बीजियापानी में सौर ऊर्जा की नई सुबह, 57 परिवारों तक पहुंची विकास और आत्मनिर्भरता की रोशनी

बीजियापानी में सौर ऊर्जा की नई सुबह, 57 परिवारों तक पहुंची विकास और आत्मनिर्भरता की रोशनी

author Shivnandan Baraik
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#सिमडेगा #सौरऊर्जापहल : बीजियापानी में सामुदायिक सौर माइक्रोग्रिड से ग्रामीणों को नई सुविधा मिली।

सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड स्थित बीजियापानी गांव में सामुदायिक सौर माइक्रोग्रिड प्रणाली का शुभारंभ किया गया। एचडीएफसी बैंक परिवर्तन की सीएसआर परियोजना के तहत स्थापित इस पहल से 57 परिवारों सहित विद्यालय, आंगनबाड़ी और सामुदायिक भवन लाभान्वित होंगे। परियोजना का संचालन स्थानीय समितियों को सौंपा गया है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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  • बीजियापानी गांव में 17.6 किलोवाट क्षमता वाले सामुदायिक सौर माइक्रोग्रिड का शुभारंभ किया गया।
  • 57 परिवारों, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक भवन को परियोजना से सीधा लाभ मिलेगा।
  • परियोजना को एचडीएफसी बैंक परिवर्तन, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) और ग्राम ऊर्जा के सहयोग से स्थापित किया गया।
  • संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय सौर ऊर्जा समितियों को सौंपी गई।
  • कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
  • पहल से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उद्यमिता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड के अति सुदूरवर्ती ग्राम बीजियापानी में गुरुवार को विकास की एक नई कहानी लिखी गई। यहां एचडीएफसी बैंक परिवर्तन की सीएसआर परियोजना के अंतर्गत सामुदायिक प्रबंधित सौर माइक्रोग्रिड प्रणाली (CMSMS) का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस पहल के माध्यम से गांव के दर्जनों परिवारों को पहली बार नियमित और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति की सुविधा मिलने जा रही है, जिससे ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद बढ़ गई है।

सौर ऊर्जा से जुड़ेगा विकास का नया अध्याय

लामडेगा पंचायत के अंतर्गत आने वाले बीजियापानी गांव में 17.6 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है। यह संयंत्र गांव के 57 परिवारों के साथ-साथ विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक भवन को भी बिजली उपलब्ध कराएगा।

यह परियोजना एचडीएफसी बैंक परिवर्तन के वित्तीय सहयोग, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) के कार्यान्वयन सहयोग तथा ग्राम ऊर्जा के तकनीकी समर्थन से विकसित की गई है। परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण समुदायों को ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना भी है।

स्थानीय समितियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका सामुदायिक प्रबंधन मॉडल है। इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर गठित सिंगी मासकल परिवर्तन सौर ऊर्जा समिति एवं चंदा परिवर्तन सौर ऊर्जा समिति को सौंपी गई है।

इस व्यवस्था से ग्रामीण स्वयं परियोजना के संचालन में भागीदारी निभाएंगे, जिससे इसकी दीर्घकालिक स्थिरता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि समुदाय आधारित मॉडल ग्रामीण विकास की दिशा में अधिक टिकाऊ और सफल साबित होता है।

उद्घाटन समारोह में उमड़ा ग्रामीणों का उत्साह

उद्घाटन समारोह में गांव के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार, मुखिया, ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि तथा अन्य प्रखंड स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण कार्यक्रम में शामिल हुए।

डाहुकोना, सेमरिया, सालगाटोली, टिकरा, गटीगढ़ा, खरवागढ़ा और अन्य गांवों से आए ग्रामीणों ने इस पहल को ग्रामीण विकास की दिशा में प्रेरणादायक कदम बताया।

शिक्षा और आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता केवल रोशनी तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार भी बनती है।

सौर माइक्रोग्रिड से बच्चों को शाम के समय बेहतर अध्ययन का अवसर मिलेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियां अधिक प्रभावी बनेंगी और महिलाओं को घरेलू कार्यों में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही छोटे व्यवसायों और स्थानीय उद्यमों को भी नई गति मिलने की संभावना है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा:

प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा: “सौर ऊर्जा केवल बिजली का स्रोत नहीं बल्कि ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता और बेहतर जीवन स्तर का आधार है।”

उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाएं गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

सौर ऊर्जा परियोजना का एक बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण भी है। इससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाएं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित हो सकती हैं। यह पहल कार्बन उत्सर्जन को कम करने और हरित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अन्य गांवों में भी पहुंचेगी विकास की रोशनी

कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी गई कि जलडेगा प्रखंड के कई अन्य दुर्गम और वंचित गांवों में भी सर्वेक्षण कार्य चल रहा है। भविष्य में उन क्षेत्रों के परिवारों को भी इस परियोजना से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

एचडीएफसी परिवर्तन द्वारा ग्रामीण समुदायों के लिए स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास और बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में कई और गांव ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

न्यूज़ देखो: सौर ऊर्जा से बदलेगी ग्रामीण विकास की तस्वीर

बीजियापानी में सामुदायिक सौर माइक्रोग्रिड की शुरुआत यह दिखाती है कि यदि सरकारी तंत्र, निजी संस्थाएं और स्थानीय समुदाय मिलकर काम करें तो दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास की रोशनी पहुंचाई जा सकती है। यह पहल केवल बिजली उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई क्षेत्रों को प्रभावित करेगी। अब सबसे महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय समितियां इस परियोजना का सफल संचालन सुनिश्चित करें और इसे अन्य गांवों के लिए मॉडल के रूप में स्थापित करें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

गांवों की प्रगति से ही मजबूत होगा भारत

जब विकास की रोशनी गांवों तक पहुंचती है, तब समाज और राष्ट्र दोनों आगे बढ़ते हैं। स्वच्छ ऊर्जा जैसी पहलें केवल सुविधाएं नहीं देतीं, बल्कि नई संभावनाओं के द्वार खोलती हैं। यदि समुदाय स्वयं विकास कार्यों की जिम्मेदारी ले, तो बदलाव अधिक स्थायी और प्रभावी बनता है।

अपने गांव और क्षेत्र में चल रही सकारात्मक पहलों को समर्थन दें। जागरूक बनें, सहभागिता बढ़ाएं और विकास के प्रयासों को सफल बनाने में योगदान दें।

आप इस पहल के बारे में क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और ग्रामीण विकास की प्रेरणादायक कहानियों को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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