#बरवाडीह #निर्माण_घोटाला : निरीक्षण में गुणवत्ता पर सवाल—बीडीओ ने तत्काल रुकवाया कार्य।
लातेहार के बरवाडीह स्थित परियोजना बालिका विद्यालय निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। निरीक्षण के दौरान घटिया सरिया के उपयोग और कनीय अभियंता की अनुपस्थिति में ढलाई होते पाई गई। सूचना मिलने पर बीडीओ रेशमा रेखा मिंज ने काम रुकवाया। विभिन्न कंपनियों के नाम को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिससे पूरे मामले पर संदेह गहरा गया है।
- परियोजना बालिका विद्यालय निर्माण में मिली गंभीर गड़बड़ी।
- ढलाई में घटिया सरिया उपयोग का आरोप।
- मौके पर कनीय अभियंता अनुपस्थित, बिना निगरानी काम।
- बीडीओ रेशमा रेखा मिंज ने तुरंत रुकवाया निर्माण।
- जिंदल, टाटा, रूंगटा नामों को लेकर भ्रम की स्थिति।
- स्थल पर शिलापट्ट नहीं मिला, पारदर्शिता पर सवाल।
बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय स्थित परियोजना बालिका विद्यालय के निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह मामला तब उजागर हुआ जब जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निरीक्षण में सामने आई बड़ी लापरवाही
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि विद्यालय भवन की छत की ढलाई का कार्य जारी था, लेकिन मौके पर विभाग के कनीय अभियंता मौजूद नहीं थे। बिना तकनीकी निगरानी के इस तरह का निर्माण कार्य किया जाना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
इतना ही नहीं, ढलाई में उपयोग किए जा रहे सरिया की गुणवत्ता भी संदिग्ध पाई गई। स्थानीय प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि निम्न स्तर के छड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो भविष्य में भवन की मजबूती को प्रभावित कर सकता है।
बीडीओ ने तुरंत रुकवाया कार्य
विद्यालय प्रबंधन समिति और प्रधानाध्यापक ने स्थिति को गंभीर मानते हुए इसकी सूचना प्रखंड विकास पदाधिकारी रेशमा रेखा मिंज को दी। सूचना मिलते ही बीडीओ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए निर्देश दिया कि जब तक कनीय अभियंता मौके पर नहीं पहुंचते, तब तक ढलाई कार्य रोक दिया जाए।
इस आदेश के बाद निर्माण कार्य कुछ समय के लिए बाधित रहा, जिससे प्रशासन की तत्परता भी सामने आई।
सरिया कंपनियों के नाम पर बड़ा झोल
मामले को और गंभीर तब बना जब कनीय अभियंता ऋषिकांत सिंह मौके पर पहुंचे और सरिया की गुणवत्ता को लेकर स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ दिखे।
कनीय अभियंता ऋषिकांत सिंह ने कहा: “यहां जिंदल कंपनी का सरिया उपयोग हो रहा है।”
हालांकि, कुछ ही देर बाद उन्होंने रूंगटा और टाटा कंपनी के नाम भी गिना दिए, जिससे भ्रम की स्थिति और बढ़ गई।
इस पर मौजूद जिला परिषद सदस्य ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा:
“मौके पर एक भी सरिया पर जिंदल कंपनी का नाम नहीं दिख रहा है, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।”
संवेदकों के अलग-अलग दावे
मामले में सांसद प्रतिनिधि दीपक राज ने भी हस्तक्षेप करते हुए संवेदकों से दूरभाष पर बात की। इसमें एक संवेदक ने टाटा कंपनी का सरिया बताया, जबकि दूसरे ने रूंगटा कंपनी का नाम लिया।
इस तरह के अलग-अलग बयानों ने पूरे निर्माण कार्य को संदेह के घेरे में ला दिया है और संभावित गड़बड़ी की आशंका को मजबूत किया है।
शिलापट्ट नहीं होने से बढ़ा संदेह
निर्माण स्थल पर शिलापट्ट का नहीं होना भी एक बड़ी अनियमितता के रूप में सामने आया। शिलापट्ट में योजना की लागत, मजदूरी दर और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होती है, जो पारदर्शिता के लिए अनिवार्य है।
जब इस बारे में पूछा गया, तो कनीय अभियंता ने बताया कि शिलापट्ट कमरे में रखा हुआ है और बाद में दिखाया जाएगा, जो जवाब संतोषजनक नहीं माना गया।
उच्च स्तर तक पहुंचेगा मामला
सांसद प्रतिनिधि दीपक राज ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इसकी जानकारी सांसद को दी जाएगी और इसे दिशा की बैठक में उठाया जाएगा।
दीपक राज ने कहा: “निर्माण कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है, इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाएं सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती हैं और इससे आम जनता में असंतोष बढ़ता है।
जनता में बढ़ रही नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर निर्माण कार्य में शुरुआत से ही गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जाएगा, तो भविष्य में इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और निर्माण कार्य को गुणवत्ता मानकों के अनुसार दोबारा कराया जाए।

न्यूज़ देखो: विकास कार्य या लापरवाही का खेल?
बरवाडीह का यह मामला बताता है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अब भी पारदर्शिता की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। बिना निगरानी और अस्पष्ट सामग्री के साथ निर्माण कार्य होना सीधे तौर पर सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल एक भवन नहीं बल्कि विश्वास की नींव भी कमजोर कर सकता है। क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक बनें, तभी सुधरेगी व्यवस्था
जब हम अपने आसपास हो रहे कार्यों पर नजर रखते हैं, तभी गड़बड़ियां सामने आती हैं।
जरूरी है कि हर नागरिक अपने अधिकार और कर्तव्यों को समझे।
विकास तभी सार्थक होगा, जब उसमें पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों हों।
आइए, हम सब मिलकर जिम्मेदार समाज का निर्माण करें।
अगर आपके क्षेत्र में भी ऐसी कोई अनियमितता दिखे, तो आवाज उठाएं। इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, अपनी राय कमेंट में दें और जागरूकता फैलाने में अपना योगदान दें।

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