#रांचीसमाचार #वटसावित्री_व्रत : सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए की पूजा।
रांची जिले के खलारी, मैक्लुस्कीगंज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को वट सावित्री व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर वट वृक्ष की पूजा की और पति की दीर्घायु एवं परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। क्षेत्र के मंदिरों और पूजा स्थलों पर दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा तथा महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
- खलारी और मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में श्रद्धा के साथ मनाया गया वट सावित्री व्रत।
- सुहागिन महिलाओं ने रखा निर्जला उपवास और की पूजा-अर्चना।
- वट वृक्ष की परिक्रमा कर पति की लंबी उम्र की कामना की गई।
- महिलाओं ने सूत लपेटकर परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
- पूजा के दौरान सुनाई गई सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा।
- पूरे क्षेत्र में धार्मिक और पारंपरिक उत्साह का माहौल बना रहा।
रांची जिले के खलारी, मैक्लुस्कीगंज कोयलांचल क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में शनिवार को वट सावित्री व्रत पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
खलारी, मैक्लुस्कीगंज, हेसालौंग, नवाडीह, धमधमीया, डकरा और केडी राय सहित विभिन्न गांवों एवं बस्तियों में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा।
महिलाओं ने रखा निर्जला उपवास
वट सावित्री व्रत को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया। सुबह से ही सुहागिन महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर पारंपरिक श्रृंगार किया और समूह में पूजा स्थलों की ओर रवाना हुईं।
महिलाएं निकट स्थित वट वृक्ष के पास पहुंचीं, जहां उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न की।
वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा
महिलाओं ने वट वृक्ष को जल, अक्षत, फूल, श्रृंगार सामग्री और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। इसके बाद वृक्ष की परिक्रमा करते हुए सूत लपेटकर पति की लंबी आयु और परिवार के मंगल की कामना की।
पूजा के दौरान कई महिलाओं ने वट वृक्ष को पंखा झलकर अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट की।
सुनाई गई सावित्री-सत्यवान की कथा
पूजा के दौरान पुजारियों द्वारा सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा सुनाई गई, जिसे महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक सुना।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह पर्व वट सावित्री व्रत के रूप में मनाया जाता है।
घरों में बने पारंपरिक व्यंजन
पूजा के बाद महिलाएं अपने घर लौटीं और पति को पंखा झलकर प्रसाद खिलाया। इस अवसर पर घरों में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजन और पकवान भी तैयार किए गए।
पूरे क्षेत्र में धार्मिक और पारिवारिक उत्सव जैसा वातावरण देखने को मिला।
धार्मिक मान्यता और सांस्कृतिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है। वट वृक्ष को अक्षय और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
भारतीय संस्कृति में वट सावित्री व्रत नारी श्रद्धा, समर्पण, पारिवारिक मूल्यों और वैवाहिक जीवन की पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
मंदिरों और पूजा स्थलों पर उमड़ी भीड़
क्षेत्र के मंदिरों और पूजा स्थलों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया।
धार्मिक गीतों और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
न्यूज़ देखो: परंपरा, आस्था और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक पर्व
वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति की उन परंपराओं में शामिल है जो परिवार, श्रद्धा और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश देती हैं।
यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं बल्कि वैवाहिक जीवन में विश्वास, समर्पण और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी माना जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति और परंपराओं को संजोना भी हमारी जिम्मेदारी
भारतीय पर्व और व्रत हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं और पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाते हैं।
जरूरी है कि आने वाली पीढ़ियां भी इन परंपराओं और उनके महत्व को समझें तथा उन्हें आगे बढ़ाएं।
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