#सिमडेगा #घोष_प्रशिक्षण : सलडेगा में छह दिवसीय प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ हुआ।
सिमडेगा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड के तत्वावधान में प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का भव्य शुभारंभ किया गया। 5 से 10 जून तक चलने वाले इस प्रशिक्षण वर्ग में राज्य के 18 सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों से 155 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। उद्घाटन समारोह में शिक्षा, संस्कृति, अनुशासन और राष्ट्रभावना के महत्व पर प्रकाश डाला गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, संगठनात्मक कौशल और सांस्कृतिक चेतना का विकास करना है।
- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ।
- 18 विद्यालयों से 134 भैया-बहन एवं 21 आचार्य-आचार्या, कुल 155 प्रतिभागियों की सहभागिता।
- 5 जून से 10 जून तक चलेगा छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- मुख्य अतिथि शिवेंद्र लाल माणिक ने प्रशिक्षण को व्यक्तित्व विकास का माध्यम बताया।
- प्रतिभागियों को बांसुरी, बिगुल एवं अन्य घोष यंत्रों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- विश्व पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
सिमडेगा जिले के सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर इन दिनों घोष की मधुर ध्वनियों और राष्ट्रभक्ति की भावना से गुंजायमान है। वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड के तत्वावधान में आयोजित प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ गुरुवार को श्रद्धा, अनुशासन और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। यह प्रशिक्षण वर्ग 5 जून से 10 जून तक संचालित होगा, जिसमें झारखंड के विभिन्न जिलों में संचालित 18 सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों से आए छात्र-छात्राएं और शिक्षक भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति की भावना का विकास करना है। साथ ही घोष परंपरा को मजबूत करते हुए भविष्य के दक्ष कार्यकर्ताओं का निर्माण करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन माँ सरस्वती, भारत माता एवं ओउम् के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्चन के साथ किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शिवेंद्र लाल माणिक, मंत्री, श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
उन्होंने अपने संबोधन में प्रशिक्षण वर्गों की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
शिवेंद्र लाल माणिक ने कहा, “प्रशिक्षण वर्ग केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व विकास के बीजों का रोपण है। यहां प्राप्त प्रशिक्षण जीवनभर साधकों का मार्गदर्शन करता है।”
उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण अवधि का पूर्ण लाभ उठाने और सीखे गए ज्ञान को समाजहित में उपयोग करने का आह्वान किया।
झारखंड के 18 विद्यालयों से पहुंचे प्रतिभागी
प्रांतीय स्तर पर आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में झारखंड के विभिन्न जिलों में संचालित 18 सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों से आए 134 भैया-बहन एवं 21 आचार्य-आचार्या, कुल 155 प्रतिभागी शामिल हुए हैं।
प्रशिक्षण वर्ग में प्रतिभागियों को घोष के विभिन्न आयामों, वादन तकनीकों, अनुशासन एवं संगठनात्मक कार्यों से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
घोष की महत्ता पर प्रकाश
कार्यक्रम में उपस्थित अनिरुद्ध साहू ने घोष की परंपरा और उसके सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
अनिरुद्ध साहू ने कहा, “घोष केवल वाद्य यंत्रों का समूह नहीं, बल्कि अनुशासन, एकता और राष्ट्रभावना का सशक्त माध्यम है। घोष से जयघोष उत्पन्न होता है और जयघोष से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”
उन्होंने कहा कि घोष भारतीय सांस्कृतिक विरासत और संगठनात्मक परंपरा का अभिन्न अंग है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
उद्घाटन समारोह के दौरान छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत एवं सांस्कृतिक नृत्य ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का मन मोह लिया।
इन प्रस्तुतियों ने न केवल सांस्कृतिक समृद्धि का परिचय दिया, बल्कि कार्यक्रम के वातावरण को भी उल्लासपूर्ण बना दिया।
विश्व पर्यावरण दिवस पर हुआ वृक्षारोपण
प्रशिक्षण वर्ग के शुभारंभ की पूर्व संध्या पर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्रतिभागियों और अतिथियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा दिया जा रहा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण वर्ग के दौरान विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्रों का संचालन अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा किया जा रहा है।
मनोज पाठक, नंदलाल षाड़गी (सारंगी) तथा सूरज प्रतिभागियों को बांसुरी, बिगुल एवं अन्य घोष यंत्रों के संचालन और वादन का प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण में घोष के सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक दोनों पक्षों को शामिल किया गया है ताकि प्रतिभागी इसकी संपूर्ण समझ विकसित कर सकें।
अनेक गणमान्य अतिथि रहे उपस्थित
उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाषचंद्र दुबे, कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध साहू, अजय नंदन, घोष प्रशिक्षक मनोज पाठक, सूरज, नंदलाल षाड़गी, जिला निरीक्षक हीरालाल महतो, संकुल प्रमुख संतोष दास, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हनुमान बोंदिया, सहसचिव रामकृष्ण महतो, कोषाध्यक्ष संजीत कुमार, सदस्य मुरारी प्रसाद सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
आगत अतिथियों का परिचय सुभाषचंद्र दुबे ने कराया, जबकि कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के आचार्य आशीष बड़ाईक ने किया।
व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्रभावना का केंद्र बनेगा प्रशिक्षण वर्ग
छह दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण वर्ग में विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रतिभागियों को घोष वादन के साथ-साथ संगठनात्मक कौशल, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सांस्कृतिक मूल्यों की भी शिक्षा दी जाएगी।
आयोजकों का मानना है कि यह प्रशिक्षण वर्ग विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सामूहिक कार्य क्षमता और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करेगा।
न्यूज़ देखो: संस्कृति, अनुशासन और राष्ट्रभावना का संगम
सलडेगा में आयोजित यह प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग केवल संगीत या वादन सीखने का मंच नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी में संस्कार, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण और घोष प्रशिक्षण का संयोजन यह भी दर्शाता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को समझना भी है। आने वाले दिनों में इस प्रशिक्षण वर्ग से निकलने वाले प्रतिभागी समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कार और संस्कृति से मजबूत बनता है समाज
युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना किसी भी समाज के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
ऐसे प्रशिक्षण वर्ग न केवल प्रतिभा को निखारते हैं, बल्कि जीवन मूल्यों को भी मजबूत बनाते हैं। यदि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी संस्कृति, प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी समझे, तो एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण संभव है।
आप भी अपने क्षेत्र में होने वाले सकारात्मक और प्रेरणादायक आयोजनों से जुड़ें तथा नई पीढ़ी को संस्कारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाएं।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट में साझा करें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और सकारात्मक सामाजिक पहलों को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।

🗣️ Join the Conversation!
What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).