शैक्षणिक भ्रमण से छात्रों को मिला प्रकृति और ज्ञान का जीवंत अनुभव, सुग्गा बांध पहुंचे नाइस कोचिंग सेंटर के विद्यार्थी

शैक्षणिक भ्रमण से छात्रों को मिला प्रकृति और ज्ञान का जीवंत अनुभव, सुग्गा बांध पहुंचे नाइस कोचिंग सेंटर के विद्यार्थी

author Akram Ansari
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#बरवाडीह #शैक्षणिक_भ्रमण : नाइस कोचिंग सेंटर द्वारा विद्यार्थियों के लिए आयोजित ज्ञानवर्धक और सुरक्षित शैक्षणिक यात्रा।

बरवाडीह प्रखंड में नाइस कोचिंग सेंटर की ओर से 04 जनवरी 2026 को कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सुग्गा बांध जलप्रपात का शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य छात्रों को पुस्तकीय शिक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक, भौगोलिक और पर्यावरणीय ज्ञान से जोड़ना था। कोचिंग के निर्देशक अकबर अंसारी के नेतृत्व में छात्रों ने सुरक्षित एवं अनुशासित ढंग से भ्रमण कर प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। इस पहल को छात्रों के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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  • नाइस कोचिंग सेंटर, सरईडीह द्वारा शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन।
  • 04 जनवरी 2026 को कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्र-छात्राओं की सहभागिता।
  • भ्रमण स्थल के रूप में चुना गया सुग्गा बांध जलप्रपात
  • अकबर अंसारी के मार्गदर्शन में सुरक्षित बस यात्रा।
  • विद्यार्थियों को भूगोल, पर्यावरण और जल संसाधन से जुड़ा व्यावहारिक ज्ञान।

बरवाडीह (लातेहार) क्षेत्र में शिक्षा को व्यवहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए नाइस कोचिंग सेंटर, सरईडीह की ओर से रविवार 04 जनवरी 2026 को शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस भ्रमण में हाई स्कूल स्तर के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उद्देश्य स्पष्ट था—कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकलकर छात्रों को वास्तविक दुनिया से रूबरू कराना और शिक्षा को रोचक बनाना।

विद्यार्थियों को सुबह निर्धारित समय पर बस के माध्यम से पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ सुग्गा बांध जलप्रपात ले जाया गया। भ्रमण के दौरान शिक्षकों और सहयोगी स्टाफ की निरंतर निगरानी रही, जिससे पूरी यात्रा अनुशासित और सुरक्षित वातावरण में संपन्न हो सकी।

शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य और महत्व

नाइस कोचिंग सेंटर के निर्देशक अकबर अंसारी (अकबर सर) ने बताया कि शैक्षणिक भ्रमण छात्रों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी सीख प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा प्रणाली में अनुभव आधारित सीख अत्यंत आवश्यक है।

अकबर अंसारी ने कहा: “शैक्षणिक भ्रमण छात्रों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक ज्ञान और अनुभव प्रदान करता है। प्राकृतिक स्थलों का प्रत्यक्ष अवलोकन उनके मानसिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभाता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे भ्रमण छात्रों में जिज्ञासा, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और सीखने की रुचि को बढ़ाते हैं।

सुग्गा बांध जलप्रपात में सीख और अवलोकन

सुग्गा बांध जलप्रपात पहुंचने के बाद विद्यार्थियों ने वहां के प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपात की संरचना और बांध के महत्व को नजदीक से देखा। शिक्षकों द्वारा मौके पर ही छात्रों को भूगोल, जल संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन से जुड़ी जानकारी दी गई।

छात्रों को समझाया गया कि किस प्रकार बांध स्थानीय जल आपूर्ति, सिंचाई और पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका निभाता है। इस प्रत्यक्ष अवलोकन से छात्रों को कक्षा में पढ़े गए विषयों को व्यवहारिक रूप में समझने का अवसर मिला।

अनुशासन, सहयोग और सामाजिक सीख

भ्रमण के दौरान छात्रों ने केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि सामूहिक अनुशासन, समय प्रबंधन, सहयोग और नेतृत्व जैसी महत्वपूर्ण जीवन कौशल भी सीखी। विद्यार्थियों को समूहों में विभाजित कर गतिविधियां कराई गईं, जिससे उनमें टीमवर्क की भावना विकसित हुई।

शिक्षकों ने छात्रों को स्वच्छता, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश भी दिया। छात्रों ने पूरे भ्रमण के दौरान अनुशासन का पालन करते हुए कोचिंग की गरिमा बनाए रखी।

पढ़ाई के साथ पिकनिक का आनंद

शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए पिकनिक की भी व्यवस्था की गई थी। सामूहिक भोजन, आपसी संवाद और प्रकृति के बीच बिताया गया समय छात्रों के लिए यादगार बन गया। विद्यार्थियों ने बताया कि इस तरह के भ्रमण से पढ़ाई का तनाव कम होता है और सीखने का उत्साह बढ़ता है।

कई छात्रों ने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी जलप्रपात और बांध को इतने करीब से देखा, जिससे उनके भीतर प्रकृति को समझने और संरक्षित करने की भावना जागृत हुई।

भविष्य में भी जारी रहेंगे ऐसे प्रयास

कार्यक्रम के समापन पर अकबर अंसारी ने सभी छात्रों, शिक्षकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नाइस कोचिंग सेंटर का लक्ष्य केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा नहीं, बल्कि छात्रों का सर्वांगीण विकास है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भी ऐसे शैक्षणिक भ्रमण, जागरूकता कार्यक्रम और शैक्षिक गतिविधियां आयोजित की जाती रहेंगी, ताकि छात्र व्यवहारिक जीवन के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें।

न्यूज़ देखो: शिक्षा को अनुभव से जोड़ने की सकारात्मक पहल

नाइस कोचिंग सेंटर का यह शैक्षणिक भ्रमण बताता है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जब छात्रों को प्रकृति और समाज से जोड़कर पढ़ाया जाता है, तब सीख स्थायी और प्रभावी बनती है। ऐसे प्रयास अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायक हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा को जीवंत बनाने की दिशा में कदम

शैक्षणिक भ्रमण छात्रों के आत्मविश्वास और समझ को मजबूत करते हैं।
अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों को ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
क्या आपके क्षेत्र में भी इस तरह की पहल हो रही है?
अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और शिक्षा से जुड़े सकारात्मक प्रयासों को आगे बढ़ाएं।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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