#खलारीझारखंड #हिंदूसम्मेलन : शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में संस्कृति और संगठन पर जोर दिया गया।
खलारी के डकरा स्थित दुर्गा मंडप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीसीएल एनके एरिया के महाप्रबंधक दिनेश कुमार गुप्ता ने की। सम्मेलन में महंत दिव्यानंद जी महाराज मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। आयोजन में समाजिक समरसता, संस्कृति संरक्षण और संगठन की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई।
- डकरा दुर्गा मंडप, खलारी में आयोजित हुआ हिन्दू सम्मेलन।
- मुख्य वक्ता रहे महंत दिव्यानंद जी महाराज।
- कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनेश कुमार गुप्ता ने की।
- विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए गोपाल शर्मा (प्रांत प्रचारक)।
- पाहन और पुजारियों का किया गया सम्मान।
- संघ के शताब्दी वर्ष पर समाजिक समरसता पर जोर।
खलारी के डकरा स्थित दुर्गा मंडप में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, कार्यकर्ता और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना और संगठन की भूमिका को सुदृढ़ करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत और अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम की अध्यक्षता सीसीएल एनके एरिया के महाप्रबंधक दिनेश कुमार गुप्ता ने की। मंचासीन अतिथियों में मुख्य वक्ता महंत दिव्यानंद जी महाराज और विशिष्ट अतिथि के रूप में झारखंड प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत तुलसी का पौधा भेंट कर किया गया, जो भारतीय परंपरा का प्रतीक है।
इसके साथ ही खलारी क्षेत्र के पाहन एवं पुजारियों को भी सम्मानित किया गया, जिससे स्थानीय धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान का संदेश गया।
महंत दिव्यानंद जी महाराज का संबोधन
मुख्य वक्ता महंत दिव्यानंद जी महाराज ने अपने संबोधन में सनातन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म और संस्कारों का ज्ञान होना चाहिए।
महंत दिव्यानंद जी महाराज ने कहा: “सनातन परिवार के प्रत्येक सदस्य को हनुमान चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र और गायत्री मंत्र का ज्ञान होना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि पूर्वजों द्वारा निर्धारित धर्म और मर्यादाओं को सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है। साथ ही उन्होंने हिन्दुस्तान, हिन्दू और हिन्दी की पहचान को बनाए रखने का आह्वान किया और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संकल्प दिलाया।
संघ की स्थापना और विचारधारा पर प्रकाश
इससे पूर्व विशिष्ट अतिथि गोपाल शर्मा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना और उसकी विचारधारा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के योगदान को याद करते हुए संगठन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
गोपाल शर्मा ने कहा: “1925 में संघ की स्थापना ने समाज को एक नई दिशा दी और आज भी यह संगठन समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।”
उन्होंने कुटुंब व्यवस्था, सामाजिक समरसता और संगठन की शक्ति पर भी अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का संचालन और उद्देश्य
कार्यक्रम का संचालन संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता गोपाल मिस्त्री विश्वकर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि इस हिन्दू सम्मेलन का उद्देश्य समाज में संघ की पहुंच को बढ़ाना और लोगों के बीच संगठन के प्रति समझ को और मजबूत करना है।
अंत में अध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
आयोजन में कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में विहिप जिला संयोजक विनोद विश्वकर्मा, शशि मेहता, रघुवंशनारायण सिंह, भोलानाथ चौहान, उदय सिंह, अवधेश राय, रंजीत सिंह, आनंद सिंह, मुन्नू सिंह, संतोष मेहता, कार्तिक पांडेय, विकास दुबे, अमित लोहरा, दीपक कुमार राय, नितेश तिवारी, रोनित सिंह, मयंक सिंह, दीपक वर्मा, अशोक तुरी, मुकेश तुरी, विक्की राम, बिट्टू रिमिक्स, किशन राम, राकेश गुप्ता, आलोक चौहान, अजीत पांडेय, मदन सिंह, संजय लोहरा, सुनीता महतो, ममता देवी, नीरा देवी, दीपशीखा पांडेय, संगीता देवी, गणेश महतो, मनी कुमार सहित कई स्थानीय कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
समाज में एकता और जागरूकता का संदेश
इस हिन्दू सम्मेलन के माध्यम से समाज में एकता, समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि समाज में इस प्रकार के आयोजनों के प्रति रुचि और जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है।
न्यूज़ देखो: संगठन और संस्कृति के संगम का संदेश
खलारी में आयोजित यह हिन्दू सम्मेलन स्पष्ट करता है कि सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों की भूमिका आज भी समाज में महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और सामूहिक चेतना को मजबूत करते हैं। हालांकि, यह भी जरूरी है कि ऐसे कार्यक्रम समाज में समरसता और सकारात्मक संवाद को और बढ़ावा दें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
समाज को जोड़ने वाले आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाएं
समाज की मजबूती केवल विचारों से नहीं, बल्कि सहभागिता से बनती है। ऐसे आयोजनों में शामिल होकर हम अपनी संस्कृति और परंपरा को और मजबूत कर सकते हैं।
अपने आसपास हो रहे सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लें और सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बनें।
युवाओं को भी ऐसे मंचों से जोड़ें ताकि वे अपनी पहचान और जिम्मेदारी समझ सकें।
सामूहिक प्रयास से ही एक सशक्त और जागरूक समाज का निर्माण संभव है।

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