
#खलारी #रांची #सरहूल_महोत्सव : एनके एरिया सरना समिति ने भव्य आयोजन को लेकर बनाई रणनीति।
खलारी के एनके एरिया डकरा में 29 मार्च को 34वां सरहूल महोत्सव मनाने का निर्णय लिया गया है। इसको लेकर उत्तरी चुरी पंचायत भवन में सरना समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में आयोजन की तैयारियों और भागीदारी को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। समिति ने अधिक से अधिक लोगों से पारंपरिक रूप में शामिल होने की अपील की।
- एनके एरिया डकरा में 29 मार्च को होगा सरहूल महोत्सव।
- उत्तरी चुरी पंचायत भवन में हुई सरना समिति की बैठक।
- कन्हाई पासी की अध्यक्षता और सूरज मुण्डा का संचालन।
- पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होने की लोगों से अपील।
- कार्यक्रम को लेकर स्थानीय टीमों और सरना प्रेमियों से सहयोग की मांग।
खलारी प्रखंड के एनके एरिया डकरा में इस वर्ष 29 मार्च को 34वां सरहूल महोत्सव धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। इसको लेकर उत्तरी चुरी पंचायत भवन में एनके एरिया सरना समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई।
बैठक की अध्यक्षता कन्हाई पासी ने की, जबकि संचालन सूरज मुण्डा द्वारा किया गया। इस दौरान उपस्थित सदस्यों ने महोत्सव को भव्य और सफल बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में बनी आयोजन की रणनीति
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष सरहूल महोत्सव को और भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न जिम्मेदारियां तय की गईं और सभी सदस्यों को सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
सदस्यों ने कहा कि सरहूल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के प्रति आस्था का प्रतीक है, जिसे पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाना चाहिए।
पारंपरिक रूप में शामिल होने की अपील
एनके एरिया सरना समिति की ओर से सभी सरना धर्मावलंबियों, कोयलांचलवासियों और आसपास के खोड्हा टीमों से अपील की गई कि वे इस महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों।
साथ ही सभी से आग्रह किया गया कि वे पारंपरिक वेशभूषा, गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ शामिल होकर इस आयोजन को और भी भव्य बनाएं।
समिति के सदस्यों ने कहा: “सभी लोग पारंपरिक रूप में शामिल होकर इस महोत्सव को सफल बनाएं और प्रकृति पूजा की परंपरा को आगे बढ़ाएं।”
सरहूल पर्व का सांस्कृतिक महत्व
सरहूल आदिवासी समाज का एक प्रमुख पर्व है, जो प्रकृति, धरती माता और साल वृक्ष की पूजा से जुड़ा हुआ है। यह पर्व नई शुरुआत, समृद्धि और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर लोग पारंपरिक नृत्य-गीत प्रस्तुत करते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशी मनाते हैं। सरहूल महोत्सव सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
बैठक में लालचंद विश्वकर्मा, अमर भोगता, विरजू लोहार, अशोक उरांव, तानेश्वर उराँव, सूकरा उराँव, रमेश तुरी, मनोज मुण्डा, अमीत भोगता, सतीश गंझू सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर महोत्सव को सफल बनाने का संकल्प लिया और क्षेत्रवासियों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
क्षेत्र में उत्साह का माहौल
सरहूल महोत्सव को लेकर क्षेत्र में अभी से उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। लोग इस पर्व को लेकर तैयारी में जुट गए हैं और आयोजन को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है।
यह महोत्सव न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
न्यूज़ देखो: परंपरा और एकता का संगम बनेगा सरहूल महोत्सव
डकरा में आयोजित होने वाला सरहूल महोत्सव यह दर्शाता है कि आज भी परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत समाज के केंद्र में हैं। ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और समाज मिलकर इस आयोजन को कितनी भव्यता प्रदान करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परंपरा से जुड़ें, संस्कृति को आगे बढ़ाएं
हमारी संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचान हैं, जिन्हें सहेजना हमारी जिम्मेदारी है।
ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हम अपनी जड़ों से जुड़ सकते हैं।
आइए, हम सभी मिलकर सरहूल महोत्सव को सफल बनाएं और प्रकृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करें।
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