
#कुरडेग #सिमडेगा #स्वास्थ्य_व्यवस्था : विधायक भुषण बाड़ा की सख्ती से सीएचसी प्रभारी ने शुरू की लंबित मानदेय भुगतान प्रक्रिया।
सिमडेगा जिले के कुरडेग प्रखंड में स्वास्थ्य सहियाओं का चार माह से रुका मानदेय आखिरकार भुगतान के लिए खोल दिया गया है। यह कार्रवाई विधायक भुषण बाड़ा के त्वरित हस्तक्षेप और सख्त निर्देश के बाद संभव हो सकी। कुरडेग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा यह मामला लंबे समय से सहियाओं को आर्थिक संकट में डाल रहा था। विधायक की सक्रियता के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही का स्पष्ट संदेश सामने आया है।
- कुरडेग प्रखंड की स्वास्थ्य सहियाओं का चार माह से रुका था मानदेय।
- सीएचसी प्रभारी दिलीप कुमार बेहरा पर भुगतान रोके जाने का आरोप।
- विधायक भुषण बाड़ा को सौंपा गया था लिखित आवेदन।
- सख्त फटकार के बाद शुरू हुई भुगतान प्रक्रिया।
- महिला जिला अध्यक्ष जोशीमा खाखा ने चेतावनी दी।
कुरडेग प्रखंड की स्वास्थ्य सहियाओं के लिए बीते चार महीने आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन रहे। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली सहियाएं बिना मानदेय के काम करने को मजबूर थीं। लगातार गुहार लगाने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब सहियाओं ने जनप्रतिनिधि का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।
गुरुवार को कुरडेग प्रखंड की स्वास्थ्य सहियाओं ने अपनी समस्या को लेकर सिमडेगा विधायक भुषण बाड़ा को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि कुरडेग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी दिलीप कुमार बेहरा द्वारा बिना किसी ठोस कारण के पिछले चार महीनों से मानदेय भुगतान रोका गया है।
विधायक का त्वरित हस्तक्षेप बना निर्णायक
शिकायत मिलते ही विधायक भुषण बाड़ा ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने सीएचसी प्रभारी दिलीप कुमार बेहरा को फोन पर कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी हाल में दो दिनों के भीतर सभी सहियाओं का लंबित मानदेय भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
विधायक ने यह भी कहा कि सहियाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनप्रतिनिधि के इस सख्त रुख का असर तुरंत देखने को मिला।
फटकार के बाद अचानक आई प्रशासनिक फुर्ती
जहां चार महीनों तक सहियाओं को सिर्फ आश्वासन मिलता रहा, वहीं विधायक की फटकार के बाद स्वास्थ्य केंद्र में अचानक सक्रियता दिखने लगी। शुक्रवार से ही मानदेय भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिससे सहियाओं के चेहरे पर लंबे समय बाद मुस्कान लौटी।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। जब सहियाएं महीनों से परेशान थीं, तब तक प्रशासन क्यों निष्क्रिय बना रहा? और जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद अचानक भुगतान में तेजी कैसे आ गई? यह सवाल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
महिला नेतृत्व ने दी आंदोलन की चेतावनी
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए महिला जिला अध्यक्ष श्रीमती जोशीमा खाखा ने दो टूक शब्दों में कहा:
जोशीमा खाखा ने कहा: “महिला स्वास्थ्य कर्मियों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई गई, तो हम आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे।”
उन्होंने कहा कि सहियाएं न केवल स्वास्थ्य सेवाओं का आधार हैं, बल्कि वे गांव-गांव जाकर सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारती हैं। ऐसे में उनके मानदेय के साथ खिलवाड़ करना अमानवीय है।
सहियाओं ने जताया आभार
मानदेय भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कुरडेग प्रखंड की सहियाओं ने विधायक भुषण बाड़ा के प्रति आभार व्यक्त किया। सहियाओं ने कहा कि यदि समय रहते विधायक ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो उनकी परेशानी और बढ़ जाती।
एक सहिया ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चार महीनों से घर चलाना मुश्किल हो गया था। बच्चों की पढ़ाई, राशन और दवाइयों तक में दिक्कत हो रही थी। अब मानदेय मिलने की उम्मीद से राहत मिली है।
स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही का सवाल
यह मामला केवल मानदेय भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है। सहियाओं जैसी फ्रंटलाइन वर्कर्स अगर आर्थिक रूप से असुरक्षित रहेंगी, तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए स्पष्ट निगरानी व्यवस्था और समयबद्ध भुगतान प्रणाली लागू की जाए।
न्यूज़ देखो: जब जनप्रतिनिधि जागरूक हों
कुरडेग का यह मामला दिखाता है कि जब जनप्रतिनिधि संवेदनशील और सक्रिय हों, तो व्यवस्था को जवाबदेह बनाया जा सकता है। विधायक भुषण बाड़ा का हस्तक्षेप न केवल सहियाओं के लिए राहत लेकर आया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि लापरवाही पर पर्दा नहीं डाला जाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति से कैसे बचता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सम्मान और समय पर भुगतान, सहियाओं का अधिकार
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती सहियाओं की मजबूती से जुड़ी है।
समय पर मानदेय और सम्मानजनक व्यवहार उनकी न्यूनतम मांग है।
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