#सिमडेगा #घोष_प्रशिक्षण : सलडेगा में प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का भव्य समापन हुआ।
सिमडेगा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में आयोजित प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का बुधवार को भव्य समापन हुआ। वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, घोष प्रदर्शन और प्रेरक संबोधनों ने विशेष आकर्षण बिखेरा। प्रशिक्षण वर्ग में शामिल प्रतिभागियों ने अनुशासन, नेतृत्व और संगठनात्मक कौशल का प्रदर्शन किया। समारोह ने राष्ट्रभावना, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण के संदेश को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।
- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का गरिमामय समापन हुआ।
- दीपक कुमार अग्रवाल और सुभाष चंद्र दुबे की उपस्थिति में समापन समारोह आयोजित किया गया।
- प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अनुभव साझा कर प्रशिक्षण की उपयोगिता बताई।
- उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले भैया-बहनों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया गया।
- घोष प्रशिक्षण को अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण का प्रभावी माध्यम बताया गया।
- विभिन्न विद्यालयों के आचार्य, प्रधानाचार्य, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।
सिमडेगा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में आयोजित प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का समापन समारोह उत्साह, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग ने प्रतिभागियों को घोष कला के साथ-साथ संगठन, नेतृत्व और संस्कारों का प्रशिक्षण प्रदान किया। समापन समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, सम्मान समारोह और प्रेरक उद्बोधनों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ समारोह का शुभारंभ
समापन कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत माता, ओउम तथा सरस्वती माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुई। इस अवसर पर पूरा परिसर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति के वातावरण से सराबोर दिखाई दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात समाजसेवी एवं सिमडेगा नगर परिषद के उपाध्यक्ष दीपक कुमार अग्रवाल थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड के प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दुबे उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत एवं परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने कराया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह का सबसे आकर्षक पक्ष विद्यालय की बहनों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। हिंदी, नागपुरी और तेलुगू गीतों पर आधारित नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और राष्ट्रभक्ति की झलक प्रस्तुत करती इन प्रस्तुतियों को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के दौरान सभागार कई बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण का भी माध्यम है।
प्रतिभागियों ने साझा किए अनुभव
प्रशिक्षण वर्ग में शामिल विभिन्न विद्यालयों के भैया-बहनों एवं आचार्य-आचार्याओं ने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने बताया कि घोष प्रशिक्षण के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास, समयबद्धता, नेतृत्व क्षमता और सामूहिक कार्य करने की भावना विकसित हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान मिले अनुभव उनके जीवन में लंबे समय तक उपयोगी सिद्ध होंगे। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं भी दी गईं।
व्यक्तित्व निर्माण का प्रभावी माध्यम है घोष
अपने संबोधन में प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दुबे ने कहा:
सुभाष चंद्र दुबे ने कहा: “व्यक्तित्ववान मनुष्य के निर्माण से ही सशक्त और गौरवशाली भारत का निर्माण संभव है। घोष वर्ग केवल वाद्य प्रशिक्षण नहीं, बल्कि आनंदमय जीवन, अनुशासन, संगठन और संस्कारों के विकास का प्रभावी माध्यम है।”
उन्होंने प्रशिक्षण वर्ग की विभिन्न गतिविधियों और उसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एकता और संगठन का संदेश देती है घोष
मुख्य अतिथि दीपक कुमार अग्रवाल ने अपने संबोधन में घोष प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:
दीपक कुमार अग्रवाल ने कहा: “घोष हमें एक साथ चलना, एक साथ सोचना और एक ही सुर में समाज तथा राष्ट्र के लिए कार्य करना सिखाती है। यह व्यक्ति को एकता के सूत्र में पिरोने का सशक्त माध्यम है।”
उन्होंने आगे कहा कि सिमडेगा की भूमि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा ऐसी पावन धरती पर प्रशिक्षण प्राप्त करना प्रतिभागियों के लिए गौरव की बात है।
आयोजन में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
समारोह के अंत में संकुल प्रमुख संतोष दास ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए प्रशिक्षण वर्ग के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के आचार्य आशीष बड़ाईक ने किया।
समापन समारोह में मुख्य रूप से दीपक अग्रवाल, सुभाष चंद्र दुबे, घोष प्रशिक्षक नंदलाल षाड़गी, सूरज, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हनुमान बोंदिया, सचिव चंदेश्वर मुण्डा, सहसचिव रामकृष्ण महतो, सदस्य मुरारी प्रसाद, अनिरुद्ध सिंह, विभिन्न विद्यालयों के आचार्य, प्रधानाचार्य तथा बड़ी संख्या में भैया-बहन उपस्थित रहे।
न्यूज़ देखो: संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभावना का सशक्त संगम
सलडेगा में आयोजित प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्रभावना को मजबूत करने का अभियान साबित हुआ। ऐसे आयोजन युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति से जुड़े कार्यक्रम समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। भविष्य में ऐसे प्रयासों का विस्तार किस प्रकार किया जाएगा, इस पर भी सबकी नजर रहेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
युवा शक्ति के संस्कार ही राष्ट्र का भविष्य तय करते हैं
जब युवा अनुशासन, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से जुड़ते हैं तो समाज की दिशा बदलती है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नई पीढ़ी को केवल कौशल नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और नेतृत्व का भी पाठ पढ़ाते हैं।
अपने आसपास होने वाले सकारात्मक प्रयासों को पहचानें और उनका हिस्सा बनें। बच्चों और युवाओं को संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएं।
अगर आपको लगता है कि ऐसे आयोजन समाज के लिए प्रेरणादायक हैं, तो अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और सकारात्मक पहल को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।

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