ओडिहा और तीसीबार पंचायत में शोक की लहर: नहीं रहे समाजसेवी त्रिपुरारी पांडेय

ओडिहा और तीसीबार पंचायत में शोक की लहर: नहीं रहे समाजसेवी त्रिपुरारी पांडेय

author Tirthraj Dubey
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#पलामू #शोक_समाचार : सादगी और सेवा की मिसाल बने रहे जीवनभर
  • ओडिहा गांव के वरिष्ठ नागरिक त्रिपुरारी पांडेय (65 वर्ष) का हुआ निधन।
  • वे आचार्य सुरेंद्र पांडेय के पिता और समाज के मार्गदर्शक थे।
  • लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे, निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर।
  • पोस्ट ऑफिस में दी सेवा, सादगी और ईमानदारी के लिए जाने जाते थे।
  • अंतिम संस्कार वाराणसी (बनारस) में किया जाएगा।

पलामू जिले के पाण्डु प्रखण्ड के ओडिहा गांव में शोक की गहरी लहर फैल गई जब यह खबर आई कि गांव के वरिष्ठ नागरिक त्रिपुरारी पांडेय (65 वर्ष) का निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही ओडिहा, तीसीबार पंचायत, कला और आसपास के इलाकों में शोक की छाया गहरा गई।

सादगी और सेवा का पर्याय थे त्रिपुरारी पांडेय

त्रिपुरारी पांडेय जी का जीवन समाज सेवा, सादगी और ईमानदारी की एक मिसाल रहा। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय तीसीबार पंचायत कला स्थित पोस्ट ऑफिस में सेवा देते हुए बिताया। अपनी निष्ठा और ईमानदारी से उन्होंने न केवल विभाग का नाम रोशन किया, बल्कि क्षेत्र के हर व्यक्ति के दिल में स्थान बनाया।
उन्हें लोग विश्वास, निष्ठा और विनम्रता के प्रतीक के रूप में जानते थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने कई जरूरतमंद परिवारों की मदद की और हमेशा लोगों के बीच भाईचारे की भावना को मजबूत किया।

परिवार और समाज में गहरा सम्मान

त्रिपुरारी पांडेय जी आचार्य सुरेंद्र पांडेय के पिता थे, जो स्वयं शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में एक जानी-मानी पहचान रखते हैं। पिता-पुत्र दोनों ने अपने कर्म और आचरण से समाज में आदर्श प्रस्तुत किया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पांडेय जी का स्वभाव अत्यंत सौम्य और विचार गहरे थे। वे हमेशा मुस्कुराकर मिलते और हर किसी की समस्या को अपनी समझकर समाधान में सहयोग देते थे।

एक ग्रामीण ने भावुक होकर कहा: “पांडेय जी का जाना एक युग का अंत है। वे सच्चे अर्थों में इंसानियत के प्रतीक थे। भगवान को यही मंजूर था, वरना ऐसे लोग आज बहुत कम मिलते हैं।”

क्षेत्र में गम का माहौल

ओडिहा और तीसीबार पंचायत में सुबह से ही गम का माहौल व्याप्त है। लोग घरों से निकलकर पांडेय जी के आवास पहुंच रहे हैं। अंतिम दर्शन के लिए दूर-दराज़ के गांवों से भी लोग उमड़ पड़े हैं। हर किसी की आंखें नम हैं और वातावरण गमगीन है।
उनके निधन से न केवल परिवार, बल्कि पूरा समाज अपने मार्गदर्शक को खो देने का दर्द महसूस कर रहा है।

अंतिम संस्कार वाराणसी में

मिली जानकारी के अनुसार, दिवंगत त्रिपुरारी पांडेय जी का अंतिम संस्कार वाराणसी (बनारस) में किया जाएगा। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है।
सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को शांति और परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करें।

न्यूज़ देखो: सादगी और सेवा की मिसाल रहे त्रिपुरारी पांडेय जी

त्रिपुरारी पांडेय जी का जीवन यह सिखाता है कि सच्चा सम्मान पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि कर्म और सादगी से मिलता है।
उन्होंने अपने व्यवहार से यह दिखाया कि समाज की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
ऐसे व्यक्तित्व समाज में विरले ही जन्म लेते हैं, जो अपने जीवन से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सादगी से भरा जीवन सेवा से भरा सफर

त्रिपुरारी पांडेय जी की स्मृति हमेशा प्रेरणा देगी कि सच्चे कर्म और निस्वार्थ सेवा ही इंसान को अमर बनाते हैं।
आइए, उनके आदर्शों को आगे बढ़ाएं और समाज में सद्भाव, सहयोग और इंसानियत की भावना को जीवित रखें।
अपनी संवेदनाएँ कमेंट करें, यह खबर साझा करें, और ऐसे व्यक्तित्वों की स्मृति को दिलों में बसाए रखें क्योंकि ऐसे लोग भले चले जाएं, उनकी पहचान अमर रहती है।

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Written by

पांडु, पलामू

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