरकारी डिजिटल योजनाओं का असर कमजोर पड़ सकता है। सरकार को जमीनी स्तर पर काम कर रहे संचालकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
डिजिटल सेवाएं मजबूत होंगी तो गांव भी आत्मनिर्भर बनेंगे
ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सेवाओं को मजबूत बनाना समय की जरूरत है।
प्रज्ञा केंद्र केवल सेवा केंद्र नहीं, बल्कि गांवों की डिजिटल पहचान बन चुके हैं।
यदि स्थानीय ऑपरेटर मजबूत होंगे तो आम जनता को भी बेहतर सुविधा मिलेगी।
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