#सिमडेगा #विद्युत_परियोजना : संचरण लाइन निर्माण से क्षेत्र की बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत।
सिमडेगा में जिला स्तरीय वनाधिकार समिति की बैठक में 132 केवी द्विपथ कोलेबिरा-कामडारा संचरण लाइन परियोजना को स्वीकृति दी गई। परियोजना के लिए संरक्षित वन भूमि पर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना पूरी होने से क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था अधिक सुदृढ़ और बेहतर होगी।
- उपायुक्त कंचन सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय वनाधिकार समिति की बैठक आयोजित।
- 132 केवी कोलेबिरा-कामडारा संचरण लाइन परियोजना को समिति की स्वीकृति मिली।
- परियोजना के लिए 3.3587 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि चिन्हित की गई।
- ग्राम सभाओं द्वारा अनापत्ति प्रस्ताव और दस्तावेज समिति को सौंपे गए।
- समिति ने सर्वसम्मति से FRA प्रमाण पत्र जारी करने का निर्णय लिया।
- परियोजना पूरी होने से क्षेत्र की बिजली आपूर्ति और मजबूत होने की उम्मीद।
सिमडेगा जिले में विद्युत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उपायुक्त कंचन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय वनाधिकार समिति की बैठक में झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 132 केवी द्विपथ कोलेबिरा-कामडारा संचरण लाइन निर्माण परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में परियोजना के लिए आवश्यक वन भूमि से संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत करने के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
कई ग्राम सभाओं ने सौंपे प्रस्ताव
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कोलेबिरा अंचल अंतर्गत भंवरपहाड़, जामटोली, लरबा, करमटोली और अघरमा ग्राम सभाओं द्वारा परियोजना से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं।
इन दस्तावेजों में ग्राम सभा की कार्यवाही, ट्रेस नक्शा और सामुदायिक अधिकार दावा प्रारूप ‘ख’ शामिल था।
अधिकारियों के अनुसार परियोजना के लिए कुल 19 भूखंडों की लगभग 3.3587 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि चिन्हित की गई है।
समिति ने दस्तावेजों की की समीक्षा
जिला स्तरीय वनाधिकार समिति के सदस्यों ने अनुमंडल स्तरीय समिति की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेजों का गहन अवलोकन किया।
समीक्षा के दौरान ग्राम सभाओं द्वारा पारित अनापत्ति प्रस्तावों को त्रुटिरहित पाया गया। इसके बाद समिति ने आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने और दस्तावेजों को पुनः समर्पित करने के निर्देश दिए।
सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय
बैठक के अंत में समिति ने सर्वसम्मति से परियोजना के पक्ष में निर्णय लेते हुए झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड को संबंधित वन भूमि पर FRA प्रमाण पत्र और अनापत्ति पत्र जारी करने की सहमति दी।
अधिकारियों ने कहा: “परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था अधिक मजबूत और सुचारु होगी।”
बिजली व्यवस्था को मिलेगा लाभ
इस परियोजना के शुरू होने से कोलेबिरा और कामडारा क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई संचरण लाइन बनने से बिजली आपूर्ति की क्षमता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर विद्युत सेवा उपलब्ध हो सकेगी।
बैठक में कई अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी शशांक शेखर सिंह, परियोजना निदेशक आईटीडीए श्रीमती सरोज तिर्की, जिला परिषद अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग, जिला परिषद सदस्य पूर्वी ठेठईटांगर अजय एक्का सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
सभी अधिकारियों ने परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
न्यूज़ देखो: विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच अहम कदम
बिजली व्यवस्था को मजबूत करना विकास के लिए जरूरी है, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वनाधिकार समिति द्वारा ग्राम सभाओं की सहमति और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद लिया गया निर्णय सहभागी विकास मॉडल की ओर संकेत करता है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी परियोजना को पारदर्शिता और पर्यावरणीय मानकों के साथ पूरा करने की होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विकास तभी सार्थक है जब जनता और प्रकृति दोनों सुरक्षित रहें
बेहतर बिजली व्यवस्था गांवों और शहरों के विकास की मजबूत आधारशिला है।
लेकिन विकास के साथ पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों की रक्षा भी जरूरी है।
आइए, जिम्मेदार और सहभागी विकास की सोच को आगे बढ़ाएं।
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