#डुमरी #हत्याकांड : अंधविश्वास के चलते महिला की हत्या, पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा।
डुमरी थाना क्षेत्र के इरावल गांव में महिला हत्या मामले का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि काला जादू के शक और अंधविश्वास के कारण चाचा-भतीजे ने मिलकर सुकन्ती देवी की हत्या की थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिया है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
- इरावल गांव में महिला हत्या मामले का पुलिस ने किया खुलासा।
- अनूप कुजूर और अभिषेक कुजूर को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल।
- अंधविश्वास और काला जादू के शक में रची गई थी हत्या की साजिश।
- अंतिम संस्कार में बुलाने के बहाने महिला को सुनसान बगीचे में ले जाया गया।
- पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया।
- डुमरी थाना प्रभारी शशि प्रकाश के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मामले का उद्भेदन किया।
डुमरी थाना क्षेत्र के ग्राम इरावल में हुई सुकन्ती देवी हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। इस सनसनीखेज मामले में जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि अंधविश्वास और काला जादू के शक में महिला की हत्या की गई थी। पुलिस ने मामले में चाचा-भतीजा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस घटना ने एक बार फिर समाज में व्याप्त अंधविश्वास की भयावह तस्वीर को सामने ला दिया है।
पति की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मृतका सुकन्ती देवी के पति जगमोहन नगेशिया ने डुमरी थाना में आवेदन देकर पत्नी की हत्या की सूचना दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वादी और गवाहों के बयान दर्ज कर जांच प्रारंभ की।
जांच के दौरान पुलिस का संदेह ग्राम इरावल निवासी अनूप कुजूर पर गया। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। साथ ही उसने अपने भतीजे अभिषेक कुजूर की संलिप्तता का भी खुलासा किया।
अंधविश्वास बना हत्या की वजह
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अनूप कुजूर के पिता की मृत्यु वर्ष 2020 में हुई थी, जबकि उसके भाई अमृत कुजूर की मृत्यु 7 जून 2026 को हुई थी। अनूप को यह शक था कि सुकन्ती देवी ने कथित रूप से काला जादू कर उसके पिता और भाई की मौत कराई है।
इसी अंधविश्वास के कारण उसने अपने भतीजे अभिषेक कुजूर के साथ मिलकर सुकन्ती देवी की हत्या की साजिश रची। पुलिस के अनुसार, यह पूरी वारदात पूर्व नियोजित थी।
अंतिम संस्कार में शामिल होने के बहाने बुलाकर की हत्या
बताया गया कि अमृत कुजूर के अंतिम संस्कार से पहले दोनों आरोपियों ने सुकन्ती देवी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के बहाने घर से बुलाया। इसके बाद उसे गांव के समीप स्थित एक सुनसान बगीचे में ले जाया गया।
वहां आम के पेड़ के पास चैन से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद दोनों आरोपियों ने शव को आम के पेड़ के नीचे छोड़ दिया और मौके से फरार हो गए।
गुप्त सूचना से खुली हत्या की गुत्थी
इस हत्याकांड का खुलासा तब हुआ जब हत्या की योजना की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस को गुप्त सूचना दी। सूचना के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में दोनों ने अपना-अपना अपराध स्वीकार किया तथा उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिया गया।
डुमरी पुलिस ने बताया:
“पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिया गया है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।”
पुलिस टीम की सूझबूझ से सुलझा मामला
इस चर्चित हत्याकांड के उद्भेदन में डुमरी थाना प्रभारी शशि प्रकाश के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस टीम ने तत्परता और सूझबूझ का परिचय देते हुए इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाकर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
छापेमारी दल में शामिल रहे अधिकारी और जवान
मामले के उद्भेदन में गठित छापेमारी दल में—
- एसआई मनोज कुमार
- एसआई अंकित राज
- एसआई विजय सिंह सुंडी
- डुमरी थाना के सशस्त्र बल के जवान
शामिल रहे। सभी ने समन्वित कार्रवाई करते हुए मामले के सफल खुलासे में अहम भूमिका निभाई।
न्यूज़ देखो: अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
इरावल की यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि समाज में गहरे तक फैले अंधविश्वास की भयावह सच्चाई को उजागर करती है। वैज्ञानिक सोच और आधुनिक युग में भी काला जादू जैसे भ्रमों के आधार पर किसी की जान ले लेना चिंता का विषय है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाया है, लेकिन समाज में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है। शिक्षा, संवाद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से ही ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अंधविश्वास नहीं, जागरूकता और इंसानियत को दें बढ़ावा
डर और भ्रम अक्सर गलत फैसलों को जन्म देते हैं, जबकि शिक्षा और समझदारी समाज को मजबूत बनाती है। किसी भी बीमारी, मृत्यु या संकट का समाधान हिंसा नहीं, बल्कि कानून, चिकित्सा और विवेकपूर्ण सोच में निहित है।
आइए, अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाने का संकल्प लें और तर्क तथा मानवता को अपने जीवन का आधार बनाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और जिम्मेदार समाज निर्माण की इस मुहिम में सहभागी बनें।

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