News dekho specials
Giridih

उसरी नदी संरक्षण को मिली बड़ी सफलता, चार हजार पौधारोपण को वन विभाग की मंजूरी, सर्वे शुरू

#गिरिडीह #उसरी_नदी : उसरी बचाव अभियान की मांग पर नदी किनारे चार हजार पौधे लगाए जाएंगे।

गिरिडीह की जीवनदायिनी उसरी नदी के संरक्षण को लेकर उसरी बचाव अभियान को बड़ी सफलता मिली है। अभियान की ओर से नदी किनारे चार हजार पेड़ लगाने की मांग को वन विभाग ने मंजूरी दे दी है और इसके तहत उसरी नदी क्षेत्र का सर्वे भी पूरा कर लिया गया है। वन विभाग के अनुसार जल्द गड्ढे खोदने का कार्य शुरू होगा और बरसात के मौसम में पौधारोपण किया जाएगा। इस पहल को नदी संरक्षण और भूजल स्तर सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • उसरी बचाव अभियान की मांग पर चार हजार पौधारोपण को मिली स्वीकृति।
  • वन विभाग ने आज उसरी नदी क्षेत्र का सर्वे किया।
  • डीएफओ मनीष तिवारी की पहल से एक सप्ताह में कार्य शुरू होने की संभावना।
  • बरसात में पौधारोपण, घेराबंदी और सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग की।
  • अभियान ने नगर विकास मंत्री, सीसीएल गिरिडीह और जिला प्रशासन को दिया धन्यवाद।
  • वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, कॉरिडोर और सिहोडीह पुल की मांग दोहराई गई।

गिरिडीह के लिए उसरी नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि इंसान, जानवर, जलचर और पक्षियों के जीवन का आधार है। लंबे समय से इसके संरक्षण की मांग कर रहे उसरी बचाव अभियान को अब ठोस सफलता मिलती दिख रही है। नदी किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण से न केवल पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा, बल्कि भूजल स्तर को भी स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

चार हजार पेड़ों की मांग को मिली स्वीकृति

उसरी बचाव अभियान के सक्रिय सदस्य राजेश सिन्हा ने बताया कि अभियान की ओर से नदी किनारे चार हजार पेड़ लगाने की मांग वन विभाग से की गई थी, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है। इसी क्रम में वन विभाग की टीम ने आज उसरी नदी क्षेत्र का विस्तृत सर्वे किया। उन्होंने कहा कि यह कदम उसरी नदी को दीर्घकालिक संरक्षण देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

डीएफओ मनीष तिवारी की पहल

पूर्वी क्षेत्र के डीएफओ मनीष तिवारी की पहल पर इस योजना को आगे बढ़ाया गया है। जानकारी के अनुसार, अगले एक सप्ताह के भीतर पौधारोपण की तैयारी के तहत गड्ढे खोदने का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके बाद बरसात के मौसम में पौधे लगाए जाएंगे, ताकि उनका संरक्षण और वृद्धि बेहतर ढंग से हो सके।

सुरक्षा और घेराबंदी की जिम्मेदारी वन विभाग की

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि लगाए जाने वाले पौधों की घेराबंदी और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी विभाग स्वयं उठाएगा। इसके लिए वन विभाग के सभी पदाधिकारी और कर्मियों की तैनाती की जाएगी। इस पहल को लेकर उसरी बचाव अभियान की टीम ने वन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है और इसे सकारात्मक सहयोग का उदाहरण बताया है।

नगर विकास मंत्री की भूमिका भी अहम

इस पूरे प्रयास में नगर विकास मंत्री की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि मंत्री के सहयोग और प्रयास से इस योजना को गति मिली। उसरी बचाव अभियान की टीम ने नगर विकास मंत्री को भी धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई कि आगे की मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।

आगे की प्रमुख मांगें

उसरी बचाव अभियान ने पौधारोपण के साथ-साथ नदी संरक्षण से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण मांगों को भी दोहराया है। इनमें:

  • वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना।
  • उसरी नदी के किनारे कॉरिडोर निर्माण
  • उसरी–सिहोडीह पुल के कार्य को शीघ्र शुरू करना।

अभियान को उम्मीद है कि इन मांगों पर भी जल्द कार्य प्रारंभ होगा, जिससे उसरी नदी का समग्र विकास और संरक्षण संभव हो सकेगा।

News dekho specials

छिलका डैम और सीसीएल का योगदान

अभियान की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि सीसीएल गिरिडीह ने छिलका डैम के लिए लगभग चार करोड़ रुपये जिला प्रशासन को देने की बात कही है। इस राशि से जल संरक्षण और संबंधित कार्यों को गति मिलने की संभावना है। इस संबंध में सीसीएल गिरिडीह के जीएम सहित सभी पदाधिकारियों को अभियान की ओर से धन्यवाद दिया गया है।

उपायुक्त को सौंपा जाएगा आवेदन

उसरी बचाव अभियान की टीम ने बताया कि जल्द ही गिरिडीह उपायुक्त को लिखित आवेदन सौंपकर सभी लंबित कार्यों को शीघ्र शुरू कराने की मांग की जाएगी। साथ ही सीसीएल द्वारा दिए जाने वाले फंड के उपयोग और प्रगति को लेकर भी प्रशासन से चर्चा की जाएगी।

जागरूकता अभियान और उसरी महोत्सव

पिछले वर्ष उसरी नदी को लेकर जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उसरी महोत्सव का आयोजन किया गया था। इस वर्ष भी महोत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है, जिस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। अभियान का मानना है कि जनभागीदारी के बिना नदी संरक्षण संभव नहीं है।

अतिक्रमण और पानी के दोहन पर चिंता

अभियान ने उसरी नदी पर बढ़ते अतिक्रमण को गंभीर मुद्दा बताया है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ फैक्ट्रियां उसरी नदी पर निर्भर होने के बावजूद इसके संरक्षण पर ध्यान नहीं दे रही हैं। विशेष रूप से बालमुकुंद फैक्ट्री द्वारा रोजाना 40–50 टैंकर पानी उठाए जाने का विरोध अभियान द्वारा जारी रखने की बात कही गई है।

न्यूज़ देखो: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी

उसरी नदी के किनारे चार हजार पेड़ों का प्रस्ताव केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि गिरिडीह के भविष्य को सुरक्षित करने की पहल है। प्रशासन, वन विभाग और सामाजिक संगठनों का सहयोग इस बात का संकेत है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो पर्यावरण संरक्षण संभव है। अब जरूरी है कि सभी वादे समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

उसरी बचेगी, तभी शहर बचेगा

नदी केवल पानी नहीं, बल्कि जीवन की धड़कन होती है। उसरी नदी का संरक्षण आज नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह नदी, जंगल और पर्यावरण के पक्ष में खड़ा हो।
आप भी इस अभियान से जुड़कर अपनी भूमिका निभाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और उसरी नदी को बचाने की मुहिम को मजबूत बनाएं।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Saroj Verma

दुमका/देवघर
Back to top button
🔔

Notification Preferences

error: