केराखाड़ में आंगनबाड़ी तक जाने का रास्ता नहीं, बच्चों और महिलाओं को रोजाना झेलनी पड़ रही भारी परेशानी

केराखाड़ में आंगनबाड़ी तक जाने का रास्ता नहीं, बच्चों और महिलाओं को रोजाना झेलनी पड़ रही भारी परेशानी

author News देखो Team
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#महुआडांड़ #सड़क_समस्या : आंगनबाड़ी तक रास्ता नहीं होने से ग्रामीणों को गंभीर कठिनाई हो रही है।

महुआडांड़ प्रखंड के केराखाड़ गांव में आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं, जिससे बच्चों, महिलाओं और सेविकाओं की पहुंच प्रभावित होती है। इस समस्या को लेकर जेएमएम नेता परवेज आलम ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है। यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है।

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  • केराखाड़ गांव में आंगनबाड़ी तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क का अभाव।
  • बरसात में रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है।
  • बच्चों, गर्भवती महिलाओं और सेविका को रोजाना परेशानी।
  • जेएमएम नेता परवेज आलम ने प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की।
  • समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

महुआडांड़ प्रखंड के केराखाड़ गांव की यह समस्या ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़ा करती है। एक ओर सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं देने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इन योजनाओं का लाभ लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है। सड़क न होने के कारण आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए चुनौती बन गया है।

आंगनबाड़ी तक पहुंचना बना चुनौती

केराखाड़ गांव में आंगनबाड़ी केंद्र तो संचालित है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए कोई समुचित सड़क नहीं है। ग्रामीणों को कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। यह रास्ता खासकर बरसात के दिनों में पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे आना-जाना लगभग असंभव हो जाता है।

इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और आंगनबाड़ी सेविकाओं पर पड़ रहा है। कई बार महिलाएं और बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बना रहता है।

योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा

सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार, टीकाकरण और प्रारंभिक शिक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। लेकिन सड़क के अभाव में ये सुविधाएं पूरी तरह से ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चे केंद्र तक नहीं जा पाते, जिससे उनके पोषण और शिक्षा पर असर पड़ रहा है। वहीं गर्भवती महिलाओं को समय पर सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जो स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।

जेएमएम नेता ने उठाई आवाज

इस गंभीर समस्या को लेकर युवा जेएमएम जिला सचिव परवेज आलम ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा:

परवेज आलम ने कहा: “आंगनबाड़ी जैसे महत्वपूर्ण केंद्र तक सड़क का न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे बच्चों और महिलाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

आंदोलन की चेतावनी

परवेज आलम ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है।

ग्रामीणों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि वे लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

प्रशासन से उम्मीद

ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई करेगा। यदि समय रहते सड़क का निर्माण नहीं किया गया, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है, खासकर बरसात के मौसम में।

न्यूज़ देखो: बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी क्यों?

केराखाड़ की यह स्थिति बताती है कि आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं लोगों तक नहीं पहुंच पाई हैं। आंगनबाड़ी जैसे महत्वपूर्ण केंद्र तक सड़क का अभाव प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। सवाल यह है कि योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका सही क्रियान्वयन क्यों नहीं होता? अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बदलाव की शुरुआत गांव से ही होती है

ग्रामीण विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि उनके सही क्रियान्वयन से संभव है। केराखाड़ जैसे गांव हमें याद दिलाते हैं कि अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

अगर हम सब मिलकर अपनी समस्याओं को मजबूती से उठाएं, तो बदलाव जरूर संभव है। बच्चों का भविष्य, महिलाओं की सुरक्षा और गांव का विकास हम सभी की जिम्मेदारी है।

अब वक्त है आवाज उठाने का और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने का।

अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं, खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें और जागरूकता फैलाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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