
#सिमडेगा #मंडल_कारा : सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार डालसा टीम ने व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
सुप्रीम कोर्ट के सुकन्या शांता बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में सिमडेगा मंडल कारा का औचक निरीक्षण किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम ने जेल की व्यवस्थाओं, अभिलेखों और कैदियों की सुविधाओं की जांच की। निरीक्षण में जाति या धर्म के आधार पर किसी भेदभाव की पुष्टि नहीं हुई। जेल प्रशासन की व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं।
- सुप्रीम कोर्ट (रिट याचिका (सी) 1404/2023) के निर्देशों के तहत निरीक्षण।
- पीडीजे के नेतृत्व में डालसा टीम ने मंडल कारा का औचक दौरा किया।
- कुल 219 कैदी निरुद्ध – 211 पुरुष, 8 महिला।
- जेल रिकॉर्ड में जाति का उल्लेख नहीं, निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था।
- भोजन, स्वच्छता और प्रशासनिक अभिलेख संतोषजनक पाए गए।
सुप्रीम कोर्ट के सुकन्या शांता बनाम भारत संघ (रिट याचिका (सी) संख्या 1404/2023) में दिए गए निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को सिमडेगा मंडल कारा का औचक निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य जेलों में समानता, पारदर्शिता और मानवीय व्यवस्थाओं की स्थिति का आकलन करना था।
निरीक्षण के दौरान टीम ने जेल परिसर के विभिन्न बैरकों, वार्डों और अन्य भवनों का भ्रमण किया। साथ ही कैदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, सुविधाओं और व्यवहार संबंधी अनुभवों की जानकारी ली गई।
कैदियों से सीधा संवाद, भेदभाव नहीं मिला
निरीक्षण टीम ने कैदियों से बातचीत के आधार पर पाया कि मंडल कारा में जाति, धर्म या पंथ के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कैदियों के रिकॉर्ड में उनकी जाति का उल्लेख नहीं किया जा रहा है, जो एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
टीम के सदस्यों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की और पाया कि निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
भोजन और स्वच्छता व्यवस्था की जांच
निरीक्षण के दौरान कैदियों को दिए जाने वाले पके भोजन की भी जांच की गई। पाया गया कि भोजन जेल नियमावली में निर्धारित मेनू के अनुसार तैयार किया जा रहा है और उसकी गुणवत्ता संतोषजनक है।
स्वच्छता व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया। सभी बैरक और वार्ड साफ-सुथरे एवं कीटाणुरहित पाए गए। परिसर में नियमित सफाई की व्यवस्था देखी गई।
अभिलेख अद्यतन, कैदियों की स्थिति स्पष्ट
जेल के रजिस्टर और प्रशासनिक अभिलेखों की जांच में पाया गया कि सभी रिकॉर्ड अद्यतन हैं। निरीक्षण के समय मंडल कारा में कुल 219 कैदी निरुद्ध पाए गए। इनमें 211 पुरुष और 8 महिला कैदी शामिल हैं।
कुल कैदियों में 211 विचाराधीन कैदी (203 पुरुष व 8 महिला) तथा 8 दोषी कैदी (सभी पुरुष) हैं। इन आंकड़ों का सत्यापन अभिलेखों के माध्यम से किया गया।
निरीक्षण दल में शामिल अधिकारी
यह निरीक्षण पीडीजे के नेतृत्व में संपन्न हुआ। निरीक्षण दल में प्राधिकार सचिव मरियम हेमरोम, डीएसपी रणवीर सिंह, समाज कल्याण पदाधिकारी सूरजमणि कुमारी, चीफ एलएडीसीएस प्रभात कुमार श्रीवास्तव, जेल अधीक्षक अजय कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पा कुमारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
निरीक्षण का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप जेलों में समानता, पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण को मजबूत करना बताया गया।
न्यूज़ देखो: जेल सुधार की दिशा में सकारात्मक संकेत
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में किया गया यह निरीक्षण न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता का संकेत है। यदि जेलों में भेदभाव रहित और मानवीय वातावरण सुनिश्चित किया जाता है, तो यह न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत करता है। नियमित निगरानी और खुली समीक्षा से सुधार प्रक्रिया को गति मिलती है। आगे भी ऐसी पहलें निरंतर जारी रहनी चाहिए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
न्याय और समानता की व्यवस्था को मजबूत करें
कानून के समक्ष सभी समान हैं — यह सिद्धांत व्यवहार में भी दिखना चाहिए।
जेल सुधार केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि मानवाधिकार से जुड़ा प्रश्न है।
सतर्क निगरानी और पारदर्शिता से ही विश्वास कायम होता है।
समाज की जिम्मेदारी है कि वह न्याय व्यवस्था के प्रति सजग रहे।
आपकी राय भी महत्वपूर्ण है। इस विषय पर अपने विचार कमेंट में साझा करें और खबर को आगे बढ़ाएं, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही की प्रक्रिया मजबूत हो।







