#पलामू #उर्स_महोत्सव : बेड़मा बभंडी में दो दिवसीय उर्स का भव्य आयोजन शुरू।
पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत बेड़मा बभंडी गांव में हजरत मकदूम सैयद अब्दुल लतीफ शाहदाता रहमतुल्लाह अलैह के मजार पर 29 और 30 अप्रैल को दो दिवसीय 15वां सालाना उर्स आयोजित हो रहा है। इस धार्मिक आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी टाईगर कुमार शामिल होंगे। आयोजन में कव्वाली मुकाबला आकर्षण का केंद्र रहेगा।
- बेड़मा बभंडी, चैनपुर (पलामू) में 15वां सालाना उर्स शुरू।
- 29–30 अप्रैल को दो दिवसीय धार्मिक आयोजन।
- टाईगर कुमार होंगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि।
- कानपुर के कव्वाल शरीफ परवाज और शिबा परवीन के बीच मुकाबला।
- मजार पर चादरपोशी, सजावट और जायरीन के ठहरने की विशेष व्यवस्था।
पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड के बेड़मा बभंडी गांव में हर वर्ष आयोजित होने वाला सालाना उर्स इस बार भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया है। हजरत मकदूम सैयद अब्दुल लतीफ शाहदाता रहमतुल्लाह अलैह के मजार पर आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में धार्मिक माहौल देखने को मिल रहा है।
उर्स को लेकर अंतिम चरण में तैयारियां
उर्स समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आयोजन की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। मजार की साफ-सफाई, आकर्षक सजावट और चादरपोशी की व्यवस्था को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है।
समिति के सेक्रेट्री जहांगीर आलम और सदर आजम अंसारी ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में जायरीन यहां पहुंचेंगे। उनके ठहरने, भोजन और अन्य सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है, ताकि किसी को असुविधा न हो।
कव्वाली मुकाबला बनेगा मुख्य आकर्षण
इस वर्ष उर्स कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण उत्तर प्रदेश के कानपुर से आने वाले मशहूर कव्वालों के बीच होने वाला मुकाबला होगा।
शरीफ परवाज और शिबा परवीन की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को सूफी संगीत के रंग में रंग देंगी। कव्वाली के इस मुकाबले को लेकर स्थानीय युवाओं और संगीत प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
जहांगीर आलम ने कहा: “हर साल की तरह इस बार भी उर्स को भव्य और यादगार बनाने की पूरी तैयारी की गई है।”
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे टाईगर कुमार
उर्स कार्यक्रम में समाजसेवी टाईगर कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके आगमन को लेकर भी आयोजकों और स्थानीय लोगों में उत्साह है।
समिति के अनुसार, यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का भी प्रतीक है, जहां सभी समुदायों के लोग एक साथ मिलकर भाग लेते हैं।
श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना मजार
हजरत शाहदाता का मजार पिछले 15 वर्षों से लगातार उर्स का साक्षी रहा है। स्थानीय लोगों की इस मजार से गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
लोगों का मानना है कि यहां आने से उनकी मन्नतें पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। इसी कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान
उर्स को सफल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए समिति की ओर से वोलेंटियरों की तैनाती की गई है। स्थानीय युवाओं की टीम आयोजन में सक्रिय भूमिका निभा रही है और सभी व्यवस्थाओं पर नजर रख रही है।
कार्यक्रम में मो. याद अली, समीर साहब, आजम साहब, मो. मौला साहब, महबूब साहब, मो. जहांगीर, आजाद साहब, मुस्तकीम साहब, शैफउद्दीन साहब और लुकमान साहब सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहेंगे।
न्यूज़ देखो: आस्था और संस्कृति का संगम
बेड़मा बभंडी का यह उर्स केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इस तरह के आयोजन समाज में भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और आयोजन समिति मिलकर इस कार्यक्रम को कितनी सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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ऐसे आयोजन हमें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। यह अवसर है जब हम मिलकर समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव का संदेश फैलाएं।
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