#गुमला #धार्मिक_उत्सव : प्राण प्रतिष्ठा और कलश यात्रा से भक्तिमय हुआ पोटरो क्षेत्र।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड स्थित पोटरो गांव में प्राचीन बूढ़ा महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार के उपलक्ष्य में भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। रविवार को 1101 श्रद्धालुओं की कलश यात्रा निकाली गई और मंदिर में नई प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की भागीदारी रही। यह आयोजन क्षेत्र में आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा।
- पोटरो गांव में बूढ़ा महादेव मंदिर का पुनर्निर्माण संपन्न।
- 1101 कलश यात्रा परास नदी तक निकाली गई।
- नंदी महाराज और बजरंग बली की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा।
- रात्रि भजन-कीर्तन से गूंजा मंदिर परिसर।
- सोमवार को हवन-पूजन और विसर्जन कार्यक्रम निर्धारित।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत पोटरो गांव में स्थित प्राचीन बूढ़ा महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार के अवसर पर भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। इस आयोजन में क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रविवार को मंदिर परिसर से परास नदी तक निकाली गई 1101 कलश यात्रा ने आयोजन को विशेष भव्यता प्रदान की।
1101 कलश यात्रा से बना आध्यात्मिक माहौल
मंदिर परिसर से शुरू हुई कलश यात्रा में महिलाओं और युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह यात्रा परास नदी तक पहुंची, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कलश में जल भरकर पुनः मंदिर लाया गया। पूरे मार्ग में श्रद्धालु “हर हर महादेव” और “जय श्री राम” के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे, जिससे पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
प्राण प्रतिष्ठा का विशेष आयोजन
इस अवसर पर मंदिर में नव स्थापित नंदी महाराज और बजरंग बली की मूर्तियों की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पंडितों द्वारा धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भजन-कीर्तन से सजी रात
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि संध्या आरती के बाद देर रात 11 बजे तक भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। भक्तों ने भक्ति गीतों के माध्यम से भगवान का गुणगान किया और वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
समिति सदस्य बजरंग साहू ने कहा: “इस मंदिर में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नत मांगते हैं, भगवान भोलेनाथ उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करते हैं।”
सोमवार को हवन और विसर्जन
समिति के अनुसार सोमवार सुबह 8 बजे हवन-पूजन के बाद कलश विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का समापन होगा।
मंदिर समिति ने तय किए सहयोग शुल्क
मंदिर समिति ने मंदिर संचालन और धार्मिक कार्यों के लिए कुछ सहयोग राशि निर्धारित की है।
- शादी-विवाह के लिए 1100 रुपये
- मुंडन और चार पहिया वाहन पूजा के लिए 551 रुपये
- बाइक पूजा के लिए 251 रुपये
समिति का कहना है कि यह राशि मंदिर के रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने में सहायक होगी।
जनभागीदारी से सफल आयोजन
इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और समिति के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रमुख सहयोगियों में विपिन साहु, इंद्रजीत साहु, कृष्णा साहु, धर्मजीत साहु, सोनू साहु, संदीप साहु, बजरंग साहु, धनेश्वर साहु, सहाबीर उरांव, संदीप उरांव, गोपाल पुजार, डॉ कुमार, ओम प्रकाश साहु, बिट्टू साहु, अमित साहु, रवि साहु, लक्ष्मी साहु, शिव पूजन साहु, विकास साहु, रीता देवी, रिंकी देवी, इन्दू देवी, अजित साहु, कुन्दन साहु, चतुर्गुण साहु, अमरदीप साहु, अंकित, समीर, नितेश, आशीष, फूलचंद, आशीष सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे।
इसके अलावा कार्यक्रम में जिप सदस्य विजय लक्ष्मी कुमारी, पंकज कुमार, सतेंद्र साहु, सुप्रदीप साहु, गजराज महतो, घनश्याम आर्या, पूर्णिमा देवी समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
आस्था का केंद्र बना बूढ़ा महादेव मंदिर
स्थानीय लोगों का मानना है कि बूढ़ा महादेव मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। यहां दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर के जीर्णोद्धार से अब यह स्थान और अधिक आकर्षक और सुविधाजनक बन गया है।

न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
पोटरो में आयोजित यह भव्य धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता, सहयोग और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रतीक है। इस तरह के आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं। प्रशासन और समाज दोनों को ऐसे आयोजनों को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की दिशा में आगे आना चाहिए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ जागरूक समाज की ओर बढ़ें
धार्मिक आयोजन केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम हैं।
ऐसे कार्यक्रम हमें अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़ने का अवसर देते हैं।
जरूरी है कि हम इन आयोजनों में भाग लेकर सामाजिक एकता को मजबूत करें।
आइए, मिलकर अपने गांव और समाज को बेहतर बनाने का संकल्प लें।
आप भी ऐसे आयोजनों में शामिल हों, अपनी राय कमेंट में जरूर दें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें ताकि हमारी संस्कृति और परंपरा आगे बढ़ती रहे।

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