10 साल से जर्जर गनसा–सिदरा पुल बना जानलेवा रास्ता, ग्रामीणों में आक्रोश, डीसी ने जांच का दिया आश्वासन

10 साल से जर्जर गनसा–सिदरा पुल बना जानलेवा रास्ता, ग्रामीणों में आक्रोश, डीसी ने जांच का दिया आश्वासन

author News देखो Team
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#लातेहार #पुल_जर्जर : वर्षों से टूटा पुल बना खतरा—ग्रामीणों ने उठाई निर्माण की मांग।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड में गनसा और सिदरा गांव के बीच बना पुल पिछले 10 वर्षों से जर्जर हालत में पड़ा है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है। पुल के अभाव में लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। किसानों, छात्रों और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द जांच और निर्माण शुरू कराने का आश्वासन दिया है।

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  • महुआडांड़ प्रखंड के गनसा–सिदरा गांव के बीच पुल 10 वर्षों से जर्जर।
  • ग्रामीण रोज जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर।
  • किसानों और छात्रों की दिनचर्या पर गंभीर असर।
  • बरसात में बढ़ जाता खतरा, कई बार हादसे होते-होते बचे।
  • डीसी संदीप कुमार ने जांच कर जल्द निर्माण शुरू करने का दिया आश्वासन।

महुआडांड़ प्रखंड के गनसा और सिदरा गांव के बीच बना पुल आज विकास की जगह लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। पिछले एक दशक से यह पुल खंडहर में तब्दील है, लेकिन अब तक इसके निर्माण या मरम्मत को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई। स्थिति इतनी गंभीर है कि ग्रामीणों को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। इस समस्या ने इलाके में आक्रोश और चिंता दोनों को बढ़ा दिया है।

10 साल से खंडहर बना पुल, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी

गनसा और सिदरा गांव को जोड़ने वाला यह पुल कभी आवागमन का मुख्य साधन हुआ करता था, लेकिन अब इसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यह पूरी तरह अनुपयोगी हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों से पुल जर्जर अवस्था में पड़ा है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही नेता और अधिकारी दोनों इस समस्या को भूल जाते हैं।

जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे ग्रामीण

पुल के अभाव में ग्रामीणों को रोज नदी पार करनी पड़ती है, जो बेहद खतरनाक साबित हो रही है। खासकर बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और भी भयावह हो जाती है।

कई बार ग्रामीणों के साथ दुर्घटनाएं होते-होते बची हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

किसानों और छात्रों पर पड़ रहा सीधा असर

इस पुल की खराब स्थिति का सबसे ज्यादा असर किसानों और छात्रों पर पड़ रहा है। किसानों की जमीन नदी के दोनों किनारों पर फैली हुई है, जिससे उन्हें खेती के लिए लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय करना पड़ता है।

वहीं, गनसा स्थित राजकीय विद्यालय जाने वाले बच्चों के लिए भी यह रास्ता बेहद खतरनाक बन चुका है। बच्चे रोज कीचड़, गड्ढों और असुरक्षित रास्तों से होकर स्कूल पहुंचते हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर भी असर

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में बच्चों का स्कूल जाना लगभग बंद हो जाता है, क्योंकि सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं होता। इससे उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

यह स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी को भी सामने लाती है।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक पुल का मामला नहीं है, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

डीसी ने दिया आश्वासन

इस मामले पर लातेहार के उपायुक्त संदीप कुमार ने कहा:

“हमें पुल की स्थिति की जानकारी मिली है। जल्द ही स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।”

प्रशासन के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों को कुछ उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह आश्वासन कब जमीन पर उतरता है।

न्यूज़ देखो: लापरवाही का प्रतीक बना पुल, अब कार्रवाई की जरूरत

गनसा–सिदरा पुल की स्थिति यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कितनी अनदेखी हो रही है। 10 वर्षों तक किसी महत्वपूर्ण पुल का जर्जर पड़े रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब जबकि जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्रवाई कितनी तेज और प्रभावी होती है। क्या इस बार ग्रामीणों को राहत मिलेगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब वक्त है आवाज उठाने का, बदलाव की शुरुआत करें

जब बुनियादी सुविधाएं ही संकट बन जाएं, तो चुप रहना समाधान नहीं होता। गनसा और सिदरा के ग्रामीणों की यह समस्या केवल एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।

जरूरी है कि हम सभी अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और ऐसे मुद्दों को मजबूती से उठाएं।

आप भी इस खबर पर अपनी राय दें, इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें और अपने क्षेत्र की समस्याओं को आवाज देने में भागीदार बनें।

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