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विधानसभा में गूंजा शिक्षकों की कमी का मुद्दा: बगोदर विधायक नागेंद्र महतो ने उठाई नियुक्ति प्रक्रिया में देरी की आवाज

#रांची #विधानसभा : प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पर विधायक नागेंद्र महतो ने सरकार से की त्वरित कार्रवाई की मांग
  • विज्ञापन संख्या 13/2023 के तहत सहायक आचार्य भर्ती का मुद्दा विधानसभा में उठा।
  • बगोदर विधायक नागेंद्र महतो ने शून्यकाल में रखा मामला।
  • अभ्यर्थियों का नाम सूची में अंकित न होने पर जताई चिंता।
  • मांग – जांच प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जाए।
  • लक्ष्य – प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी दूर करना

रांची। सोमवार को झारखंड विधानसभा के शून्यकाल के दौरान बगोदर विधायक नागेंद्र महतो ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड प्रारंभिक विद्यालय सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (विज्ञापन संख्या 13/2023) के आधार पर प्रशिक्षित सहायक आचार्य (कक्षा 01 से 05) पद हेतु जारी सूची में कई अभ्यर्थियों का नाम अंकित नहीं किया गया है, जबकि वे सफल हुए हैं।

नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी

विधायक महतो ने कहा कि सूची से नाम गायब होने और नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी से अभ्यर्थियों का मनोबल टूट रहा है। कई उम्मीदवार वर्षों से कठिन तैयारी कर इस परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन अभी तक उन्हें उनका हक नहीं मिला है।

बगोदर विधायक नागेंद्र महतो: “सरकार को चाहिए कि जांच प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुनिश्चित करे, ताकि प्राथमिक स्तर की शिक्षा पर पड़ रहे नकारात्मक असर को रोका जा सके।”

शिक्षा व्यवस्था पर असर

झारखंड के कई प्रारंभिक विद्यालयों में लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

विधायक ने सरकार से अपील की कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शिता और तेजी से नियुक्ति सुनिश्चित करे, ताकि विद्यालयों में शिक्षा का माहौल बेहतर हो सके और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।

न्यूज़ देखो: शिक्षा में देरी बच्चों के भविष्य पर भारी

बगोदर विधायक की मांग ने एक बार फिर से शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने ला दिया है। योग्य उम्मीदवारों को समय पर मौका न मिलने और नियुक्ति प्रक्रिया लटकने से सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों का हो रहा है। सरकार को यह समझना होगा कि शिक्षा में कोई भी देरी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा सुधार की जिम्मेदारी सबकी

अब वक्त आ गया है कि सरकार और समाज दोनों मिलकर शिक्षा को प्राथमिकता दें। शिक्षकों की नियुक्ति केवल रोजगार का सवाल नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और झारखंड की प्रगति का भी सवाल है। आइए, मिलकर इस बदलाव में योगदान दें। अपनी राय कॉमेंट करें और इस खबर को साझा करें ताकि जागरूकता बढ़े।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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