
#सदरपंचायत #क्षेत्रभ्रमण : गांव-गांव जाकर प्रखंड प्रमुख ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, समाधान का दिया भरोसा।
सदर पंचायत अंतर्गत विभिन्न गांवों के क्षेत्र भ्रमण के दौरान प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज ग्रामीणों से मिले और उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने खराब सड़क, टूटे पुलिया और जल मीनार जैसी बुनियादी समस्याओं को प्रमुख के समक्ष रखा। प्रखंड प्रमुख ने सभी मुद्दों के समाधान का आश्वासन देते हुए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की बात कही। यह भ्रमण ग्रामीण विकास और जमीनी हकीकत को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- 17 जनवरी 2026, शनिवार को प्रखंड प्रमुख ने किया क्षेत्र भ्रमण।
- कुसुमबेड़ा बैरटोली, नवा टोली, सरइ पहार गांवों का दौरा।
- कच्ची सड़क, जल मीनार और पुलिया की स्थिति पर जताई चिंता।
- बरसात में क्षेत्र के टापू बनने की समस्या ग्रामीणों ने रखी।
- बीमारी व आपात स्थिति में वाहन आवागमन बाधित होने की शिकायत।
- गरीबों के लिए कंबल वितरण की मांग, प्रमुख ने दिया भरोसा।
दिनांक 17 जनवरी 2026, शनिवार को प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज ने सदर पंचायत अंतर्गत कुसुमबेड़ा बैरटोली, नवा टोली और सरइ पहार गांवों का क्षेत्र भ्रमण किया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी बुनियादी समस्याओं को खुलकर प्रखंड प्रमुख के समक्ष रखा। भ्रमण का उद्देश्य गांवों की वास्तविक स्थिति को समझना और विकास से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना रहा।
कुसुमबेड़ा बैरटोली मार्ग की बदहाल स्थिति
ग्रामीणों ने बताया कि कुसुमबेड़ा बैरटोली जाने वाली कच्ची सड़क की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण आवागमन में भारी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में यह मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन लगभग ठप हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस सड़क की मरम्मत नहीं हुई है, जिसके कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
वर्षों से टूटी पड़ी पुलिया बनी बड़ी समस्या
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कुसुमबेड़ा बैरटोली मार्ग पर बनी पुलिया बीते कई वर्षों से टूटी पड़ी है। इस पर आज तक किसी भी स्तर से ठोस ध्यान नहीं दिया गया। बरसात के मौसम में इस पुलिया के कारण पूरा क्षेत्र टापू बन जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, चार पहिया और तीन पहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। सबसे गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब बीमारी, दुर्घटना या मरि-मरखी जैसी आपात स्थितियों में किसी वाहन का गांव तक पहुंचना संभव नहीं हो पाता।
जल मीनार खराब, पेयजल संकट गहराया
क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने खराब जल मीनार की समस्या भी प्रमुखता से उठाई। ग्रामीणों ने बताया कि जल मीनार लंबे समय से खराब पड़ी है, जिसके कारण शुद्ध पेयजल की भारी किल्लत बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जल मीनार की मरम्मत नहीं होने से उन्हें दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ता है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
प्रखंड प्रमुख ने दिया समाधान का भरोसा
ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज ने उन्हें आश्वस्त किया कि सभी मुद्दों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़क, पुलिया और जल मीनार जैसी बुनियादी सुविधाएं ग्रामीण जीवन की रीढ़ हैं और इनमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रखंड प्रमुख ने विशेष रूप से यह भरोसा दिलाया कि टूटी पुलिया का निर्माण जल्द से जल्द कराया जाएगा, ताकि बरसात के मौसम में ग्रामीणों को परेशानी न हो।
गरीब असहायों के लिए कंबल वितरण की मांग
क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने गरीब और असहाय परिवारों के लिए कंबल वितरण की भी मांग रखी। इस पर प्रखंड प्रमुख ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जल्द ही जरूरतमंद लोगों के बीच कंबल का वितरण किया जाएगा, ताकि ठंड के मौसम में उन्हें राहत मिल सके।
ग्रामीणों में जगी उम्मीद
प्रखंड प्रमुख के सीधे गांव पहुंचने और समस्याएं सुनने से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय बाद किसी जनप्रतिनिधि ने जमीनी स्तर पर आकर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना है।
न्यूज़ देखो: जमीनी संवाद से ही मजबूत होगा ग्रामीण विकास
क्षेत्र भ्रमण के दौरान उठी समस्याएं यह दर्शाती हैं कि बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी ग्रामीण इलाकों की सबसे बड़ी चुनौती है। प्रखंड प्रमुख द्वारा समाधान का आश्वासन सकारात्मक कदम है, लेकिन अब इसकी समयबद्ध क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है। सड़क, पुलिया और पेयजल जैसी समस्याओं का समाधान होने से ही ग्रामीण जीवन में वास्तविक बदलाव आएगा। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे वादों को धरातल पर उतारें।
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संवाद से समाधान की ओर बढ़ता कदम
जब जनप्रतिनिधि गांव तक पहुंचते हैं, तभी असली समस्याएं सामने आती हैं।
ग्रामीणों की आवाज़ को सुनना और उस पर कार्रवाई करना ही सच्चा जनसेवा है।





