#लातेहार #हुनरसेरोजगार : बेतला में चल रहे कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम से स्थानीय युवक-युवतियों को रोजगार व आत्मनिर्भरता की नई दिशा
पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में “हुनर से रोजगार” प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की पहल तेज हो गई है। छिपादोहर पश्चिम वन क्षेत्र पदाधिकारी अजय कुमार टोप्पो ने प्रशिक्षण केंद्र पहुंचकर प्रतिभागियों से संवाद किया और उनका उत्साहवर्धन किया।
- बेतला स्थित पलामू टाइगर रिजर्व में “हुनर से रोजगार” प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी।
- छिपादोहर पश्चिम वन क्षेत्र पदाधिकारी सह रेंजर अजय कुमार टोप्पो ने युवाओं से मिलकर बढ़ाया हौसला।
- प्रशिक्षण के तहत पर्यटन, आतिथ्य, गाइड सेवा और हस्तशिल्प जैसे कौशलों की दी जा रही जानकारी।
- स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल।
- प्रशिक्षण से युवाओं में बढ़ा आत्मविश्वास और रोजगार के प्रति जागरूकता।
लातेहार जिले के बरवाडीह स्थित बेतला क्षेत्र में पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा संचालित “हुनर से रोजगार” प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय युवक-युवतियों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रहा है। इस पहल के तहत क्षेत्र के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में छिपादोहर पश्चिम वन क्षेत्र के पदाधिकारी सह रेंजर अजय कुमार टोप्पो ने प्रशिक्षण ले रहे प्रतिभागियों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया और कार्यक्रम की प्रगति की जानकारी ली।
प्रशिक्षण केंद्र पहुंचकर रेंजर ने युवाओं से किया संवाद
रेंजर अजय कुमार टोप्पो प्रशिक्षण केंद्र पहुंचे और वहां उपस्थित युवक-युवतियों से सीधे संवाद स्थापित किया। उन्होंने प्रतिभागियों से उनके अनुभव, सीखने की प्रक्रिया और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने युवाओं को निरंतर सीखने और अपने कौशल को निखारने के लिए प्रेरित किया।
उनकी उपस्थिति से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रतिभागियों ने भी खुलकर अपने अनुभव साझा किए और बताया कि यह प्रशिक्षण उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
वन संरक्षण के साथ रोजगार सृजन पर भी फोकस
रेंजर अजय कुमार टोप्पो ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन का उद्देश्य केवल वन एवं वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
“हुनर से रोजगार कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय युवक-युवतियों को व्यावसायिक कौशल सिखाकर उन्हें स्वरोजगार एवं रोजगार से जोड़ना हमारा प्रमुख लक्ष्य है।”
उन्होंने बताया कि यह पहल क्षेत्रीय विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विभिन्न व्यावसायिक कौशलों का दिया जा रहा प्रशिक्षण
“हुनर से रोजगार” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को कई उपयोगी और रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें विशेष रूप से पर्यटन, आतिथ्य सेवा, स्थानीय गाइड सेवा, हस्तशिल्प तथा अन्य व्यावहारिक कौशल शामिल हैं।
यह प्रशिक्षण इस प्रकार तैयार किया गया है कि युवा स्थानीय संसाधनों और पर्यटन संभावनाओं का उपयोग कर स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें। साथ ही वे होटल, पर्यटन संस्थानों या अन्य सेवा क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
युवाओं में बढ़ रहा आत्मविश्वास और जागरूकता
प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवक-युवतियों ने बताया कि इस कार्यक्रम ने उन्हें नई दिशा दी है। पहले जहां रोजगार को लेकर असमंजस की स्थिति थी, वहीं अब वे अपने भविष्य को लेकर अधिक स्पष्ट और आत्मविश्वासी महसूस कर रहे हैं।
प्रतिभागियों का कहना है कि इस प्रकार के कौशल आधारित प्रशिक्षण से उन्हें व्यावहारिक ज्ञान मिल रहा है, जो पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने वन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल ग्रामीण युवाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है।
स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की मजबूत पहल
पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में स्थानीय युवाओं को पर्यटन और आतिथ्य से जुड़े कौशलों का प्रशिक्षण देना रोजगार सृजन की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
इस पहल से न केवल बेरोजगारी कम करने में मदद मिल रही है, बल्कि स्थानीय समुदाय की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है। प्रशिक्षित युवा भविष्य में गाइड, पर्यटन सहायक, हस्तशिल्प उद्यमी या सेवा क्षेत्र में कार्य कर क्षेत्र के विकास में योगदान दे सकेंगे।
क्षेत्रीय विकास में कार्यक्रम की अहम भूमिका
“हुनर से रोजगार” प्रशिक्षण कार्यक्रम पलामू टाइगर रिजर्व के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह पहल वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने से वन क्षेत्र पर निर्भरता कम होगी और वैकल्पिक आजीविका के अवसर बढ़ेंगे, जिससे संरक्षण प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
न्यूज़ देखो: कौशल विकास से बदल रही ग्रामीण युवाओं की दिशा
पलामू टाइगर रिजर्व की यह पहल दर्शाती है कि संरक्षण के साथ-साथ कौशल विकास को बढ़ावा देकर क्षेत्रीय विकास को नई गति दी जा सकती है। “हुनर से रोजगार” जैसे कार्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मजबूत नींव रख रहे हैं। यह मॉडल अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आत्मनिर्भर युवा ही मजबूत समाज की पहचान
कौशल विकास ही रोजगार और आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी कुंजी है।
ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को नई पहचान और अवसर प्रदान करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन से पलायन भी कम हो सकता है।
जरूरत है कि अधिक से अधिक युवा ऐसे कार्यक्रमों से जुड़ें।
अगर आपके क्षेत्र में भी ऐसे प्रशिक्षण चल रहे हैं, तो जरूर भाग लें और दूसरों को भी प्रेरित करें।
इस सकारात्मक पहल पर अपनी राय कमेंट में लिखें और खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।