
#रांची #महिला_सशक्तिकरण : दूसरे बैच के प्रशिक्षण से महिलाओं में आत्मनिर्भरता की नई ऊर्जा दिखी।
रांची के दिघादोन गांव में डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन द्वारा मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण का दूसरा बैच आयोजित किया गया। इसमें 30 महिलाओं ने भाग लेकर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और आजीविका से जोड़ना है। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।
- दिघादोन गांव, रांची में मशरूम प्रशिक्षण का दूसरा बैच आयोजित।
- कुल 30 महिलाओं ने प्रशिक्षण में भाग लिया।
- अर्पणा लकड़ा के नेतृत्व में दिया गया प्रशिक्षण।
- व्यावहारिक तरीके से मशरूम उत्पादन की तकनीक सिखाई गई।
- प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वरोजगार के लिए तैयार।
रांची जिले के दिघादोन गांव में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन द्वारा मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच का सफल आयोजन किया गया। पहले बैच की सफलता के बाद आयोजित इस प्रशिक्षण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने इस पहल की प्रभावशीलता को और मजबूत किया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
महिलाओं में दिखा उत्साह और सीखने की ललक
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 30 महिलाओं ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने सीखने के प्रति गहरी रुचि दिखाई और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लिया।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने कहा: “हम इस काम को सीखकर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहती हैं।”
उनका यह उत्साह इस पहल के सफल होने का संकेत देता है।
अर्पणा लकड़ा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व संस्था की संस्थापक अर्पणा लकड़ा ने किया। उन्होंने महिलाओं को मशरूम उत्पादन की उन्नत तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने, लागत कम करने और अधिक लाभ प्राप्त करने के व्यावहारिक उपाय भी समझाए।
अर्पणा लकड़ा ने कहा: “हमारा लक्ष्य है कि महिलाएं खुद अपने पैरों पर खड़ी हों और आत्मनिर्भर बनें।”
व्यावहारिक प्रशिक्षण पर दिया गया जोर
इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसे पूरी तरह व्यावहारिक बनाया गया। महिलाओं को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें हर प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से शामिल किया गया।
उन्होंने स्वयं—
- मशरूम यूनिट तैयार करना
- बैग भरना
- उसकी देखरेख करना
- उत्पादन प्रक्रिया को समझना
सीखा, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा।
स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर बल
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को यह भी सिखाया गया कि वे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे कर सकती हैं।
साथ ही उन्हें अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के तरीके भी बताए गए, ताकि वे अपने उत्पादों को बेचकर आय अर्जित कर सकें।
उत्पादन केंद्र बना मजबूत आधार
गांव में स्थापित मशरूम उत्पादन केंद्र इस पहल का एक मजबूत आधार बन चुका है। यहां महिलाएं सामूहिक रूप से कार्य कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है, बल्कि समाज में उनकी भूमिका भी मजबूत हो रही है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
दूसरे बैच की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यह पहल अब एक व्यापक आंदोलन का रूप ले रही है। महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर इसे स्थायी आजीविका के रूप में अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
यह मॉडल अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायक बन रहा है।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण विकास की नई दिशा
दिघादोन गांव का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिखाता है कि सही दिशा और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। यह पहल केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम है। अब जरूरत है कि इस मॉडल को अधिक से अधिक क्षेत्रों में लागू किया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आत्मनिर्भर बनें, दूसरों को प्रेरित करें
जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो पूरा समाज मजबूत होता है।
नई तकनीक और कौशल सीखकर हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
जरूरी है कि हम ऐसे अवसरों का लाभ उठाएं और आगे बढ़ें।
आपकी मेहनत ही आपके भविष्य को संवारती है।
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