
#गिरिडीह #चतरो #मजदूर_आंदोलन : 17 फरवरी के लाठी-झाड़ू मार्च को लेकर गांव-गांव जनसंपर्क तेज।
चतरो क्षेत्र के पुरनी पेटरिया गांव में आगामी 17 फरवरी को प्रस्तावित लाठी-झाड़ू मार्च कार्यक्रम को लेकर व्यापक प्रचार अभियान चलाया गया। भाकपा माले और असंगठित मजदूर मोर्चा चतरो शाखा की ओर से किए जा रहे इस आंदोलन के समर्थन में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। भाकपा माले के तीन साथियों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश देखा गया। आंदोलन का उद्देश्य फर्जी मुकदमे वापस लेने, प्रदूषण रोकने और स्थानीय मजदूरों को स्थायी रोजगार दिलाने की मांग को मुखर करना है।
- पुरनी पेटरिया गांव में लाठी-झाड़ू मार्च को लेकर जनसंपर्क अभियान।
- 17 फरवरी को भाकपा माले और असंगठित मजदूर मोर्चा का आंदोलन प्रस्तावित।
- भाकपा माले के तीन साथियों पर फर्जी मुकदमों से ग्रामीणों में रोष।
- प्रदूषण और स्थायी रोजगार को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी।
- कॉमरेड केदार राय, किशोर राय सहित कई नेताओं की भागीदारी।
चतरो क्षेत्र में भाकपा माले और असंगठित मजदूर मोर्चा चतरो शाखा द्वारा प्रस्तावित लाठी-झाड़ू मार्च को लेकर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी कड़ी में शुक्रवार को पुरनी पेटरिया गांव में ग्रामीणों, महिलाओं और पुरुषों ने एकजुट होकर आंदोलन के समर्थन में प्रचार अभियान चलाया। गांव की गलियों और चौपालों पर लोगों से संवाद कर उन्हें 17 फरवरी के कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया गया।
इस दौरान ग्रामीणों में भाकपा माले के तीन साथियों पर दर्ज किए गए कथित फर्जी मुकदमों को लेकर खासा गुस्सा देखने को मिला। लोगों का कहना था कि आंदोलन की आवाज को दबाने के लिए इस तरह के मुकदमे लगातार किए जा रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फर्जी मुकदमों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश
प्रचार के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि जब भी मजदूर, किसान या आम लोग अपने अधिकारों की बात करते हैं, तब उन पर झूठे मुकदमे थोप दिए जाते हैं। इससे न केवल आंदोलन कमजोर करने की कोशिश होती है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का भी हनन होता है।
ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की कि भाकपा माले के तीनों साथियों पर दर्ज मुकदमों को अविलंब वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
उद्योगपतियों पर आंदोलन दबाने का आरोप
अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष कॉमरेड केदार राय ने प्रचार के दौरान कहा:
कॉमरेड केदार राय ने कहा: “आए दिन उद्योगपति आंदोलनकारियों की आवाज दबाने के लिए फर्जी मुकदमे करते हैं। यह अब एक तरह का प्रचलन बन चुका है, जिसे जनता अच्छी तरह समझ चुकी है।”
उन्होंने कहा कि मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई को दबाने के लिए प्रशासन और पूंजीपतियों की सांठगांठ सामने आ रही है। ऐसे में संगठित होकर संघर्ष करना ही एकमात्र रास्ता बचता है।
प्रदूषण और रोजगार को लेकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान
असंगठित मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष कॉमरेड किशोर राय ने साफ शब्दों में कहा:
कॉमरेड किशोर राय ने कहा: “जब तक फैक्ट्रियों के द्वारा प्रदूषण फैलाना बंद नहीं होगा और स्थानीय मजदूरों को स्थायी काम नहीं मिलेगा, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषण से स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, जबकि रोजगार के नाम पर केवल अस्थायी और असुरक्षित काम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लाठी-झाड़ू मार्च के माध्यम से इन मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
इस प्रचार अभियान में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। महिलाओं ने कहा कि प्रदूषण और बेरोजगारी का सबसे ज्यादा असर परिवारों और बच्चों पर पड़ता है। ऐसे में वे भी इस आंदोलन का हिस्सा बनकर अपने हक की लड़ाई लड़ेंगी। महिला प्रतिभागियों ने गांव की अन्य महिलाओं से भी 17 फरवरी को लाठी-झाड़ू मार्च में शामिल होने की अपील की।
मौके पर मौजूद रहे ये प्रमुख लोग
प्रचार कार्यक्रम के दौरान कॉमरेड मसूदन, कॉमरेड किशोर राय, कॉमरेड केदार राय, राजेश राय, नरेश राय, भीम कोल्ह, पार्वती देवी सहित दर्जनों पुरुष और महिलाएं मौजूद रहीं। सभी ने एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया और ग्रामीणों से बड़ी संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।
न्यूज़ देखो: आंदोलन और जनअसंतोष का संकेत
पुरनी पेटरिया में हुआ यह प्रचार अभियान स्पष्ट संकेत देता है कि फर्जी मुकदमों, प्रदूषण और रोजगार जैसे मुद्दों पर जनअसंतोष लगातार बढ़ रहा है। भाकपा माले और असंगठित मजदूर मोर्चा का लाठी-झाड़ू मार्च इन सवालों को सार्वजनिक मंच पर लाने का प्रयास है। प्रशासन और संबंधित संस्थानों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे इन मांगों को गंभीरता से लें। अब देखना होगा कि 17 फरवरी का आंदोलन किस दिशा में जाता है।
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संगठित आवाज से ही मिलेगा अधिकार
जब जनता संगठित होकर अपनी बात रखती है, तभी बदलाव की राह बनती है। लाठी-झाड़ू मार्च केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हक और इंसाफ की मांग का प्रतीक है। मजदूर, किसान और महिलाएं एकजुट होकर अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहती हैं।
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