#गिरिडीह #मजदूर_आंदोलन : अवैध छंटनी के विरोध में सैकड़ों मजदूरों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाई।
टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने मजदूरों की अवैध छंटनी के विरोध में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना पांचवें दिन भी जारी रहा। धरने में सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो, माले नेताओं और असंगठित मजदूर मोर्चा के पदाधिकारियों ने हिस्सा लेकर फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। नेताओं ने जिला प्रशासन से मजदूरों को पुनः काम पर बहाल कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर गेट जाम समेत बड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर शामिल हुए।
- बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ पांचवें दिन भी जारी रहा धरना।
- सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने मजदूरों के समर्थन में उठाई आवाज।
- असंगठित मजदूर मोर्चा ने गेट जाम आंदोलन की दी चेतावनी।
- मजदूरों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर अवैध छंटनी और शोषण के लगाए आरोप।
- माले नेताओं ने कहा — मजदूरों की एकता से होगा बड़ा आंदोलन।
- कार्यक्रम में सैकड़ों महिला-पुरुष मजदूर और किसान हुए शामिल।
टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने मजदूरों द्वारा चलाया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना पांचवें दिन भी जारी रहा। फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूरों की अवैध छंटनी और शोषण का आरोप लगाते हुए माले और असंगठित मजदूर मोर्चा के बैनर तले मजदूरों ने प्रदर्शन किया। धरने में बड़ी संख्या में मजदूर, किसान और स्थानीय लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
विधायक चंद्रदेव महतो ने प्रबंधन को दी चेतावनी
धरने में पहुंचे सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने मजदूरों के समर्थन में जोरदार भाषण दिया। उन्होंने कहा कि मेहनतकश मजदूरों को परेशान करना बंद किया जाए और फैक्ट्री एक्ट का पालन सुनिश्चित किया जाए।
विधायक चंद्रदेव महतो ने कहा: “खट कमाव मजदूर और जनता को तंग करना बंद करो। फैक्ट्री एक्ट को सभी जानते हैं लेकिन फैक्ट्री वाले मानते नहीं हैं। विधानसभा में भी बालमुकुंद फैक्ट्री के अड़ियल रवैये पर चर्चा हुई है। पांच मजदूरों को बिना नियम-कानून हटाना घोर अन्याय है।”
उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी श्रम मंत्री को दी जाएगी और गिरिडीह उपायुक्त को भी पत्र लिखा गया है। विधायक ने मजदूरों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि झारखंड सरकार मजदूरों के साथ अन्याय नहीं होने देगी।
गेट जाम आंदोलन की चेतावनी
असंगठित मजदूर मोर्चा के महासचिव निताय महतो ने प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हटाए गए मजदूरों को जल्द काम पर वापस नहीं लिया गया तो बड़ा आंदोलन होगा।
निताय महतो ने कहा: “प्रशासन हटाए गए मजदूरों की जांच कर जल्द से जल्द काम पर रखवाए, वरना बड़ा आंदोलन होगा। यह मजदूरों के हक की लड़ाई है और इसे लोकतांत्रिक तरीके से लड़ा जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में फैक्ट्री गेट पर ताला जड़ने और गेट जाम आंदोलन करने को मजदूर मजबूर होंगे।
माले नेताओं ने मजदूर एकता पर दिया जोर
माले जिला सचिव अशोक पासवान ने फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूरों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मजदूरों की एकता से ही अन्याय के खिलाफ लड़ाई मजबूत होगी।
अशोक पासवान ने कहा: “बालमुकुंद फैक्ट्री मैनेजमेंट मजदूरों को तंग करना बंद करो, वरना मजदूरों की एकता एक दिन तुम्हें मिट्टी में मिला देगी।”
उन्होंने गिरिडीह के मजदूरों, किसानों, छात्रों और महिलाओं से आंदोलन में एकजुट होने की अपील की।
किसान संगठनों ने भी दिया समर्थन
अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता पूरन महतो ने कहा कि यदि प्रशासन मजदूरों की मांगों पर ध्यान नहीं देता है तो हजारों की संख्या में लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा।
पूरन महतो ने कहा: “फैक्ट्री ने आसपास के इलाके को भी प्रभावित किया है। इसका मुआवजा देना होगा और किसान-मजदूर एक होकर अपनी लड़ाई लड़ेंगे।”
उन्होंने जिला प्रशासन से मजदूरों के पक्ष में हस्तक्षेप करने की मांग की।
फर्जी मुकदमों और शोषण का आरोप
माले नेता राजेश सिन्हा ने फैक्ट्री प्रबंधन पर फर्जी मुकदमे कराने और मजदूरों को डराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पैसे और दबाव के बल पर मजदूरों की आवाज नहीं दबाई जा सकती।
राजेश सिन्हा ने कहा: “मजदूर, किसान और जनता एक हो जाए। सिर्फ वोट देकर नेताओं को जिताने से काम नहीं चलेगा। मजदूरों को डराने की कोशिश बंद करनी होगी।”
वहीं असंगठित मजदूर मोर्चा के केंद्रीय सचिव कन्हाई पांडेय ने कहा कि लगातार मजदूरों के साथ धोखा हो रहा है और बिना सूचना मजदूरों को हटाया जा रहा है।
मजदूरों ने लगाए गंभीर आरोप
धरने के दौरान मजदूरों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर स्थानीय लोगों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि गिरिडीह के मजदूरों को कम मजदूरी दी जाती है तथा ठेकेदारों के माध्यम से शोषण किया जाता है।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा गाली-गलौज और मारपीट जैसी घटनाएं भी होती हैं। उन्होंने कहा कि असंगठित मजदूर मोर्चा और माले संगठन मजदूरों के शोषण को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
बड़ी संख्या में शामिल हुए मजदूर और स्थानीय लोग
धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में किशोर राय, दीपक गोस्वामी, हुबलाल राय, पवन यादव, नवीन पाण्डेय, सूदन कोल, तुलसी तुरी, लखन कोल, भीम कोल, अरबिंद टुडू, राजन तुरी, प्रशादी राय, भिखारी राय, सनातन साहू, सुनील ठाकुर, इम्तियाज अंसारी, गुलाब कोल, निमिया देवी, ललिता देवी, करमी देवी और सुनीत देवी समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
न्यूज़ देखो: मजदूरों की आवाज और प्रशासन की जिम्मेदारी
बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ चल रहा यह आंदोलन केवल कुछ मजदूरों की नौकरी का सवाल नहीं बल्कि श्रमिक अधिकारों और सम्मानजनक कार्य व्यवस्था का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। लगातार पांच दिनों से धरने पर बैठे मजदूरों की मांगों पर यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन और श्रम विभाग की जिम्मेदारी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर मजदूरों और प्रबंधन के बीच समाधान निकाला जाए। लोकतांत्रिक आंदोलनों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़े टकराव की वजह बन सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजदूरों की एकता ही अन्याय के खिलाफ सबसे बड़ी ताकत
मेहनतकश लोगों की मेहनत से ही उद्योग और समाज आगे बढ़ता है। यदि मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी होगी तो असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। इसलिए जरूरी है कि श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और कानून के अनुसार न्याय सुनिश्चित किया जाए।
संगठित समाज और जागरूक नागरिक ही लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं। मजदूर, किसान और आम जनता की आवाज को दबाने के बजाय समाधान की दिशा में कदम बढ़ाना समय की मांग है।
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