सरना धर्म कोड की मांग जायज: आजसू ने कांग्रेस-झामुमो पर साधा निशाना

सरना धर्म कोड की मांग जायज: आजसू ने कांग्रेस-झामुमो पर साधा निशाना

author News देखो Team
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#रांची #सरनाधर्मकोड – आजसू नेताओं ने उठाए सवाल – आदिवासियों को गुमराह कर रही है सरकार, पेसा कानून अबतक क्यों नहीं लागू?

  • आजसू प्रवक्ता देवशरण भगत और उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने सरना धर्म कोड की मांग को वाजिब बताया
  • कहा – जिसकी सरकार, वही धरना दे रही है, यह राज्य की विडंबना
  • आरोप – कांग्रेस और झामुमो आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं
  • पेसा कानून लागू नहीं करने पर राज्य सरकार से जवाब मांगा
  • 1961 का कोलम हटाने और 2012 में सरना कोड असंवैधानिक बताने पर कांग्रेस को घेरा

सरना कोड को लेकर आजसू का तीखा प्रहार

रांची: सरना धर्म कोड की मांग को लेकर आजसू पार्टी ने शुक्रवार को झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता देवशरण भगत और केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि आदिवासियों की धार्मिक पहचान से जुड़ी सरना धर्म कोड की मांग पूरी तरह जायज है, लेकिन राज्य की सत्ताधारी पार्टियां राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस विषय पर आदिवासियों को भ्रमित कर रही हैं।

“आज झारखंड की विडंबना है कि जिनकी सरकार है, वही धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस और झामुमो सरना धर्म कोड को लेकर आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं,” — प्रवक्ता देवशरण भगत

पेसा कानून पर सरकार की चुप्पी पर सवाल

आजसू नेताओं ने आरोप लगाया कि अगर सत्ताधारी दल वाकई आदिवासी हितैषी होते तो अब तक राज्य में पेसा कानून लागू कर दिया गया होता।

“झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पेसा कानून लागू नहीं हुआ। कांग्रेस को बताना चाहिए कि 1961 में आदिवासियों के लिए जो कोलम था, उसे हटाने का काम किसने किया?” — प्रवीण प्रभाकर

2012 में यूपीए ने बताया था असंवैधानिक

नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि 2012 में यूपीए सरकार ने सरना धर्म कोड को असंवैधानिक बताया था और आज वही कांग्रेस-झामुमो सरकार जनगणना जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीतिक नौटंकी कर रही है।

उन्होंने कहा कि झारखंड में जातीय जनगणना को रोका जा रहा है, जबकि आदिवासियों की संख्या और अधिकार सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है।

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