
#गढ़वा #सरहुल_उत्सव : पुलिस परिवार ने सरना स्थल पर पूजा कर एकता का संदेश दिया।
गढ़वा पुलिस केंद्र स्थित सरना स्थल पर 21 मार्च 2026 को प्रकृति पर्व सरहुल धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना संपन्न हुई। पुलिस परिवार के अधिकारियों और जवानों ने एकजुट होकर पर्व मनाया। यह आयोजन सामाजिक एकता और प्रकृति सम्मान का प्रतीक बना।
- गढ़वा पुलिस केंद्र के सरना स्थल पर मनाया गया सरहुल पर्व।
- पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में हुआ मुख्य आयोजन।
- पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर की पूजा-अर्चना।
- पारंपरिक नृत्य में शामिल हुए अधिकारी और जवान।
- प्रकृति संरक्षण और सामाजिक एकता का दिया गया संदेश।
गढ़वा पुलिस केंद्र परिसर में स्थित सरना स्थल पर शनिवार को प्रकृति पर्व सरहुल पूरे उत्साह और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पुलिस परिवार के साथ-साथ विभिन्न प्रशासनिक पदाधिकारी भी शामिल हुए, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना
सरहुल पर्व के अवसर पर सरना स्थल पर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। पुलिस परिवार के सदस्यों ने पारंपरिक परंपराओं का पालन करते हुए प्रकृति की आराधना की। इस दौरान वातावरण भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया।
पूजा-अर्चना के माध्यम से प्रकृति के प्रति सम्मान प्रकट किया गया और सभी ने क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
अधिकारियों और जवानों की सहभागिता
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं जवान मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर इस पर्व को मनाया और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
पुलिस अधीक्षक ने कहा: “सरहुल पर्व प्रकृति और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। हमें इस परंपरा को सहेजते हुए सामाजिक एकता को मजबूत करना चाहिए।”
पारंपरिक नृत्य से गूंजा परिसर
सरहुल पर्व के दौरान पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। पुलिस अधीक्षक सहित सभी अधिकारियों और जवानों ने इसमें भाग लिया और उत्साहपूर्वक नृत्य किया।
इस दौरान पूरा परिसर मांदर और नगाड़ों की थाप से गूंज उठा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि प्रशासन और समाज के बीच समन्वय और सांस्कृतिक जुड़ाव कितना महत्वपूर्ण है।
सामाजिक एकता और प्रकृति सम्मान का संदेश
इस आयोजन के माध्यम से पुलिस विभाग ने यह संदेश दिया कि प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक एकता हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। सरहुल जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और सामूहिकता की भावना को मजबूत करते हैं।

न्यूज़ देखो: पुलिस और समाज के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की मिसाल
गढ़वा पुलिस केंद्र में सरहुल का आयोजन यह दर्शाता है कि प्रशासनिक तंत्र भी सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान देते हुए समाज के साथ जुड़ने का प्रयास कर रहा है। यह पहल सामाजिक विश्वास को मजबूत करने में सहायक है। ऐसे आयोजन यह सवाल भी उठाते हैं कि क्या हर स्तर पर इस तरह की सहभागिता बढ़ाई जा सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रकृति से जुड़ें, परंपराओं को अपनाएं और समाज को मजबूत बनाएं
सरहुल जैसे पर्व हमें प्रकृति के महत्व को समझने और उसकी रक्षा करने की प्रेरणा देते हैं। आज जरूरत है कि हम भी अपने आसपास के पर्यावरण की रक्षा के लिए कदम उठाएं और सामाजिक एकता को मजबूत करें।
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