#सिमडेगा #हनुमान_मंदिर : कनारोवां में 221 कलश यात्रा के साथ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव प्रारंभ हुआ।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत कनारोवां गोंझु टोली में नव निर्मित हनुमान मंदिर के तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ भक्ति और श्रद्धा के साथ हुआ। प्रथम दिन 221 महिलाओं द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें आसपास के कई गांवों के श्रद्धालु शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। आगामी दिनों में अखंड हरिकीर्तन, पूर्णाहुति और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
- कनारोवां गोंझु टोली में नव निर्मित हनुमान मंदिर का तीन दिवसीय महोत्सव शुरू।
- प्रथम दिन 221 महिलाओं ने देव नदी से निकाली भव्य कलश यात्रा।
- वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर में संपन्न हुआ प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान।
- यजमान के रूप में रघुनाथ सिंह एवं उनकी पत्नी सनमईत देवी पूजा में शामिल हुए।
- 27 मई से अखंड हरिकीर्तन और अंतिम दिन भंडारा का आयोजन होगा।
- आसपास के कई गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल के बीच कनारोवां गोंझु टोली में नव निर्मित हनुमान मंदिर का तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ प्रारंभ हुआ। पूजा समिति कनारोवा के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे गांव में भक्ति गीत, जय श्रीराम के उद्घोष और धार्मिक उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम के प्रथम दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर देव नदी से मंदिर परिसर तक यात्रा निकाली। इस दौरान भक्तों ने जय श्रीराम के नारों के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
221 महिलाओं ने निकाली भव्य कलश यात्रा
प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत देव नदी से जल भरकर निकाली गई कलश यात्रा से हुई। जानकारी के अनुसार, कुल 221 महिलाओं ने कलश यात्रा में भाग लिया। महिलाएं भक्ति गीत गाते हुए और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ मंदिर परिसर तक पहुंचीं।
कलश यात्रा में कनारोवां के अलावा पबुड़ा, जराकेल, लचरागढ़ और समडेगा सहित कई गांवों के श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे गांव में उत्साह का माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से गांव में हनुमान मंदिर निर्माण की इच्छा थी, जो अब पूर्ण हुई है।
वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच संपन्न हुई प्राण प्रतिष्ठा
कलश यात्रा के बाद दोपहर में मंदिर परिसर में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई।
पूरे पूजन कार्य का संचालन पंडित पण्डा के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान पंडित गोवर्द्धन दास, पंडित रंजीत पण्डा, पंडित रामेश्वर दास, पंडित महेश्वर दास और पंडित जगर्नाथ पण्डा ने वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई।
यजमान के रूप में रघुनाथ सिंह एवं उनकी पत्नी सनमईत देवी पूजा में शामिल हुए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
अखंड हरिकीर्तन और भंडारे का होगा आयोजन
पूजा समिति की ओर से जानकारी दी गई कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद 27 मई बुधवार को सुबह 7 बजे से अखंड हरिकीर्तन का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु लगातार भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन में शामिल होंगे।
तीसरे दिन गुरुवार को पूर्णाहुति कार्यक्रम के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह धार्मिक आयोजन सामाजिक एकता और आध्यात्मिक जागरूकता का भी प्रतीक बन रहा है।
आयोजन को सफल बनाने में समिति की अहम भूमिका
पूरे आयोजन को सफल बनाने में पूजा समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के अध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह, सचिव हेमंत सिंह, कोषाध्यक्ष काजल देवी, उपाध्यक्ष रूपेश बड़ाईक और संरक्षक मारवाड़ी प्रधान लगातार कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे रहे।
इसके अलावा निगरानी समिति के सदस्य महाराज सिंह, बसंत सिंह, बीरबल सिंह, अशोक प्रधान और रघुनाथ सिंह सहित कई ग्रामीणों ने आयोजन में सक्रिय योगदान दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर निर्माण और महोत्सव आयोजन में गांव के लोगों ने मिलकर सहयोग किया, जिसके कारण कार्यक्रम भव्य रूप से संपन्न हो रहा है।
धार्मिक आयोजनों से बढ़ती है सामाजिक एकता
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में एकता, भाईचारा और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि नई पीढ़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में आयोजन में शामिल होकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

न्यूज़ देखो: आस्था और सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण
कनारोवां गोंझु टोली में आयोजित यह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक है। गांव के लोगों ने मिलकर जिस तरह इस आयोजन को सफल बनाया, वह सामूहिक सहयोग और आस्था की ताकत को दर्शाता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति और आस्था को सहेजना हम सबकी जिम्मेदारी
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।
ऐसे आयोजन हमारी परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को जीवित रखते हैं।
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना आज समय की बड़ी जरूरत है।
एकजुट समाज ही मजबूत और सकारात्मक भविष्य की पहचान बनता है।
आप भी अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी निभाएं।
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