समसेरा विद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर करने ग्रामीण आगे आए, दो प्रशिक्षित शिक्षकों की हुई बहाली

समसेरा विद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर करने ग्रामीण आगे आए, दो प्रशिक्षित शिक्षकों की हुई बहाली

author Satyam Kumar Keshri
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#बोलबा #शिक्षा_व्यवस्था : ग्रामीणों और मुखिया के प्रयास से विद्यालय में पढ़ाई को मिली नई उम्मीद।

बोलबा प्रखंड के समसेरा पंचायत स्थित रा.उ. मध्य विद्यालय समसेरा बखरी टोली में लंबे समय से शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। समस्या को देखते हुए मुखिया सुरजन बड़ाईक, ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन समिति के प्रयास से दो प्रशिक्षित शिक्षकों की बहाली की गई। दोनों शिक्षक स्थानीय पोषक क्षेत्र के रहने वाले हैं और अब विद्यालय में नियमित पठन-पाठन की उम्मीद बढ़ गई है। अभिभावकों ने भी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षकों के पारिश्रमिक में सहयोग करने का निर्णय लिया है।

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  • रा.उ. मध्य विद्यालय समसेरा में दो प्रशिक्षित शिक्षकों की बहाली।
  • जोन केरकेट्टा और करिश्मा खेस्स को ग्रामीणों ने शिक्षक के रूप में चुना।
  • विद्यालय में लंबे समय से केवल एक पारा शिक्षक के भरोसे चल रही थी पढ़ाई।
  • मुखिया सुरजन बड़ाईक ने शिक्षा विभाग को कई बार कराया था अवगत।
  • अभिभावकों ने शिक्षकों को 100-200 रुपये प्रतिमाह सहयोग देने पर सहमति दी।
  • ग्रामीणों ने बच्चों के भविष्य को लेकर खुशी जाहिर की।

बोलबा प्रखंड के समसेरा पंचायत अंतर्गत रा.उ. मध्य विद्यालय समसेरा बखरी टोली में लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई थी। विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई संचालित होती है, लेकिन केवल एक पारा शिक्षक के भरोसे शिक्षा व्यवस्था चल रही थी। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और अभिभावकों में चिंता बढ़ती जा रही थी। आखिरकार मुखिया, ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन समिति के सामूहिक प्रयास से दो प्रशिक्षित शिक्षकों की बहाली कर विद्यालय को नई उम्मीद मिली है।

लंबे समय से बनी हुई थी शिक्षकों की समस्या

विद्यालय में सिर्फ एक पारा शिक्षक शिलानन्द कुल्लू के भरोसे पठन-पाठन चल रहा था। एक शिक्षक के लिए कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को संभालना बेहद कठिन हो रहा था। इससे बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा था।

अभिभावकों का कहना था कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। कई अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे विद्यालयों में भेजने पर विचार कर रहे थे।

विद्यालय में वर्तमान में लगभग 44 बच्चे-बच्चियां नामांकित हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से शिक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ रही थी।

मुखिया और ग्रामीणों ने उठाई जिम्मेदारी

समस्या को गंभीरता से लेते हुए पंचायत के मुखिया सुरजन बड़ाईक ने लगातार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। उन्होंने प्रखण्ड संसाधन केन्द्र बोलबा की शिक्षा कार्यक्रम पदाधिकारी श्रीमती निर्मला लिंडा तथा शिक्षा प्रसार पदाधिकारी अरूण कुमार पाण्डेय को विद्यालय की स्थिति से अवगत कराया।

इसके अलावा वरीय जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी आवेदन देकर विद्यालय में शिक्षकों की कमी की जानकारी दी गई थी। विद्यालय के पारा शिक्षक ने भी विभाग को आवेदन देकर समस्या बताई थी।

हालांकि ग्रामीणों के अनुसार विभाग की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

