#खलारीसमाचार #संस्कारसमारोह : धमधमियां विद्यालय में बुजुर्ग सम्मान और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन।
रांची जिले के खलारी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर धमधमियां में दादा-दादी एवं नाना-नानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा और पारिवारिक संस्कारों का संदेश दिया। समारोह में परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान किया गया और बच्चों को संस्कारों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
- सरस्वती विद्या मंदिर धमधमियां में आयोजित हुआ दादा-दादी एवं नाना-नानी सम्मान समारोह।
- कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन से किया।
- छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत, नृत्य, नाटक और छठ पूजा की झांकी प्रस्तुत की।
- परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का पूजन कर सम्मानित किया गया।
- मुख्य अतिथि ने भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों के सम्मान को महत्वपूर्ण बताया।
- वेशभूषा प्रतियोगिता के विजेताओं को भी समारोह में पुरस्कृत किया गया।
खलारी क्षेत्र के सरस्वती विद्या मंदिर धमधमियां में शुक्रवार को पारिवारिक संस्कारों और भारतीय संस्कृति को समर्पित दादा-दादी एवं नाना-नानी सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। प्राथमिक एवं माध्यमिक खंड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय परिसर सांस्कृतिक और पारिवारिक भावनाओं से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि रघुवंश नारायण सिंह तथा विशिष्ट अतिथि महेंद्र प्रसाद यादव, राघवेंद्र प्रसाद और मिथलेश कुमार द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
विद्यालय के बच्चों ने स्वागत गीत, पारंपरिक नृत्य, नाटक और छठ पूजा की झांकी प्रस्तुत कर भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई। कार्यक्रम में प्रस्तुत की गई झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को अभिभावकों एवं अतिथियों ने खूब सराहा।
विशेष रूप से छठ पूजा की प्रस्तुति ने लोगों को भावुक कर दिया और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। बच्चों की प्रस्तुति में पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
बुजुर्गों का किया गया सम्मान
समारोह का मुख्य आकर्षण दादा-दादी, नाना-नानी और परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान रहा। विद्यालय परिवार की ओर से बुजुर्गों का पूजन कर उन्हें सम्मानित किया गया।
इस दौरान बच्चों ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त किया। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने भी इस पहल को सराहनीय बताया।
भारतीय संस्कृति और संस्कारों पर जोर
मुख्य अतिथि रघुवंश नारायण सिंह ने अपने संबोधन में कहा:
“परिवार के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की पहचान है। उनके अनुभव और आशीर्वाद से परिवार संस्कारित होता है।”
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
वहीं विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के उपाध्यक्ष महेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि पुरानी परंपराओं और संस्कारों को बचाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विद्यालय की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं।
वेशभूषा प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा
कार्यक्रम के दौरान आयोजित वेशभूषा प्रतियोगिता में बच्चों ने विभिन्न पारंपरिक परिधानों में अपनी प्रस्तुति दी। प्रतियोगिता के विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती हैं।
प्रधानाचार्य ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य Shaligram Singh ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा:
“इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों में संस्कार, आत्मविश्वास और पारिवारिक मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
उन्होंने विद्यालय परिवार की ओर से सभी प्रतिभागियों और सहयोगकर्ताओं को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर विद्यालय परिवार और स्थानीय समाज के कई लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से:
नेपाल सिंह, आचार्य चंद्रभूषण सिंह, गौरी शंकर कामिला, पुरुषोत्तम कुमार सिंह, विक्रम कुमार पांडे, दिलीप कुमार शर्मा, सूरज कुमार, पूनम पाठक, नूतन सिंह, बसंती कुमारी, रीमा कुमारी, प्रिया कुमारी, वर्षा कुमारी और गोविंद सहित कई लोग मौजूद रहे।
न्यूज़ देखो: बदलते दौर में पारिवारिक संस्कारों को संजोने की पहल
ऐसे कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को परिवार और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम भी हैं। आज के आधुनिक दौर में जब संयुक्त परिवार और पारंपरिक मूल्य धीरे-धीरे कमजोर हो रहे हैं, तब बच्चों को अपने बुजुर्गों के सम्मान का संदेश देना बेहद महत्वपूर्ण है।
सरस्वती विद्या मंदिर की यह पहल यह दर्शाती है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं बल्कि संस्कार निर्माण भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परिवार, संस्कार और सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाने का समय
बड़े-बुजुर्ग परिवार की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। उनके अनुभव और आशीर्वाद से ही समाज मजबूत और संस्कारित बनता है।
जरूरी है कि नई पीढ़ी अपने पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं को समझे और उनका सम्मान करे। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करते हैं।
सजग रहें, अपने संस्कारों से जुड़े रहें और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करें। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और भारतीय संस्कृति की इस खूबसूरत परंपरा को मजबूत बनाएं।

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