#सिसई #जनजाति_समागम : दिल्ली रैली को लेकर जनजाति समाज ने निकाली जागरूकता पद यात्रा।
गुमला जिले के सिसई में आगामी 24 मई को दिल्ली के लालकिला मैदान में आयोजित होने वाली जनजाति संस्कृति समागम महा गर्जना रैली को लेकर भव्य पद यात्रा निकाली गई। जनजाति समाज के महिला, पुरुष और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक पहचान और डीलिस्टिंग की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने आदिवासी संस्कृति, परंपरा और धर्मांतरण के मुद्दों पर अपने विचार रखे।
- 24 मई को दिल्ली के लालकिला मैदान में होगी महागर्जना रैली।
- सिसई में जनजाति समाज ने निकाली विशाल पद यात्रा।
- पद यात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए।
- संदीप उरांव, सोमा उरांव और सन्नी टोप्पो ने सभा को संबोधित किया।
- आदिवासी पहचान, परंपरा और डीलिस्टिंग मुद्दे पर हुई चर्चा।
- कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में जनजाति समाज के लोग उपस्थित रहे।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड में जनजाति समाज द्वारा आगामी 24 मई को दिल्ली के लालकिला मैदान में आयोजित होने वाली जनजाति संस्कृति समागम महा गर्जना रैली को लेकर एक विशाल पद यात्रा निकाली गई। इस दौरान पूरे क्षेत्र में जनजातीय संस्कृति और पहचान को लेकर जागरूकता का माहौल देखने को मिला।
केंद्रीय सरना स्थल से निकली पद यात्रा
पद यात्रा की शुरुआत सिसई थाना के सामने स्थित केंद्रीय सरना स्थल से हुई। यहां जनजाति समाज के महिला, पुरुष और नौजवान बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। इसके बाद सभी लोग थाना रोड और मुख्य चौक होते हुए जीता पतरा पहुंचे, जहां सभा का आयोजन किया गया।
पद यात्रा के दौरान लोग विभिन्न नारों के साथ आगे बढ़ रहे थे। पूरे सिसई क्षेत्र में नारों की गूंज सुनाई देती रही।
नारों से गूंज उठा सिसई
पद यात्रा में शामिल लोगों ने कई नारे लगाए, जिनमें—
- “जो महादेव पार्वती का नहीं, वो हमारे जात का नहीं”
- “पंखराज बाबा कार्तिक उरांव अमर रहें”
- “तेलंगा खड़िया अमर रहें”
- “जनजाति सुरक्षा मंच जिंदाबाद”
- “धर्मांतरण बंद करो”
जैसे नारे प्रमुख रहे।
इन नारों के माध्यम से जनजातीय पहचान और सांस्कृतिक अस्तित्व को लेकर संदेश देने का प्रयास किया गया।
सभा में वक्ताओं ने रखे विचार
सभा का संचालन गुमला जिला संयोजक दिनेश लकड़ा ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक बिहार-झारखंड संदीप उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, रीति-रिवाज और पूजा पद्धति से जुड़ी हुई है।
संदीप उरांव ने कहा: “जो लोग अपनी मूल जनजातीय परंपरा छोड़ चुके हैं और फिर भी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, उनके खिलाफ डीलिस्टिंग की मांग उठाई जा रही है।”
उन्होंने कहा कि 24 मई को दिल्ली के लालकिला मैदान में आयोजित महागर्जना रैली में देशभर से लाखों जनजातीय लोग शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
धर्मांतरण के मुद्दे पर भी उठी आवाज
मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट परंपराएं और पहचान हैं। उन्होंने पत्थलगड़ी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान बचाने की जरूरत है।
सोमा उरांव ने कहा: “जनजाति समाज को गुमराह होने से बचाना जरूरी है ताकि उसकी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके।”
वहीं सन्नी टोप्पो ने कहा कि कई जनजातीय लोग बहकावे में आकर अपना मूल धर्म छोड़ चुके हैं और उन्हें वापस अपनी परंपरा की ओर लौटना चाहिए।
बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
कार्यक्रम में विभिन्न समाजों और संगठनों के लोग शामिल हुए। इस दौरान कलवारी टेटे, सुनीता खड़िया, हिना खड़िया, लाली खड़िया, विश्वभूषण खड़िया, इंद्रपाल भगत, सोमेश्वर उरांव, देवकु भगत, रवि मांझी, सहोदरी उरांव, लच्छो उरांव, सीता उरांव, कर्मी उरांव सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में महली समाज के जिलाध्यक्ष सुमित महली ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

न्यूज़ देखो: जनजातीय पहचान और सामाजिक मुद्दों पर बढ़ती सक्रियता
सिसई में आयोजित यह पद यात्रा जनजातीय समाज के भीतर अपनी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक मुद्दों को लेकर बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी समाज को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन ऐसे विषयों पर संवाद और संवेदनशीलता बनाए रखना भी जरूरी है। आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाली महागर्जना रैली पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी रहेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति और संवाद से ही मजबूत होगा समाज
अपनी परंपरा, संस्कृति और पहचान को समझना हर समाज के लिए जरूरी है।
लेकिन सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जागरूक नागरिक बनें, तथ्यों को समझें और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा दें।
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