#बरवाडीह #पेयजल_संकट : छह महीने बाद जलमीनार चालू—कोरवा परिवारों को मिली बड़ी राहत।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के पुटुआगढ़ गांव में छह माह से जारी पेयजल संकट का समाधान हो गया है। खराब जलमीनार को दुरुस्त कर पुनः चालू कर दिया गया, जिससे कोरवा आदिम जनजाति परिवारों को राहत मिली। जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर की पहल पर पीएचईडी विभाग ने मरम्मत कार्य कराया। अब ग्रामीणों को आसानी से स्वच्छ पानी उपलब्ध हो रहा है।
- पुटुआगढ़ गांव में 6 माह से बंद जलमीनार अब चालू।
- कोरवा आदिम जनजाति परिवारों को पेयजल संकट से राहत।
- संतोषी शेखर की पहल पर शुरू हुई मरम्मत प्रक्रिया।
- पीएचईडी विभाग ने निजी खर्च पर मशीनरी ठीक करवाई।
- 19 अप्रैल से पुनः शुरू हुई जल आपूर्ति व्यवस्था।
बरवाडीह प्रखंड के छेचा पंचायत अंतर्गत पुटुआगढ़ गांव में लंबे समय से पेयजल संकट झेल रहे ग्रामीणों को आखिरकार राहत मिल गई है। करीब छह महीने से खराब पड़े जलमीनार को दुरुस्त कर फिर से चालू कर दिया गया है। इससे विशेष रूप से कोरवा आदिम जनजाति परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो अब तक पानी के लिए दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर थे।
छह माह से बंद था जलमीनार
ग्रामीणों के अनुसार, गांव का जलमीनार पिछले छह महीनों से मशीनरी खराबी के कारण बंद पड़ा था। इस वजह से लोगों को नदी और दूर स्थित कुओं से पानी लाना पड़ रहा था। गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो गई थी।
7 अप्रैल को गांव के दौरे के दौरान जितेंद्र कोरवा, दिनु कोरवा, अनिल कोरवा, बीरेंद्र कोरवा और अर्जुन कोरवा समेत अन्य ग्रामीणों ने अपनी समस्या जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर के सामने रखी। उन्होंने बताया कि जलमीनार बंद होने से दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
पहल के बाद शुरू हुआ समाधान
ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए संतोषी शेखर ने तत्काल पीएचईडी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलमीनार को जल्द से जल्द ठीक कराया जाए। इसके बाद कनीय अभियंता पियूष रंजन ने मिस्त्री टीम भेजकर जांच करवाई।
जांच में पाया गया कि जलमीनार की मेंटेनेंस अवधि समाप्त हो चुकी है और मशीनरी में तकनीकी खराबी है, जिसे ठीक किए बिना जल आपूर्ति संभव नहीं है।
निजी खर्च से हुई मरम्मत
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निजी खर्च पर मशीनरी की मरम्मत कराने का निर्णय लिया। पवन सिंह के नेतृत्व में मिस्त्री टीम ने 19 अप्रैल को जलमीनार की मरम्मत पूरी की और पानी की आपूर्ति पुनः शुरू कर दी।
संतोषी शेखर ने कहा: “आदिम जनजाति परिवारों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों, इसके लिए स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जाएगा।”
अब नहीं भटकना पड़ेगा पानी के लिए
जलमीनार चालू होने के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। अब उन्हें पानी के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और दैनिक जीवन सुचारु रूप से चल सकेगा। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पानी लाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती थी।
स्थायी समाधान की तैयारी
संतोषी शेखर ने बताया कि भविष्य में पेयजल संकट से स्थायी समाधान के लिए गांव में जल्द ही बोरिंग कराने की पहल की जाएगी। इससे ग्रामीणों को लगातार और भरोसेमंद जल स्रोत उपलब्ध हो सकेगा।
न्यूज़ देखो: समय पर पहल से बदली तस्वीर
यह खबर दिखाती है कि यदि जनप्रतिनिधि और प्रशासन संवेदनशीलता के साथ काम करें, तो छोटी-सी पहल भी बड़ी राहत दे सकती है। छह महीने से परेशान आदिम जनजाति परिवारों को आखिरकार पानी मिला, लेकिन सवाल यह भी है कि इतनी देर क्यों हुई? भविष्य में ऐसी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मजबूत तंत्र विकसित करना जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जल है जीवन, जिम्मेदारी भी हमारी
पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझना जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष जारी है।
हमें मिलकर ऐसी समस्याओं को उठाना और समाधान तक पहुंचाना होगा।
यदि आपके आसपास भी ऐसी कोई समस्या है, तो आवाज उठाएं और जागरूक बनें।
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