#रायडीह #ग्रामीण_समस्या : दुर्गम सिलिंगा गांव आज भी सड़क, पुल, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं से वंचित है।
गुमला जिले के रायडीह प्रखंड अंतर्गत सुरसांग पंचायत का सुदूरवर्ती सिलिंगा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। गांव तक पहुंचने के लिए न पक्की सड़क है और न ही नदी पर पुल, जिससे आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है। बिजली और स्वच्छ पेयजल की अनुपलब्धता ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी को और कठिन बना दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
- सिलिंगा गांव तक पहुंचने के लिए न पक्की सड़क, न पुल की सुविधा।
- पालामाड़ा नदी बरसात में उफान पर, गांव बन जाता है टापू।
- बिजली के पोल लगे, लेकिन तार अब तक नहीं।
- पेयजल के लिए ग्रामीण डाड़ी चुंआ पर निर्भर।
- बुजुर्ग और बच्चों को आवागमन में सबसे अधिक परेशानी।
- ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
रायडीह प्रखंड के सुरसांग पंचायत क्षेत्र में स्थित सिलिंगा गांव की स्थिति आज भी विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। मुख्य सड़क से गांव तक पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही किसी नदी या नाले पर पुल का निर्माण किया गया है। इस कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़क और पुल का अभाव बना सबसे बड़ी समस्या
सिलिंगा गांव जाने के रास्ते में पालामाड़ा नदी पड़ती है, जो बरसात के दिनों में उफान पर रहती है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव चारों ओर से कट जाता है और पूरा इलाका टापू में तब्दील हो जाता है। गांव के तीन ओर घना जंगल होने के कारण हालात और भी जटिल हो जाते हैं।
आपातकालीन स्थिति में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को नदी पार कराना ग्रामीणों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा होता है। कई बार ग्रामीणों को इलाज, राशन या अन्य जरूरी कार्यों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
बिजली के पोल खड़े, लेकिन गांव अंधेरे में
गांव में बिजली व्यवस्था की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। प्रशासन की ओर से बिजली के पोल तो लगा दिए गए हैं, लेकिन अब तक उन पर तार नहीं खींचे गए हैं। इसका नतीजा यह है कि शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है।
बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। मोबाइल चार्ज करना, घरेलू कामकाज और सुरक्षा—all कुछ अंधेरे में करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है।
पेयजल संकट से बढ़ रहा स्वास्थ्य खतरा
सिलिंगा गांव में स्वच्छ पेयजल की भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण आज भी गांव के किनारे स्थित डाड़ी चुंआ का पानी पीने को विवश हैं। बरसात के दिनों में पानी के दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चों और बुजुर्गों को पेट संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन मजबूरी में वही पानी उपयोग करना पड़ता है।
ग्रामीणों की पीड़ा, प्रशासन से गुहार
गांव के निवासी निर्मल बाड़ा ने कहा:
निर्मल बाड़ा ने कहा: “अगर प्रशासन सड़क और पुल बनवा दे तो आने-जाने में बहुत सुविधा हो जाएगी।”
वहीं 70 वर्षीय अंजेला डुंगडुंग ने कांपती आवाज में सरकार से अपील करते हुए कहा:
अंजेला डुंगडुंग ने कहा: “नदी में पुल बन जाए, तो हमारे जैसे बुजुर्गों की जान की चिंता खत्म हो जाएगी।”
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी है।
आंदोलन की चेतावनी
सिलिंगा गांव के ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द ही सड़क, पुल, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों का मानना है कि विकास की मुख्यधारा से कटे रहने की पीड़ा अब असहनीय हो चुकी है।
न्यूज़ देखो: विकास के दावों की जमीनी सच्चाई
सिलिंगा गांव की स्थिति यह दर्शाती है कि कई सुदूरवर्ती इलाके आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क, पुल और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाएं केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा से जुड़ा सवाल हैं। प्रशासन के लिए यह समय है कि वह कागजी योजनाओं से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करे। क्या ग्रामीणों को आंदोलन की राह पर जाना ही पड़ेगा—हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विकास तभी सार्थक जब अंतिम गांव तक पहुंचे
सिलिंगा गांव की आवाज केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उन तमाम ग्रामीण इलाकों की है जो आज भी इंतजार में हैं। सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं किसी विशेषाधिकार नहीं, बल्कि नागरिक अधिकार हैं। जरूरत है कि हम इन मुद्दों को गंभीरता से उठाएं और जिम्मेदारों तक पहुंचाएं।
अगर आप भी मानते हैं कि विकास का लाभ हर गांव तक पहुंचना चाहिए, तो इस खबर को साझा करें। अपनी राय कमेंट में लिखें, सवाल पूछें और जागरूकता फैलाकर बदलाव की पहल करें। आपकी सहभागिता ही ग्रामीणों की उम्मीद बन सकती है।