#ठेठईटांगर #खरीफ_कर्मशाला : कम वर्षा की आशंका के बीच किसानों को वैकल्पिक खेती की दी गई जानकारी।
झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के निर्देश पर शुक्रवार को ठेठईटांगर प्रखंड में प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में किसानों को संभावित सूखा, कम वर्षा, जल संरक्षण और वैज्ञानिक खेती के उपायों की जानकारी दी गई। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने किसानों से वैकल्पिक फसलों को अपनाने और खेतों में पानी संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान एवं कृषि विभाग के कर्मी मौजूद रहे।
- 22 मई 2026 को ठेठईटांगर प्रखंड में खरीफ कर्मशाला आयोजित।
- प्रखंड प्रमुख विपिन पंकज मिंज ने कम वर्षा को लेकर किसानों को किया सतर्क।
- BDO श्रीमती नूतन मिंज ने जल संरक्षण और वैकल्पिक खेती अपनाने की अपील की।
- किसानों को मड़ुआ, गोंदली, उड़द, राहर जैसी कम पानी वाली फसलों की जानकारी दी गई।
- 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज उपलब्ध कराने की जानकारी किसानों को दी गई।
- कृषि विभाग द्वारा फसल बीमा, मेड़बंदी और डोभा निर्माण पर दिया गया प्रशिक्षण।
झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के निर्देशानुसार शुक्रवार को ठेठईटांगर प्रखंड में प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को संभावित सूखा, कम वर्षा की स्थिति, जल संरक्षण तथा वैकल्पिक खेती के प्रति जागरूक करना था ताकि किसान बदलते मौसम के अनुरूप वैज्ञानिक तरीके से खेती कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। कार्यशाला में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों एवं फसल विविधीकरण की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, कृषि विभाग के अधिकारियों और बड़ी संख्या में किसानों की उपस्थिति रही।
दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रखंड प्रमुख विपिन पंकज मिंज, प्रखंड विकास पदाधिकारी श्रीमती नूतन मिंज, सांसद प्रतिनिधि, मुखिया सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा कार्यक्रम में BAO, BAHO, VLW, BTM, ATM, BPM, कृषक मित्र एवं विभिन्न विभागों के कर्मी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने किसानों को खरीफ मौसम की तैयारी समय रहते पूरी करने की सलाह दी। किसानों को यह भी बताया गया कि जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित वर्षा की स्थिति में खेती के तौर-तरीकों में बदलाव करना अब आवश्यक हो गया है।
कम वर्षा की संभावना को लेकर किसानों को किया गया सतर्क
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रखंड प्रमुख विपिन पंकज मिंज ने किसानों से कम पानी में होने वाली फसलों का चयन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौसम वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष वर्षा सामान्य से कम होने की संभावना है, इसलिए किसानों को अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
प्रखंड प्रमुख विपिन पंकज मिंज ने कहा: “इस बार वैज्ञानिकों के द्वारा पूर्वानुमान लगाया गया है कि इस साल वर्षा ठीक से नहीं होगी, इसलिए वैसे फसल का चयन करें जो कम वर्षा में भी अच्छी होती है।”
उन्होंने किसानों को खेतों की मेड़ दुरुस्त करने और बारिश के पानी को खेतों में रोकने की सलाह दी ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे और रोपाई के समय पानी की कमी का सामना न करना पड़े।
प्रखंड प्रमुख विपिन पंकज मिंज ने कहा: “खेत के मेड़ को मजबूत करें और बारिश के पानी को खेत में ही रोक कर रखें, जिससे खेती के समय परेशानी नहीं होगी।”
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कृषि विभाग के भूमि संरक्षण योजना के तहत किसानों को तालाब निर्माण, डीप बोरिंग और सोलर आधारित पंप सेट वितरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिसका लाभ लेकर किसान अपनी खेती को आधुनिक और उन्नत बना सकते हैं।
BDO ने जल संरक्षण और वैज्ञानिक खेती पर दिया जोर
प्रखंड विकास पदाधिकारी श्रीमती नूतन मिंज ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते मौसम और कम वर्षा की संभावना को देखते हुए खेती की तैयारी वैज्ञानिक तरीके से करना जरूरी है। उन्होंने किसानों से जल संरक्षण को प्राथमिकता देने और कम पानी वाली फसलों को अपनाने की अपील की।
BDO श्रीमती नूतन मिंज ने कहा: “बदलते मौसम एवं कम वर्षा की संभावना को देखते हुए अभी से तैयारी करना आवश्यक है। किसान जल संरक्षण और वैकल्पिक खेती को अपनाएं।”
उन्होंने किसानों को मड़ुआ, गोंदली, उड़द और राहर जैसी फसलों की खेती बढ़ाने पर जोर दिया, जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं। अधिकारियों ने कहा कि ऐसी फसलें किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी लाभकारी साबित हो सकती हैं।
किसानों को दी गई आधुनिक तकनीकों की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान बीटीएम द्वारा किसानों को मौसम आधारित खेती, सूखा प्रबंधन, उन्नत बीजों के उपयोग, मेड़बंदी, डोभा निर्माण, मिट्टी जांच और संतुलित उर्वरक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि सही तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि किसान लैम्पस के माध्यम से 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों को खरीफ खेती की तैयारी में आर्थिक सहायता मिलेगी।
फसल बीमा और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था पर जोर
कार्यक्रम में उपस्थित VLW एवं ATM कर्मियों ने किसानों को फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीक और फसल बीमा योजनाओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए फसल बीमा कराने की सलाह दी ताकि नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
कार्यशाला में किसानों को आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि जल संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान खेती को लाभकारी बना सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने विभिन्न योजनाओं और खेती से संबंधित सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने विस्तार से जवाब दिया। बड़ी संख्या में किसानों की सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है।
न्यूज़ देखो: बदलते मौसम में वैज्ञानिक खेती ही किसानों का सहारा
ठेठईटांगर में आयोजित खरीफ कर्मशाला यह दिखाती है कि अब खेती केवल पारंपरिक अनुभवों पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सलाह और मौसम आधारित रणनीति पर निर्भर होती जा रही है। कम वर्षा और जल संकट की चुनौती के बीच किसानों को समय रहते जागरूक करना बेहद जरूरी कदम है। सरकार और कृषि विभाग यदि योजनाओं का लाभ सही समय पर किसानों तक पहुंचाएं तो खेती को नुकसान से बचाया जा सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किसानों तक अनुदान और तकनीकी सहायता कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक किसान ही मजबूत गांव और समृद्ध समाज की पहचान
खेती केवल आजीविका नहीं बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। बदलते मौसम के दौर में जागरूकता, तकनीक और जल संरक्षण ही किसानों की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। यदि हर किसान पानी बचाने, वैज्ञानिक खेती अपनाने और वैकल्पिक फसलों की ओर कदम बढ़ाए तो खेती को संकट से बचाया जा सकता है। सरकारी योजनाओं की सही जानकारी और सामूहिक प्रयास ग्रामीण विकास को नई दिशा दे सकते हैं।

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