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नीलाम्बर-पिताम्बर की उपेक्षित प्रतिमा, नावाटोली तालाब अतिक्रमण, गंदगी और उपेक्षा के साये में

#मेदिनीनगर #विरासतकीउपेक्षा : झारखंड की रजत जयंती उत्सव के बीच यह दृश्य प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर करता है।
  • नावाटोली तालाब, मेदिनीनगर स्थित ऐतिहासिक स्थल, अब गंदगी और अतिक्रमण का शिकार
  • वीर स्वतंत्रता सेनानी नीलाम्बर-पिताम्बर की प्रतिमा तालाब के बीच खड़ी होकर उपेक्षा झेल रही है।
  • स्थानीय लोगों के अनुसार, तालाब सिकुड़ता जा रहा है, जिससे इलाके की जलस्तर स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।
  • प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से लोगों में रोष, स्वच्छता और संरक्षण की मांग तेज़।
  • सामाजिक कार्यकर्ता शर्मिला वर्मा, सचिव, वरदान चेरिटेबल ट्रस्ट ने कहा — “हमारे वीर सेनानियों की उपेक्षा असहनीय है।”

मेदिनीनगर के नावाटोली में स्थित ऐतिहासिक तालाब आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यही वह जगह है जहां पलामू के अमर वीर सपूत नीलाम्बर और पिताम्बर की प्रतिमा स्थापित है। आजादी की लड़ाई में जिन भाईयों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उनकी प्रतिमा आज बजबजाते पानी और सड़ांध से घिरे तालाब में खड़ी होकर मौन विलाप करती प्रतीत होती है।

उपेक्षा और अतिक्रमण का शिकार इतिहास

कभी स्वच्छ और सुंदर रहा यह तालाब अब अतिक्रमण और गंदगी की चपेट में है। आसपास के लोग तो विकसित हो रहे हैं, लेकिन यह जलस्रोत और इसमें खड़ी प्रतिमा धीरे-धीरे इतिहास की धूल में दबती जा रही है।
झारखंड जब अपनी रजत जयंती मना रहा है, तब इस तालाब की दुर्दशा यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हमने अपने स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को भुला दिया है?

शर्मिला वर्मा, सचिव, वरदान चेरिटेबल ट्रस्ट ने कहा: “नीलाम्बर-पिताम्बर की कुर्बानी को याद रखना हमारा कर्तव्य है। तालाब की हालत देखकर लगता है जैसे उनकी आत्मा रो रही हो। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को तुरंत पहल करनी चाहिए।”

वीरों की प्रतिमा धूल और सड़ांध में दबी

शहर में लगी अधिकांश महान विभूतियों की प्रतिमाएं धूल से ढकी और उपेक्षित हैं। इनकी सफाई सिर्फ जन्मदिन या पुण्यतिथि पर होती है, बाकी समय इन्हें भुला दिया जाता है।
शर्मिला वर्मा बताती हैं कि पलामू के स्वतंत्रता सेनानियों के नामों में व्याप्त त्रुटियां भी अब तक नहीं सुधारी गई हैं। यह दर्शाता है कि प्रशासन की प्राथमिकताओं में न तो इतिहास है और न ही सम्मान।

जलस्रोत का महत्व और उपेक्षा

यह तालाब न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि स्थानीय जलस्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण इसका अस्तित्व खतरे में है।
यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में यह तालाब पूरी तरह समाप्त हो सकता है — साथ ही स्थानीय भूगर्भीय जल पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

विवेक वर्मा ने कहा: “यह तालाब हमारे इतिहास और प्रकृति दोनों की धरोहर है। आज इसकी हालत देखकर शर्म आती है कि हम अपने नायकों के प्रति इतने असंवेदनशील हो गए हैं।”

प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल

न तो नगर निगम, न ही जिला प्रशासन ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई की है।
चुनाव के समय नेता और उम्मीदवार विकास के वादे तो करते हैं, पर तालाब और प्रतिमा की सुध कोई नहीं लेता। यह स्थिति बताती है कि संवेदनहीनता और राजनीतिक उपेक्षा किस हद तक बढ़ चुकी है।

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न्यूज़ देखो: विरासत की रक्षा ही सच्ची आज़ादी

यह खबर बताती है कि हम अपने इतिहास और नायकों से धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं।
जब आज़ादी के मतवालों की प्रतिमा गंदे पानी में डूबी हो, तो यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, हमारी सामूहिक विफलता है।
जरूरी है कि नगर निगम, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर तालाब की सफाई और पुनर्स्थापन का अभियान शुरू करें।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी विरासत को जिंदा रखें

इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, ज़मीन पर दिखाई देना चाहिए।
नीलाम्बर-पिताम्बर जैसे सेनानियों की प्रतिमा को सम्मान देना हमारी जिम्मेदारी है।
आइए, इस मुहिम का हिस्सा बनें — प्रशासन से कार्रवाई की मांग करें, तालाब की सफाई के लिए सामुदायिक अभियान शुरू करें।
अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें, और पलामू की धरोहर बचाने की आवाज़ बनें।

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