News dekho specials
Palamau

यह बजट शेखचिल्ली का शोरबा है, इसमें न विकास की धार है न राहत की उम्मीद : हृदयानंद मिश्र

#पलामू #बजट_राजनीति : केंद्र सरकार के बजट पर तीखा प्रहार, कटौती और बेरोज़गारी को बताया सबसे बड़ी विफलता
  • हृदयानंद मिश्र ने केंद्रीय बजट को बताया शोर-शराबे वाला लेकिन कमजोर।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण व शहरी विकास में भारी कटौती का आरोप।
  • फसल बीमा, यूरिया सब्सिडी, गैस योजना सहित गरीब कल्याण योजनाओं में कमी।
  • ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़ी योजनाओं में भी कटौती का दावा।
  • महंगाई और बेरोज़गारी पर कोई ठोस समाधान नहीं होने की बात कही।

केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। बजट पर कड़ी टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ नेता हृदयानंद मिश्र ने इसे “शेखचिल्ली का शोरबा” करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही दुनिया में अर्थव्यवस्था की रैंकिंग और विश्व गुरु बनने की बातें करती रही हो, लेकिन बजट ने जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है।

हृदयानंद मिश्र ने कहा कि वर्ष 2025-26 में न तो सरकार राजस्व बढ़ाने में सफल रही और न ही टैक्स वसूली को मजबूत कर पाई। इसके बावजूद इस बार का बजट बड़े-बड़े दावों के साथ पेश किया गया, जिसमें “धुआं तो बहुत है, लेकिन धार बेहद पतली है।”

हर क्षेत्र में कटौती ही कटौती

उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक विकास, ग्रामीण विकास और शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारी कटौती की गई है। गरीब और मध्यम वर्ग के लिए चलाई जा रही योजनाओं को कमजोर करने का काम किया गया है।

हृदयानंद मिश्र के अनुसार, फसल बीमा योजना, यूरिया सब्सिडी, गरीब कल्याण अन्न योजना और गरीबों के लिए गैस योजना तक में कटौती कर दी गई है, जिससे सबसे अधिक असर आम जनता और किसानों पर पड़ेगा।

पिछड़े और वंचित वर्गों पर भी मार

उन्होंने कहा कि बजट में ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़ी योजनाओं में भी कटौती की गई है। यहां तक कि बच्चों की छात्रवृत्ति की राशि घटा दी गई, जो शिक्षा के प्रति सरकार की प्राथमिकता पर सवाल खड़े करती है।

महंगाई और बेरोज़गारी पर चुप्पी

हृदयानंद मिश्र ने बजट को पूरी तरह से दिशाहीन बताते हुए कहा कि इसमें न तो बढ़ती महंगाई से निपटने का कोई ठोस उपाय है और न ही बेरोज़गारी को रोकने के लिए कोई प्रभावी योजना। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को संभालने के लिए भी बजट में कोई स्पष्ट संकल्प नहीं दिखता।

“यह कटौती का बजट है”

अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट विकास का नहीं, बल्कि कटौती का बजट है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “मोदी जी अब काटने में लग गए हैं, बांट तो वे पहले ही रहे थे।” उनके इस बयान के बाद बजट को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

News dekho specials

न्यूज़ देखो: बजट पर सियासी घमासान

केंद्रीय बजट को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। हृदयानंद मिश्र का यह बयान बताता है कि बजट के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आपकी राय भी है ज़रूरी

क्या यह बजट आम जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता है या कटौती का दस्तावेज है?
अपनी राय कमेंट में साझा करें और खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Related News

Back to top button
🔔

Notification Preferences

error: