विश्व पर्यावरण दिवस पर बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय में संगोष्ठी आयोजित, पर्यावरण संरक्षण को लेकर विद्यार्थियों को किया जागरूक

विश्व पर्यावरण दिवस पर बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय में संगोष्ठी आयोजित, पर्यावरण संरक्षण को लेकर विद्यार्थियों को किया जागरूक

author Avinash Kumar
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#गढ़वा #पर्यावरण_संरक्षण : विधि विभाग की संगोष्ठी में पर्यावरणीय जिम्मेदारियों पर हुआ मंथन।

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा के विधि विभाग द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण और जैव विविधता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को पर्यावरणीय कानूनों और नागरिक दायित्वों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। संगोष्ठी का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए सतत विकास की दिशा में जागरूकता बढ़ाना था।

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  • 05 जून 2026 को बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा में विश्व पर्यावरण दिवस पर संगोष्ठी आयोजित हुई।
  • विधि विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर विस्तार से चर्चा हुई।
  • विभागाध्यक्ष किरण वर्मा सहित सभी वक्ताओं ने जनभागीदारी और जागरूकता पर जोर दिया।
  • विद्यार्थियों को पर्यावरणीय कानूनों, नागरिक कर्तव्यों और सतत विकास के महत्व से अवगत कराया गया।
  • कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली।
  • वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा के विधि विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न आयामों पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज में पर्यावरणीय चेतना को मजबूत करना था। संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण और पर्यावरणीय कानूनों की भूमिका जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है।

पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधि विभाग की विभागाध्यक्ष श्रीमती किरण वर्मा ने पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

श्रीमती किरण वर्मा ने कहा: “पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक के न्यूनतम उपयोग से हम प्रकृति की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”

उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरणीय कानूनों और नागरिक कर्तव्यों की जानकारी प्राप्त कर समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।

जलवायु परिवर्तन की चुनौती पर हुई चर्चा

सहायक प्राध्यापक सुनील कुमार सिंह ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाएं मानव गतिविधियों के प्रत्यक्ष परिणाम हैं।

सुनील कुमार सिंह ने कहा: “ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाना समय की आवश्यकता है। यदि अभी नहीं संभले तो भविष्य की पीढ़ियों को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ेगा।”

उन्होंने विद्यार्थियों को जिम्मेदार उपभोक्ता बनने और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश दिया।

जैव विविधता संरक्षण पर दिया विशेष जोर

सहायक प्राध्यापक जयपूर्णा विश्वकर्मा ने जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जीव पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

जयपूर्णा विश्वकर्मा ने कहा: “जैव विविधता का संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास है।”

उन्होंने विद्यार्थियों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने का आग्रह किया।

प्लास्टिक प्रदूषण को बताया गंभीर वैश्विक समस्या

सहायक प्राध्यापक चंद्रप्रकाश मिश्रा ने प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की।

चंद्रप्रकाश मिश्रा ने कहा: “एकल उपयोग प्लास्टिक पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग की संस्कृति को बढ़ावा देकर ही हम इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपट सकते हैं।”

उन्होंने विद्यार्थियों को प्लास्टिक के विकल्प अपनाने की सलाह दी।

महिलाओं और युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण

सहायक प्राध्यापक कुमारी गरिमा रानी ने पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं और युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

कुमारी गरिमा रानी ने कहा: “परिवार और समाज में पर्यावरणीय मूल्यों के विकास में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वच्छता और हरित जीवनशैली को अपनाकर हम सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।”

उन्होंने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण का अग्रदूत बनने का आह्वान किया।

पर्यावरण संरक्षण में कानून और संविधान की भूमिका

सहायक प्राध्यापक डॉ. रवि प्रकाश पटेल ने पर्यावरण संरक्षण में विधि और न्याय व्यवस्था की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

डॉ. रवि प्रकाश पटेल ने कहा: “संविधान के अनुच्छेद 48(क) और 51(क)(ग) पर्यावरण संरक्षण को राज्य और नागरिक दोनों का दायित्व बताते हैं। पर्यावरणीय अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी प्रत्येक नागरिक को होनी चाहिए।”

उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरणीय न्याय और विधिक जागरूकता के महत्व से अवगत कराया।

सामूहिक संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन

संगोष्ठी के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्रकृति मानव जीवन की आधारशिला है और इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। सभी वक्ताओं ने वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता और प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेते हुए अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण हितैषी उपाय अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। साथ ही स्वच्छ, हरित और सतत भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का वादा किया।

न्यूज़ देखो: जागरूकता से ही सुरक्षित होगा पर्यावरण का भविष्य

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह संगोष्ठी केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को समझने और समाज तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास है। आज जब जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं, तब शिक्षण संस्थानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। विधि विभाग द्वारा पर्यावरणीय अधिकारों और कर्तव्यों पर केंद्रित चर्चा विद्यार्थियों को जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल है। पर्यावरण संरक्षण को व्यवहार में उतारना ही इस तरह के आयोजनों की वास्तविक सफलता होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पर्यावरण बचेगा तभी सुरक्षित रहेगा हमारा कल

एक पौधा लगाना केवल प्रकृति की सेवा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।
छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव की नींव रखते हैं।
जल बचाएं, पेड़ लगाएं और प्लास्टिक का उपयोग कम करें।
स्वच्छ और हरित वातावरण ही स्वस्थ जीवन का आधार है।

आइए विश्व पर्यावरण दिवस को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
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