बेलटोली में पारंपरिक सरना झंडा बदली कार्यक्रम संपन्न, संस्कृति संरक्षण का दिया गया संदेश

बेलटोली में पारंपरिक सरना झंडा बदली कार्यक्रम संपन्न, संस्कृति संरक्षण का दिया गया संदेश

author Aditya Kumar
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#डुमरी #सरना_परंपरा : धार्मिक आयोजन में ग्रामीणों ने सामाजिक एकता और संस्कृति संरक्षण का संकल्प लिया।

डुमरी प्रखंड के बेलटोली गांव स्थित धूमकुड़िया भवन परिसर में पारंपरिक सरना झंडा बदली कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। पुजार सुखी भगत की अगुवाई में हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सरना धर्म से जुड़े गीत, भजन और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आयोजन के माध्यम से सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का संदेश भी दिया गया।

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  • बेलटोली गांव के धूमकुड़िया भवन में हुआ आयोजन।
  • पुजार सुखी भगत की अगुवाई में संपन्न हुआ कार्यक्रम।
  • सरना धर्म से जुड़े गीत-भजन और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति हुई।
  • अकलू भगत ने संस्कृति संरक्षण पर जोर दिया।
  • ग्रामीणों ने सामाजिक एकता और परंपरा संरक्षण का संकल्प लिया।
  • बड़ी संख्या में ग्रामीण और समाज के लोग रहे उपस्थित।

डुमरी प्रखंड के बेलटोली गांव में आयोजित पारंपरिक सरना झंडा बदली कार्यक्रम श्रद्धा, आस्था और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बनकर सामने आया। धूमकुड़िया भवन परिसर में आयोजित इस धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रम में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन के दौरान पूरे क्षेत्र में पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक आस्था का सुंदर संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ की गई, जिसमें सरना धर्म की मान्यताओं के अनुरूप पूजा-अर्चना की गई। आयोजन के दौरान ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संकल्प भी लिया।

श्रद्धा और परंपरा के बीच संपन्न हुआ आयोजन

कार्यक्रम का संचालन पुजार सुखी भगत की अगुवाई में किया गया। पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा वातावरण श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

धूमकुड़िया भवन परिसर में सरना धर्म से जुड़े गीत-भजन और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन गूंजती रही। ग्रामीण पारंपरिक परिधान में कार्यक्रम में शामिल हुए और सामूहिक रूप से धार्मिक अनुष्ठान में भागीदारी निभाई।

आयोजन के दौरान लोगों ने सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।

वरिष्ठ बुजुर्गों ने नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने पर दिया जोर

कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ बुजुर्ग अकलू भगत ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ी हुई है।

अकलू भगत ने कहा: “आदिवासी समाज की असली पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, भाषा और रहन-सहन में निहित है। ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन समाज को एकजुट रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।”

उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी संस्कृति और मूल पहचान को बचाकर रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सामूहिक पूजा के साथ सामाजिक एकता का लिया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर सरना परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। लोगों ने सामाजिक समरसता बनाए रखने और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का भी संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में समाज की एकता, धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश दिया गया।

बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद

इस धार्मिक-सामाजिक आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण और समाज के लोग उपस्थित रहे।

मौके पर जगरनाथ भगत, तुलिश भगत, ललित भगत, इतवारी देवी, शशिकला देवी, लौंगी देवी, मांगरीता देवी, प्रभा देवी, शोसन उरांव, कमला देवी, सुशीला देवी और कांति देवी सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: संस्कृति की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, समाज उतना मजबूत बनेगा

ऐसे आयोजन केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। बदलते समय के साथ परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में सामूहिक भागीदारी वाले आयोजन नई पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का यह प्रयास समाज के लिए सकारात्मक संदेश देता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी संस्कृति से जुड़ना अपनी पहचान को मजबूत करना है

परंपराएं केवल रीति-रिवाज नहीं बल्कि समाज की आत्मा होती हैं। अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत को सहेजना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।

जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, तब उसकी पहचान और एकता दोनों मजबूत होती हैं।

सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी करें और अपनी विरासत को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाएं।

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Written by

डुमरी, गुमला

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