#खूंटी #कृषि_प्रशिक्षण : वैज्ञानिक तकनीकों से किसानों की आय बढ़ाने पर दिया गया जोर।
खूंटी जिले के कर्रा और खूंटी प्रखंड के चयनित किसानों एवं महिला कृषकों को कृषि विज्ञान केंद्र, खूंटी में वैज्ञानिक कृषि प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में आधुनिक खेती, मिट्टी संरक्षण, जैविक कृषि और आम की फल मक्खी प्रबंधन तकनीकों की जानकारी साझा की गई। डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस पहल का उद्देश्य किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर उनकी आय और उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।
- कर्रा एवं खूंटी प्रखंड के किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
- आम की फसल को नुकसान पहुंचाने वाली फल मक्खी के नियंत्रण की आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
- डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन की पहल पर किसानों को व्यावहारिक कृषि ज्ञान उपलब्ध कराया गया।
- मिट्टी परीक्षण, जैविक खेती और जल संरक्षण के महत्व पर विशेष जानकारी दी गई।
- किसानों को फेरोमोन ट्रैप एवं पर्यावरण-अनुकूल कीट प्रबंधन तकनीकों से परिचित कराया गया।
- महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया।
खूंटी जिले में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), खूंटी में विशेष वैज्ञानिक कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कर्रा एवं खूंटी प्रखंड के चयनित प्रगतिशील किसानों और महिला कृषकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती, मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन, बागवानी विकास तथा कीट नियंत्रण की वैज्ञानिक पद्धतियों से अवगत कराना था ताकि कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके।
खेत बचाओ अभियान के तहत दी गई वैज्ञानिक जानकारी
कार्यक्रम के पहले चरण में किसानों ने “खेत बचाओ अभियान – स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध किसान, समृद्ध भारत” विषयक प्रशिक्षण में भाग लिया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के महत्व और उसके आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना कृषि उत्पादन की बुनियाद है। यदि किसान मृदा परीक्षण के अनुसार पोषक तत्वों का उपयोग करें तो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत भी कम की जा सकती है। प्रशिक्षण में जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, फसल चक्र, जल संरक्षण और सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।
जल संरक्षण और टिकाऊ खेती पर जोर
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि बदलते जलवायु परिदृश्य में जल संरक्षण कृषि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। उन्होंने कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। किसानों को यह भी समझाया गया कि जैविक और प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आम की फल मक्खी नियंत्रण की आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन
प्रशिक्षण के दूसरे चरण में “अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन – आम के फल मक्खी की बायो-रेशनल प्रबंधन पद्धति” विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को आम की फसल में होने वाले प्रमुख कीटों, विशेषकर फल मक्खी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि फल मक्खी आम उत्पादन को गंभीर नुकसान पहुंचाती है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होती है। इसके नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाना आवश्यक है।
फेरोमोन ट्रैप का कराया गया प्रदर्शन
किसानों को फेरोमोन ट्रैप और विशेष आकर्षक ट्रैप के उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से कीटों की संख्या नियंत्रित की जा सकती है और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को अपने बागानों में इन तकनीकों को लागू करने के लिए आवश्यक सामग्री और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया गया। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने और लागत कम करने में सहायता मिलेगी।
बागवानी और मूल्य संवर्धन की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में केवल कीट नियंत्रण तक ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों को बागवानी प्रबंधन, रोग नियंत्रण, फसल कटाई के बाद संरक्षण तथा मूल्य संवर्धन की तकनीकों की भी जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसान उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और विपणन की आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तो उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है। इससे कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
कार्यक्रम में डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन के संस्थापक जितेंद्र कुमार वर्मा और राज्य समन्वयक प्रियंका कुमारी भी उपस्थित रहीं। उन्होंने किसानों और महिला कृषकों का उत्साहवर्धन करते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील की।
जितेंद्र कुमार वर्मा ने कहा: “आज के दौर में कृषि को लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग अनिवार्य हो गया है। किसान यदि मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और पर्यावरण-अनुकूल कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाते हैं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।”
उन्होंने कहा कि संस्था किसानों को केवल जागरूक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है।
महिला कृषकों की भागीदारी रही विशेष
कार्यक्रम में महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। विशेषज्ञों ने बताया कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बना सकता है।
महिला प्रतिभागियों ने भी प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें खेती को वैज्ञानिक तरीके से करने की नई जानकारी मिली है, जिसका लाभ वे अपने खेतों और बागानों में उठा सकेंगी।

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खूंटी में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिखाता है कि यदि किसानों को सही समय पर वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण मिले तो कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। मिट्टी संरक्षण, जैविक खेती और पर्यावरण-अनुकूल कीट प्रबंधन जैसी पहलें भविष्य की टिकाऊ कृषि का आधार बन सकती हैं। ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशिक्षण के बाद किसान इन तकनीकों को अपने खेतों में किस स्तर तक अपनाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
वैज्ञानिक खेती अपनाएं, समृद्ध भविष्य बनाएं
खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और नवाचार का संगम बन चुकी है।
नई तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
मिट्टी, पानी और पर्यावरण की सुरक्षा ही आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि का आधार है।
यदि किसान सीखने और बदलाव के लिए तैयार रहें तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई मिल सकती है।
अपने गांव और क्षेत्र के किसानों तक यह जानकारी पहुंचाएं।
कमेंट कर बताएं कि आपके क्षेत्र में कौन सी कृषि चुनौतियां सबसे बड़ी हैं।
इस खबर को साझा करें और वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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