पकरीपाठ में गहराया जल संकट, एक जलमीनार के भरोसे 40 घरों की जिंदगी मुश्किल

पकरीपाठ में गहराया जल संकट, एक जलमीनार के भरोसे 40 घरों की जिंदगी मुश्किल

author News देखो Team
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#महुआडांड़ #पेयजल_संकट : खराब जलमीनारों के कारण ग्रामीणों को घंटों करना पड़ रहा इंतजार।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित पकरीपाठ गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। गांव की पांच में से चार जलमीनारें खराब पड़ी हैं, जबकि एकमात्र चालू जलमीनार से भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। करीब 40 घरों के लोग इसी पर निर्भर हैं, जिससे रोजाना घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने समस्या के समाधान के लिए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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  • पकरीपाठ गांव में 5 में से 4 जलमीनारें खराब
  • केवल 1 जलमीनार से 40 घरों को मिल रहा पानी।
  • कम बोरिंग के कारण धीमी गति से निकल रहा पानी।
  • ग्रामीणों को घंटों कतार में लगकर इंतजार करना पड़ रहा।
  • महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित
  • प्रशासन से मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत पकरीपाठ गांव इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है। गांव में पानी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों को पीने के पानी के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

गांव में कुल पांच जलमीनारें स्थापित हैं, लेकिन इनमें से चार पूरी तरह खराब पड़ी हैं। एकमात्र चालू जलमीनार भी कम जलस्तर के कारण पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहा है, जिससे समस्या और बढ़ गई है।

एक जलमीनार पर 40 घरों की निर्भरता

पकरीपाठ गांव में लगभग 40 घरों की आबादी इस समय एक ही जलमीनार पर निर्भर है। ऐसे में सभी परिवारों तक समय पर पानी पहुंच पाना संभव नहीं हो पा रहा है।

सुबह होते ही ग्रामीण पानी भरने के लिए कतार में लग जाते हैं, लेकिन पानी की धीमी गति के कारण कई लोगों की बारी ही नहीं आ पाती। इससे लोगों को दिनभर पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

एक ग्रामीण ने कहा: “पानी के लिए दिनभर इंतजार करना पड़ता है, कई बार हमारी बारी ही नहीं आती, जिससे पीने के पानी की भी दिक्कत हो जाती है।”

महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

इस जल संकट का सबसे ज्यादा असर गांव की महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। उन्हें घर के कामकाज छोड़कर घंटों पानी भरने में लगाना पड़ रहा है।

गर्मी के बढ़ते तापमान के बीच यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। पानी की कमी के कारण न केवल पीने बल्कि दैनिक उपयोग के लिए भी परेशानी बढ़ रही है।

जलमीनारों की खराबी बनी मुख्य वजह

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में स्थापित चार जलमीनार लंबे समय से खराब पड़े हैं। इनकी मरम्मत को लेकर कई बार संबंधित विभाग को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

इसके अलावा, जो एक जलमीनार चालू है, उसकी बोरिंग भी पर्याप्त गहराई तक नहीं है, जिससे पानी बहुत धीमी गति से निकलता है और जरूरत के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलमीनारों की मरम्मत कर दी जाती, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

यह मामला प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है, जहां बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखी हैं—

  • खराब पड़े चारों जलमीनारों की जल्द मरम्मत की जाए।
  • चालू जलमीनार की बोरिंग गहराई बढ़ाई जाए।
  • गांव में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था तत्काल उपलब्ध कराई जाए।

ग्रामीणों ने अपील की है कि इस गंभीर समस्या को जल्द से जल्द दूर किया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके और बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष न करना पड़े।

न्यूज़ देखो: पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर संकट, जिम्मेदार कौन?

पकरीपाठ गांव की स्थिति यह दर्शाती है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। पानी जैसी आवश्यक सुविधा के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़े, यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जरूरी है कि जिम्मेदार विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर समाधान सुनिश्चित करे। क्या समय रहते इस संकट का स्थायी समाधान होगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पानी पर अधिकार, अब आवाज उठाना जरूरी

पानी हर व्यक्ति का मूल अधिकार है, इसके लिए संघर्ष नहीं होना चाहिए।
अगर हम चुप रहेंगे, तो समस्याएं और बढ़ती जाएंगी।
जरूरी है कि हम अपनी आवाज उठाएं और समाधान की मांग करें।
एकजुट होकर ही हम बदलाव ला सकते हैं और अपने अधिकार पा सकते हैं।

अगर आपके क्षेत्र में भी ऐसी समस्या है, तो उसे सामने लाएं और जागरूक बनें। इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, अपनी राय कमेंट में दें और अपने हक के लिए आवाज उठाने में पीछे न हटें।

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