
#हजारीबाग #दुर्घटना : बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सोए दंपति की दम घुटने से मौत हुई।
हजारीबाग जिले के कटकमदाग प्रखंड अंतर्गत बानादाग गांव में ठंड से बचने की कोशिश जानलेवा साबित हुई। बंद कमरे में कोयले की अंगीठी जलाकर सोए एक दंपति की दम घुटने से मौत हो गई। सुबह दरवाजा नहीं खुलने पर परिजनों को घटना की जानकारी मिली। यह हादसा ठंड के मौसम में असावधानी के खतरों को उजागर करता है।
- बानादाग गांव में बंद कमरे में हुआ हादसा।
- गंगा प्रसाद और रेणु देवी की मौके पर मौत।
- कोयले की अंगीठी से निकली जहरीली गैस बनी कारण।
- बीडीओ और सीओ ने पहुंचकर लिया घटना का जायजा।
- प्रशासन ने सतर्कता बरतने की अपील की।
हजारीबाग जिले के कटकमदाग प्रखंड स्थित बानादाग गांव में शुक्रवार सुबह एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सोए एक वृद्ध दंपति की दम घुटने से मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
ठंड से बचाव बना मौत का कारण
मृतकों की पहचान गंगा प्रसाद और उनकी पत्नी रेणु देवी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, रात में अत्यधिक ठंड के कारण दोनों ने कमरे के अंदर कोयले की अंगीठी जलाई और दरवाजा बंद कर सो गए। कमरे में वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे अंगीठी से निकली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस धीरे-धीरे पूरे कमरे में फैल गई।
सुबह नहीं खुला दरवाजा, टूटा सन्नाटा
मृतक दंपति के बेटे अनिल कुमार ने बताया कि सुबह काफी देर तक जब उनके माता-पिता का दरवाजा नहीं खुला तो परिवार को अनहोनी की आशंका हुई। कई बार आवाज देने के बाद भी जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। दोनों पति-पत्नी अचेत अवस्था में पड़े थे और कुछ ही देर में उनकी मौत की पुष्टि हो गई।
अनिल कुमार ने कहा:
“मेरे माता-पिता सिर्फ ठंड से बचने के लिए अंगीठी जलाकर सोए थे। हमें नहीं पता था कि यह इतना खतरनाक साबित होगा।”
गांव में पसरा मातम
घटना की खबर फैलते ही पूरे बानादाग गांव में मातम छा गया। आसपास के लोग बड़ी संख्या में मृतक के घर पहुंच गए। हर कोई इस हादसे से स्तब्ध था कि कैसे ठंड से बचने का एक साधारण उपाय दो जिंदगियों को निगल गया। ग्रामीणों के अनुसार, इलाके में पहले भी ठंड के कारण लोग अंगीठी का सहारा लेते रहे हैं, लेकिन इस तरह की घटना ने सभी को डरा दिया है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने लिया जायजा
घटना की सूचना मिलते ही कटकमदाग प्रखंड विकास पदाधिकारी शिव बालक प्रसाद और अंचलाधिकारी सत्येंद्र पासवान मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और घटना की विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों ने परिजनों को सांत्वना दी और हरसंभव सरकारी सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।
बीडीओ शिव बालक प्रसाद ने कहा:
“यह बेहद दुखद घटना है। ठंड के मौसम में बंद कमरे में कोयले की अंगीठी जलाना जानलेवा हो सकता है। सभी को इससे सबक लेने की जरूरत है।”
मुआवजे की मांग
मृतक के परिजनों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि गंगा प्रसाद परिवार के मुख्य सहारा थे और उनकी मौत से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है। प्रशासन ने कहा है कि मामले की रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ठंड में बरतें सावधानी
इस घटना के बाद प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि ठंड से बचाव के लिए कभी भी बंद कमरे में अंगीठी, कोयला या आग जलाकर न सोएं। कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस बिना गंध के जानलेवा साबित होती है और व्यक्ति को इसका एहसास भी नहीं हो पाता।
चिकित्सकों के अनुसार, ऐसी गैस से दम घुटने की स्थिति में व्यक्ति को नींद में ही बेहोशी आ जाती है और समय पर मदद न मिलने पर मृत्यु हो सकती है।
न्यूज़ देखो: ठंड में लापरवाही की भारी कीमत
यह घटना बताती है कि ठंड से बचने के पारंपरिक उपाय कितने खतरनाक हो सकते हैं। जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे हादसों को रोक सकती है। प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर लोगों को सुरक्षित विकल्पों के प्रति जागरूक करना होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सावधानी ही सुरक्षा है
कड़ाके की ठंड में जीवन की रक्षा के लिए सुरक्षित साधनों का उपयोग करें। इस खबर को साझा करें ताकि अन्य लोग सतर्क हो सकें और ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। अपनी राय कमेंट में बताएं और समाज को जागरूक बनाने में सहयोग करें।





