
#खलारी #अलविदा_जुमा : कल चांद न दिख पाने से आज शुक्रवार को दूसरी बार अदा हुई विशेष नमाज।
रांची जिले के खलारी और मैकलुस्कीगंज क्षेत्र में रमजान के अंतिम शुक्रवार को अलविदा जुमे की नमाज अदा की गई। इस वर्ष चांद न दिखने के कारण रमजान बढ़ने से दो बार अलविदा नमाज पढ़ी गई। मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजियों ने अमन-शांति और देश की तरक्की के लिए दुआ मांगी। प्रशासन भी व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रिय रहा।
- मैकलुस्कीगंज और खलारी क्षेत्र की मस्जिदों में अलविदा जुमे की नमाज अदा।
- चांद न दिखने के कारण इस वर्ष दो बार अलविदा नमाज पढ़ी गई।
- लपरा, मायापुर, हुटाप, डकरा, राय, धमधमिया सहित कई इलाकों में भीड़।
- नमाजियों ने देश में अमन-चैन और तरक्की की दुआ मांगी।
- प्रशासन द्वारा सुरक्षा, साफ-सफाई और पेयजल की विशेष व्यवस्था की गई।
रांची जिले के खलारी और मैकलुस्कीगंज क्षेत्र में रमजान के अंतिम जुमा के अवसर पर अलविदा जुमे की नमाज पूरे एहतराम और अकीदत के साथ अदा की गई। इस वर्ष एक विशेष परिस्थिति देखने को मिली, जब चांद न दिखने के कारण रमजान का महीना आगे बढ़ गया और मुस्लिम समुदाय को दो बार अलविदा जुमे की नमाज अदा करनी पड़ी। मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा।
चांद न दिखने से बदला रमजान का क्रम
इस वर्ष ईद का चांद तय दिन नजर नहीं आया, जिसके कारण रमजान का महीना एक दिन आगे बढ़ गया। सामान्यतः रमजान के आखिरी शुक्रवार को ही अलविदा जुमे की नमाज अदा की जाती है, लेकिन इस बार पहले शुक्रवार को नमाज के बाद भी चांद नहीं दिखा।
इसी कारण अगले शुक्रवार को फिर से अलविदा जुमे की नमाज अदा की गई। इस दौरान रोजेदारों ने रमजान का 30वां रोजा भी मुकम्मल किया। यह स्थिति लोगों के लिए खास और यादगार रही।
विभिन्न मस्जिदों में उमड़ी भीड़
मैकलुस्कीगंज, खलारी और आसपास के क्षेत्रों की मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे। लपरा, मायापुर, हुटाप, खलारी, बाजार टांड़ डकरा, राय और धमधमिया सहित कई इलाकों में लोगों ने नमाज अदा की।
मस्जिदों में नमाज को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। साफ-सफाई, पेयजल और नमाजियों की सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम पहले से ही सुनिश्चित किए गए थे। लोगों ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ नमाज अदा की।
अमन-शांति और देश की तरक्की के लिए दुआ
नमाज के दौरान रोजेदारों ने अल्लाह से देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। लोगों ने अपने वतन भारत की तरक्की और विकास के लिए भी हाथ उठाकर प्रार्थना की।
नमाजियों ने कहा: “हमने अल्लाह से देश में शांति, भाईचारा और तरक्की के लिए दुआ मांगी, ताकि सभी लोग खुशहाल जीवन जी सकें।”
इस अवसर पर समाज में एकता और आपसी सद्भाव बनाए रखने का संदेश भी दिया गया।
धार्मिक महत्व पर रोशनी
मैकलुस्कीगंज स्थित मदीना मस्जिद के मोतवल्ली अब्बुल अजीज ने रमजान के महत्व को विस्तार से बताया।
अब्बुल अजीज ने कहा: “रमजान का महीना अल्लाह की ओर से एक खास इनाम है, जिसमें नमाज, रोजा, फितरा, जकात और इबादत का विशेष महत्व होता है। अलविदा जुमे का मतलब रमजान को विदाई देना होता है और यह दिन बहुत अहम होता है।”
उन्होंने भारत की धर्मनिरपेक्षता पर भी जोर देते हुए कहा कि यहां सभी धर्मों को समान सम्मान दिया जाता है और त्योहारों को मिल-जुलकर मनाने की परंपरा है।
प्रशासन रहा सतर्क
नमाज के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहा। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि नमाज शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो। लोगों ने भी प्रशासन का सहयोग करते हुए अनुशासन बनाए रखा।
ईद-उल-फितर को लेकर उत्साह
अलविदा जुमे की नमाज के साथ ही रमजान के समापन की प्रक्रिया पूरी हो गई और अब ईद-उल-फितर का पर्व मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। क्षेत्र में शनिवार को ईद का त्योहार मनाया जाएगा।
बाजारों में खरीदारी तेज हो गई है और लोगों में उत्साह का माहौल है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस पर्व को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं।

न्यूज़ देखो: परंपरा, आस्था और एकता का अनूठा संगम
खलारी और मैकलुस्कीगंज में दो बार अलविदा जुमे की नमाज का अदा होना इस वर्ष की विशेष धार्मिक परिस्थिति को दर्शाता है। यह घटना बताती है कि आस्था और परंपरा के प्रति लोगों की प्रतिबद्धता कितनी गहरी है। साथ ही प्रशासन और समाज के सहयोग से शांति और सौहार्द का वातावरण कायम रखना भी एक सकारात्मक संकेत है। अब यह देखना अहम होगा कि यह एकता और भाईचारा आगे भी बना रहता है या नहीं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ एकता का संदेश फैलाएं
त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम होते हैं। अलविदा जुमे की नमाज हमें शांति, धैर्य और भाईचारे का संदेश देती है।
आइए, हम सभी मिलकर इस भावना को आगे बढ़ाएं और समाज में सकारात्मक माहौल बनाएं।
धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करें और सहयोग की भावना रखें।
अपने आसपास जरूरतमंद लोगों की मदद करें और समाज को मजबूत बनाएं।
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