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औराटोली आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका अनुपस्थित—बच्चों की पढ़ाई, पोषण और देखभाल पर गंभीर असर

#महुआडांड़ #आंगनबाड़ी_लापरवाही : सेविका के पूरे दिन गैरहाजिर रहने से अभिभावकों में रोष, बच्चों की शिक्षा और देखभाल प्रभावित
  • औराटोली आंगनबाड़ी केंद्र में सोमवार को सेविका पूरे दिन गायब।
  • केंद्र पर केवल रसोइया मौजूद रही, भोजन कराकर केंद्र बंद कर दिया गया।
  • ग्रामीणों ने बताया—बच्चे सिर्फ खाना खाने आते हैं, शिक्षा और गतिविधियां नहीं होतीं।
  • सेविका की अनुपस्थिति की शिकायतें पहले भी की गई थीं।
  • अभिभावकों और ग्रामीणों ने जांच और सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

महुआडांड़ (लातेहार)। महुआडांड़ प्रखंड के औराटोली आंगनबाड़ी केंद्र में सोमवार को गंभीर लापरवाही उजागर हुई, जब केंद्र की सेविका पूरे दिन अनुपस्थित रहीं। बच्चों के लिए बनाए गए इस केंद्र की ज़िम्मेदारी सिर्फ रसोइया के कंधों पर रह गई, जिसने बच्चों को भोजन तो कराया, लेकिन पढ़ाई, गतिविधियों और देखभाल के अभाव में समय से पहले ही केंद्र को बंद करना पड़ा। इस घटना ने स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

सेविका के न आने से केंद्र की मूल व्यवस्था चरमराई

ग्रामीणों के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्र का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, खेलकूद और देखभाल उपलब्ध कराना है। लेकिन सेविका के नियमित रूप से उपस्थित न रहने के कारण बच्चे केवल भोजन लेने के लिए ही केंद्र आते हैं। न तो शिक्षण-सामग्री का उपयोग होता है और न ही किसी प्रकार की गतिविधि कराई जाती है।
स्थानीय अभिभावक बताते हैं कि—

“हमारे बच्चे सिर्फ खाना खाकर लौट आते हैं। पढ़ाई और खेलकूद की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर बुरा असर पड़ रहा है।”

पहले भी हो चुकी हैं शिकायतें, पर कार्रवाई शून्य

ग्रामीणों ने बताया कि सेविका की गैरमौजूदगी की शिकायत कई बार विभागीय अधिकारियों को की जा चुकी है, लेकिन आज तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण लापरवाही बढ़ती जा रही है और इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।

अभिभावकों ने उठाई जांच और कार्रवाई की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि औराटोली आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यप्रणाली की जांच कर दोषी सेविका पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसी स्थितियां बार-बार सामने आती रहेंगी।
ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया कि केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग, आकस्मिक निरीक्षण और सेविकाओं की उपस्थिति रजिस्टर की जांच अनिवार्य की जाए।

बच्चों के विकास पर गंभीर प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, शून्य से छह वर्ष तक का समय बच्चों के मस्तिष्क और व्यक्तित्व विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित संचालन बच्चों के भविष्य निर्धारण में बड़ी भूमिका निभाता है। लेकिन केंद्र में नियमित गतिविधियों, पढ़ाई और पोषण निगरानी का अभाव बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

न्यूज़ देखो: लापरवाही पर सख्त कदम जरूरी

आंगनबाड़ी व्यवस्था सरकार की उन योजनाओं में से एक है, जो ग्रामीण बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की नींव मजबूत करती है। सेविकाओं की अनुपस्थिति और विभागीय उदासीनता इन योजनाओं के उद्देश्य को कमज़ोर करती है। अब आवश्यकता है कि प्रशासन जागे, जवाबदेही तय करे और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना हम सबकी जिम्मेदारी

ग्रामीण समाज तभी मजबूत बनता है, जब उसके बच्चे मजबूत हों।
समय पर शिक्षा, पोषण और देखभाल हर बच्चे का अधिकार है—उसमें किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
आइए, हम सब आवाज उठाएं कि आंगनबाड़ी केंद्र सही तरीके से चले, बच्चे सिर्फ भोजन नहीं बल्कि सीखने और बढ़ने का मौका भी पाएं।
आप क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में लिखें और खबर को जरूर शेयर करें।

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Ramprawesh Gupta

महुवाडांड, लातेहार

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