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Giridih

गादी पंचायत का आंगनबाड़ी केंद्र महीनों से बंद, ठंड में नौनिहालों को स्वेटर तक नहीं मिला

#बिरनी #आंगनबाड़ी_लापरवाही : गादी पंचायत में महीनों से बंद पड़े केंद्र के कारण बच्चों को पोषण, पढ़ाई और स्वेटर जैसी मूल सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
  • गादी पंचायत का आंगनबाड़ी केंद्र कई माह से लगातार बंद।
  • दिसंबर की ठंड में भी बच्चों को स्वेटर वितरण नहीं किया गया।
  • ग्रामीणों ने कहा—केंद्र अक्सर बंद रहता है, कर्मी नियमित ड्यूटी पर नहीं आते।
  • महिला पर्यवेक्षिका को जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं।
  • विभागीय लापरवाही के कारण पोषण और शिक्षा दोनों प्रभावित।

बिरनी, गिरिडीह प्रखंड के गादी पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है, जिससे छोटे बच्चों को सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली मूल सुविधाएँ जैसे पोषण आहार, प्री-स्कूल शिक्षा और खासकर दिसंबर की कड़कड़ाती ठंड में स्वेटर प्राप्त नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र सिर्फ नाम मात्र का चल रहा है और अधिकांश दिनों में आंगनबाड़ी कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहते।

महीनों से बंद, नौनिहाल हो रहे वंचित

ग्रामीणों के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्र हमेशा ताला बंद मिलता है, जिससे बच्चों का विकास बाधित हो रहा है। केंद्र बंद रहने से बच्चों को पोषण युक्त भोजन, टीकाकरण में सहयोग, पढ़ाई की शुरुआती तैयारी और ठंड से बचाव के लिए स्वेटर—कुछ भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

पर्यवेक्षिका की अनदेखी बढ़ा रही समस्या

सबसे गंभीर बात यह है कि ग्रामीणों के मुताबिक, इस स्थिति की जानकारी महिला पर्यवेक्षिका को पहले से है, फिर भी न तो कोई जांच, न कार्रवाई और न ही विभाग को सही रिपोर्ट भेजी जाती है।
ग्रामीण बताते हैं कि शिकायत के बावजूद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिसने लोगों में निराशा और आक्रोश दोनों बढ़ा दिया है।

सरकार खर्च कर रही करोड़ों, लेकिन जमीनी स्थिति बदहाल

सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए बड़े स्तर पर बजट खर्च कर रही है। लेकिन विभागीय उदासीनता और कर्मियों की लापरवाही के कारण लाभार्थी बच्चे इसका फायदा ठीक से नहीं ले पा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की नीयत अच्छी है, योजनाएँ बेहतर हैं, पर कार्यान्वयन में भारी कमी के कारण बच्चों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता।

ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग

लगातार शिकायतों और अनियमित गतिविधियों को देखते हुए ग्रामीणों ने मांग की है कि बंद पड़े केंद्र की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
लोगों का कहना है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

न्यूज़ देखो: लापरवाही के कारण सरकारी योजनाएँ बेअसर

इस घटना से साफ है कि जब निगरानी और जवाबदेही कमजोर हो जाती है, तो सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता। गादी पंचायत का मामला विभागीय कार्यशैली की कमियों को उजागर करता है, जहां बच्चों जैसे संवेदनशील वर्ग को सबसे अधिक प्रभाव झेलना पड़ता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और नियमित निरीक्षण ही समाधान है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी

जब आंगनबाड़ी जैसी आधारभूत सेवाएं बाधित होती हैं, तो सबसे अधिक नुकसान उन मासूम बच्चों को होता है जो अपने विकास के महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहे होते हैं। एक जिम्मेदार समाज के रूप में हमें ऐसी लापरवाही के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
आप क्या सोचते हैं—क्या इस केंद्र की तुरंत जांच होनी चाहिए?
अपनी राय नीचे कमेंट करें, इस खबर को शेयर करें और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता फैलाएं।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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