
#सिमडेगा #शिक्षा_संस्कार : विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर लचरागढ़ में कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों को दिया गया आशीर्वाद, उज्ज्वल भविष्य की कामना।
सिमडेगा जिले के लचरागढ़ स्थित विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों के सम्मान में आशीर्वाद एवं विदाई समारोह भावनात्मक, गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभावना को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया गया। मुख्य अतिथियों एवं विद्यालय परिवार ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।
- विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर, लचरागढ़ में आशीर्वाद एवं विदाई समारोह का आयोजन।
- वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई द्वारा संचालित है विद्यालय।
- भरत प्रसाद, कुश बड़ाईक रहे मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि।
- कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों को परीक्षा उपयोगी सामग्री भेंट।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजा समारोह।
- अनुशासन, संस्कार और चरित्र निर्माण पर दिया गया विशेष जोर।
सिमडेगा जिले के लचरागढ़ में स्थित विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में कक्षा दसवीं के भैया-बहनों के सम्मान में आयोजित आशीर्वाद एवं विदाई समारोह एक भावनात्मक एवं प्रेरणास्पद आयोजन के रूप में यादगार बन गया। यह विद्यालय वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित है, जहाँ शिक्षा के साथ संस्कारों को विशेष महत्व दिया जाता है।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि समाजसेवी भरत प्रसाद (सिमडेगा), विशिष्ट अतिथि कुश बड़ाईक (सिमडेगा), विद्यालय के सचिव श्री राजेश अग्रवाल, सह सचिव रिक्की अग्रवाल एवं सुनील सिंह द्वारा संयुक्त रूप से माँ सरस्वती, भारत माता, सृष्टि के गर्भ स्थल ॐ, भगवान बिरसा मुंडा एवं सरना माता के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन कर किया गया।
दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरे सभागार में श्रद्धा, संस्कार और प्रेरणा का वातावरण व्याप्त हो गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी विदाई बेला
इसके पश्चात कनिष्ठ भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। गीत, नृत्य एवं मनोहारी प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने वरिष्ठों के प्रति स्नेह, सम्मान और अपनापन व्यक्त किया। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में भावनात्मक गहराई और उल्लास भर दिया।
माता-पिता और गुरुजनों के सम्मान का संदेश
मुख्य अतिथि भरत प्रसाद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि माँ पहला गुरु होती है, जो हर कष्ट सहकर बच्चों को संस्कार देती है, जबकि पिता दिन-रात परिश्रम कर परिवार का भविष्य संवारता है। उन्होंने विद्यार्थियों से माता-पिता की आज्ञा का पालन करने, गुरुजनों का सम्मान करने और चरित्र निर्माण को जीवन का मूल आधार बनाने का आह्वान किया।
“अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार ही जीवन को सफल बनाते हैं,” — भरत प्रसाद
विद्यार्थियों को भेंट स्वरूप सामग्री प्रदान
विद्यालय परिवार की ओर से कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों को पेन, उच्च गुणवत्ता की फ़ाइल, गर्म टोपी, परीक्षा उपयोगी सामग्री एवं शुभकामना संदेश पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी विद्यार्थियों को भरत प्रसाद द्वारा किटकैट चॉकलेट भी प्रदान की गई।
भेंट सामग्री उपलब्ध कराने में भरत प्रसाद, ऋषभ कुमार (सिमडेगा), डॉ. भानु प्रताप साहू (सिमडेगा) एवं राजकुमार साहू का सराहनीय योगदान रहा।
प्रधानाचार्य का प्रेरणादायी संबोधन
विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने स्वागत भाषण में कहा कि यह समारोह केवल विदाई नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन की नई यात्रा का शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि विद्यालय ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति के मूल्य दिए हैं।
उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल, सफल एवं सार्थक भविष्य की मंगलकामना की।
विद्यालय सचिव और सह सचिव का संदेश
विद्यालय के सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे जहाँ भी जाएँ, अपने आचरण से विद्यालय की पहचान बनाएँ। अनुशासन और परिश्रम को जीवन का आधार बनाएं तथा माता-पिता और गुरुजनों के त्याग को सदैव स्मरण रखें।
वहीं सह सचिव रिक्की अग्रवाल ने विद्यार्थियों को लक्ष्य स्पष्ट रखने, कठिनाइयों से न घबराने और समय का सदुपयोग करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि अच्छे अंक के साथ अच्छा चरित्र भी उतना ही आवश्यक है।
गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर यमुना कुमारी, दशरथी देवी, बिमला देवी, लक्ष्मी देवी, अर्जुन महतो, बसंती बड़ाईक, गणेश सिंह, जगेश्वर सिंह, प्रमोद पाणीग्राही, सुदर्शन कुमार, प्रगति सिंह, दीक्षित कुमारी, सुनीति कुमारी, संध्या बड़ाईक, भागीरथी सिंह, शिवरचंद नायक, रजनी बड़ाईक, कालीचरण, सबरन सिंह, एटलस तोपनो, तरुण सिंह ओलीबा एवं गंगोत्री देवी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन प्रमोद पाणीग्राही ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ।

न्यूज़ देखो: संस्कार आधारित शिक्षा की जीवंत मिसाल
विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर लचरागढ़ का यह आयोजन साबित करता है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कार और चरित्र निर्माण का माध्यम भी है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को जीवन के हर मोड़ पर सही दिशा दिखाने का कार्य करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कारवान विद्यार्थी ही राष्ट्र की असली पूंजी
आशीर्वाद और विदाई समारोह विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, नैतिकता और जिम्मेदारी का बोध कराते हैं। यदि शिक्षा के साथ संस्कार मिलें, तो समाज और राष्ट्र दोनों सशक्त बनते हैं। इस प्रेरक खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और शिक्षा से जुड़े सकारात्मक प्रयासों को आगे बढ़ाएं।







