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झारखंड विधानसभा में 1,58,560 करोड़ का अबुआ दिशोम बजट पेश, गरीबों के आंसू पोंछने और विकास तेज करने का दावा

#रांची #झारखंड_बजट : वित्त मंत्री ने बढ़े आकार का बजट पेश कर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य व जनकल्याण पर विशेष फोकस का संकेत दिया

झारखंड विधानसभा में 24 फरवरी को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 1,58,560 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट पेश किया, जिसे ‘अबुआ दिशोम बजट’ नाम दिया गया है। सरकार ने इसे गरीबों के हित, विकास और सामाजिक कल्याण को केंद्र में रखकर तैयार बताया है, जबकि बजट के आकार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

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  • विधानसभा में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पेश किया 1,58,560 करोड़ रुपये का बजट।
  • बजट को दिया गया नाम — अबुआ दिशोम बजट
  • गरीबों के आंसू पोंछने और जनता के चेहरे पर खुशी लाने का दावा।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर के संकेत।
  • केंद्रीय सहायता और बकाया राशि को लेकर केंद्र पर सहयोग की कमी का मुद्दा उठाया।

झारखंड विधानसभा में मंगलवार को राज्य का बहुप्रतीक्षित बजट पेश किया गया, जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी थीं। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 1,58,560 करोड़ रुपये का बजट सभा पटल पर रखते हुए इसे जनहित और विकास केंद्रित बताया। बजट पेश करते समय उन्होंने स्पष्ट कहा कि गरीबों का दुख दूर करना सरकार का नैतिक कर्तव्य है और यह बजट झारखंड वासियों के चेहरे पर खुशी लाने वाला साबित होगा।

1,58,560 करोड़ का बजट रखा सभा पटल पर

वित्त मंत्री ने सदन में औपचारिक रूप से 1,58,560 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में बड़ा माना जा रहा है। बजट भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि यह उनके संसदीय जीवन का दूसरा अवसर है जब वे राज्य का बजट प्रस्तुत कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने बजट तैयार करते समय राज्य की आर्थिक स्थिति, विकास की जरूरतों और सामाजिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा है।

गरीबों और आम जनता को केंद्र में रखकर तैयार बजट

सदन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का नैतिक दायित्व है कि वह गरीबों के आंसू पोंछे और समाज के कमजोर वर्गों को राहत पहुंचाए।
उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि जनकल्याण की दिशा में ठोस पहल है। सरकार का उद्देश्य राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है।

“गरीबों के आंसू पोंछने वाला और झारखंड वासियों के चेहरे पर खुशी लाने वाला यह बजट होगा।”

‘अबुआ दिशोम बजट’ नाम से पेश किया गया दस्तावेज

इस वर्ष के बजट को वित्त मंत्री ने ‘अबुआ दिशोम बजट’ नाम दिया। उन्होंने बताया कि इस बजट को तैयार करने की प्रक्रिया में विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की गई।
विशेष रूप से बाल बजट तैयार करने के लिए स्कूली बच्चों और संबंधित हितधारकों से सुझाव लिए गए, जिससे यह बजट अधिक समावेशी और समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों के अनुरूप बन सके।

केंद्रीय सहायता के बिना विकास मुश्किल: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान केंद्र सरकार के सहयोग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य सरकार केंद्रीय सहायता के बिना अपेक्षित विकास का लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकती।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रतिपक्ष के सहयोगी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि केंद्र से झारखंड को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।
उनके अनुसार यदि केंद्र का पर्याप्त सहयोग मिलता तो विकास की गति और तेज हो सकती थी।

केंद्रीय करों में हिस्सेदारी को लेकर उठाया मुद्दा

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय करों में झारखंड की हिस्सेदारी के रूप में लगभग 5000 करोड़ रुपये अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र के कुछ नीतिगत निर्णयों के कारण राज्य पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और इससे वित्तीय प्रबंधन पर दबाव पड़ता है।

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जीएसटी और योजनाओं से होने वाले राजस्व नुकसान का उल्लेख

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था की वजह से झारखंड को हर वर्ष लगभग 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
इसके अलावा उन्होंने वीभी राम जी योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना के कारण राज्य को प्रतिवर्ष करीब 5640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक दबाव झेलना पड़ेगा।
इन परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार अपने संसाधनों से आवश्यक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास कर रही है।

राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी दी जानकारी

वित्त मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति नियंत्रण में है और अब तक किसी भी कर्मचारी का एक माह का वेतन भी नहीं रुका है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में राजकोष में लगभग 78,000 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, जो राज्य की आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है।
साथ ही राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं, ताकि विकास योजनाओं को निरंतर गति मिलती रहे।

रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर रहेगा विशेष जोर

प्रारंभिक संकेतों के अनुसार इस बजट में रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, स्कूलों और अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारना तथा सड़क व कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के संतुलित विकास को बजट का प्रमुख आधार बताया गया है।

हंगामेदार रह सकता है बजट सत्र

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का बजट सत्र हंगामेदार रह सकता है। विपक्ष जहां केंद्र-राज्य संबंध, आर्थिक बोझ और विकास योजनाओं को लेकर सवाल उठा सकता है, वहीं सत्तापक्ष इसे जनहितकारी बजट बताते हुए अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगा।
सदन में बजट प्रावधानों, योजनाओं और वित्तीय रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

न्यूज़ देखो: विकास बनाम संसाधन की चुनौती

1,58,560 करोड़ का यह बजट झारखंड के विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। केंद्र से सहयोग, राजस्व चुनौतियां और जनकल्याण योजनाओं के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी परीक्षा होगी। अब असली कसौटी बजट के प्रभावी क्रियान्वयन पर होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक नागरिक बनें और बजट को समझें

बजट केवल सरकार का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता के भविष्य की रूपरेखा होता है।
यह तय करता है कि विकास किस दिशा में और कितनी गति से आगे बढ़ेगा।
रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर बजट का सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।
इसलिए बजट की घोषणाओं को समझना और उस पर नजर रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

आपको क्या लगता है, इस बजट से झारखंड के विकास को कितनी गति मिलेगी? अपनी राय जरूर साझा करें और खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं।

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