विभागीय व्यवस्था पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने बताया कि नजदीक के रा.प्रा. विद्यालय नकटीकच्छार में लंबे समय से बिना बच्चों के शिक्षिका संध्या रानी एक्का पदस्थापित थीं। लेकिन उनका डेपुटेशन पास के जरूरतमंद विद्यालय में करने के बजाय सिमडेगा के सुभाष चन्द्र बोस स्कूल में कर दिया गया।

इस निर्णय को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखी गई। लोगों का कहना था कि जहां शिक्षक की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वहां विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया गया।

ग्रामीणों ने कहा: “अगर समय पर शिक्षक उपलब्ध कराए जाते तो बच्चों की पढ़ाई इतनी प्रभावित नहीं होती।”

दो प्रशिक्षित शिक्षकों की हुई बहाली

विद्यालय की समस्याओं को देखते हुए आखिरकार मुखिया, विद्यालय प्रबंधन समिति और ग्रामीणों ने मिलकर स्वयं दो शिक्षकों की बहाली करने का निर्णय लिया।

इस दौरान जोन केरकेट्टा, पिता सिलास केरकेट्टा, योग्यता एम.ए. प्रशिक्षित तथा करिश्मा खेस्स, पिता जोहन खेस्स, योग्यता एम.ए. प्रशिक्षित को शिक्षक के रूप में बहाल किया गया।

दोनों अभ्यर्थी विद्यालय के पोषक क्षेत्र के ही रहने वाले हैं, जिससे ग्रामीणों में और अधिक विश्वास देखने को मिला। लोगों का कहना है कि स्थानीय शिक्षक बच्चों और गांव की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

अभिभावकों ने भी दिखाई सहभागिता

शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान अभिभावकों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा के लिए हर माह 100 से 200 रुपये तक सहयोग राशि देंगे ताकि शिक्षकों को पारिश्रमिक दिया जा सके।

मुखिया सुरजन बड़ाईक ने भी नवनियुक्त शिक्षकों को हर माह उचित आर्थिक सहयोग देने की बात कही।

यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के प्रति लोगों की गंभीरता और जागरूकता को दर्शाती है।

ग्रामीणों में दिखी खुशी

नवनियुक्त शिक्षकों का स्वागत विद्यालय परिसर में किया गया। मुखिया और विद्यालय के शिक्षक द्वारा दोनों शिक्षकों को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

इस अवसर पर ग्रामीणों के चेहरे पर बच्चों की शिक्षा को लेकर खुशी साफ दिखाई दी। लोगों ने उम्मीद जताई कि अब विद्यालय में नियमित और बेहतर पठन-पाठन हो सकेगा।

कार्यक्रम में राजा साहेब विजय प्रताप सिंह, फाल्गुन नायक, वार्ड सदस्य अनिता कुमारी, विद्यालय प्रबंधन समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: शिक्षा के लिए ग्रामीणों की यह पहल बनी मिसाल

समसेरा गांव की यह पहल दिखाती है कि जब व्यवस्था कमजोर पड़ती है तो समाज खुद आगे बढ़कर बदलाव की राह तैयार कर सकता है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने अपने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए जिस तरह शिक्षकों की व्यवस्था की, वह सराहनीय है। हालांकि यह भी जरूरी है कि शिक्षा विभाग ऐसे मामलों को गंभीरता से ले और सरकारी विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए। ग्रामीणों का यह प्रयास शिक्षा के प्रति जागरूकता और सामाजिक एकजुटता का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आया है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बच्चों की शिक्षा के लिए समाज की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत

शिक्षा ही वह आधार है जो किसी भी समाज और आने वाली पीढ़ी का भविष्य तय करती है। जब गांव के लोग मिलकर बच्चों की पढ़ाई के लिए जिम्मेदारी उठाते हैं, तब बदलाव की नई शुरुआत होती है। हर अभिभावक और नागरिक को अपने आसपास के विद्यालयों की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। बच्चों का उज्ज्वल भविष्य पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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Written by

सिमडेगा नगर क्षेत्र

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